• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

भूमि अधिग्रहण कानून से जूझता उत्तराखंड

21/10/20
in उत्तराखंड
Reading Time: 1min read
462
SHARES
578
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तर प्रदेश जंमीदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 में एक बड़ा बदलाव किया है। इस कानून के अंर्तगत धारा 143 जो भू उपयोग से सम्बंधित है, में बदलाव कर कृषि भूमि को गैर कृषि के लिए बिना भू उपयोग बदले इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी गयी है। इस संशोधन को इस धारा के क में सम्मिलित किया गया है। इस संशोधन से कृषकों की उपज देने वाली जमीन अन्य उद्योग धंधों को खोलने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। इसी तरह धारा 154 जो पहले प्रदेश में साढ़े बारह एकड़ से अधिक कृषि भूमि को खरीदने से रोकता है, अब इसमें संशोधन करके उप धारा.2 जोडऩे से पर्वतीय क्षेत्र में उद्योग के लिए भूमि की खरीद की सीमा हटा दी गयी है। सरकार द्वारा कृषि भूमि को पट्टे पर देने की नीति तैयार करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है। किसानों द्वारा तीस साल के लिए भूमि लीज पर देने के एवज में किसानो को भूमि का किराया दिया जाएगा।
राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में, खेती, कृषि, बागवानी, जड़ी.बूटियों, ऑफ.सीजन सब्जियों, दूध उत्पादन, चाय बागान, फल संकरण और सौर ऊर्जा के लिए भूमि पट्टे की बाधाओं को नीति से हटा दिया गया है। अब कोई भी संस्था, कंपनी, फर्म या एनजीओ 30 साल की लीज पर अधिकतम 30 एकड़ कृषि भूमि को पट्टे पर ले सकती है। विशेष परिस्थितियों में अधिक भूमि लेने का प्रावधान भी रखा गया है। यदि खेत के आसपास सरकारी जमीन है, तो जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति से शुल्क का भुगतान करके इसे पट्टे पर लिया जा सकता है। राज्य सरकार ने भूमि के चकबंदी में कठिनाइयों के मद्देनजर यह नीति बनाई है। भूमि अधिग्रहण में संशोधन कर दिया गया है। भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में ग्रामीण इलाकों में भूमि अधिग्रहण पर चार गुना और शहरी इलाकों में दोगुना मुआवजा देने का प्रावधान था। इसे घटाकर अब दो गुना कर दिया गया है। राजस्व विभाग के अधिकारी अब नए सिरे से आकलन कर किसानों की सूची बनाने में जुट गए हैं। ग्रामीण इलाकों में केंद्रीय परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण बाजार भाव पर ही होगा।।
2015 में सरकार ने इसमें संशोधन किया था, जिसे लेकर राज्यों में संशय था। कुछ राज्यों की मांग पर केंद्र सरकार ने इस बारे में स्पष्टीकरण जारी किया है। इसमें कहा गया है कि भूमि का मुआवजा वही होगा, जो राज्यों ने निर्धारित किया है। अलग राज्य बनाने के बाद भी पर्वतीय कृषि उत्पादों का न तो राज्य सरकारों ने कोई न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया है और न ही उनकी खरीद की गारंटी की गई है। पूरे देश में और हमारे राज्य के मैदानी जिलों में भी सरकार द्वारा कृषि उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर उसके खरीद की गारंटी के लिए सरकारी क्रय केन्द्र खोले जाते हैं। मगर पहाड़ के कृषि उत्पादों का न तो राज्य सरकार ने कोई न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है और न ही इसकी खरीद की गारंटी के लिए सरकारी क्रय केन्द्र खोले गए हैं। पहाड़ के किसानों की राज्य सरकार द्वारा की जा रही इस पूर्ण अनदेखी के चलते यहाँ का किसान खेती के प्रति लगातार उदासीन और हतोत्साहित होता रहा है। कठिन जीवन स्थितियों और कठोर मेहनत के बल पर पहाड़ के किसानों द्वारा पैदा किये गए इन जैविक उत्पादों को कौड़ियों के भाव लुटाने के लिए उन्हें मजबूर है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी पहाड़ की कृषि को रोजगारपरक बनाने के लिए एक ठोस नीति बनाने के बजाय सरकारों ने कृषि क्षेत्र पर हमले तेज किए। कृषि क्षेत्र के लिए आधारभूत ढांचागत सुविधाएँ उपलब्ध कराने, राज्य द्वारा कृषि में पूंजी निवेश को बढ़ावा देने की नीति के उलट ऊर्जा प्रदेश, इको ट्यूरिज्म और औद्योगिकीकरण के नाम पर किसानों की जमीनों को कारपोरेट घरानों और पूंजीपतियों के हवाले किया जा रहा है।
कृषि क्षेत्र के विकास और राज्य की 75 प्रतिशत ग्रामीण आबादी की आजीविका की सुरक्षा के लिए जिन प्राथमिक कदमों को उठाने की राज्य सरकारों से उम्मीद थी वो उनके एजंडे से पूरी तरह गायब हैंण् पहाड़ में पिछड़े किस्म के भूमि सम्बन्ध और अति पिछड़ी उत्पादन पद्धति में किसी तरह के बदलाव की कोई कोशिश नहीं की गईण् इसके चलते खेती लगातार अलाभप्रद और अरुचिकर होती गई। राज्य बन जाने के बाद भी स्थितियों में कोई बदलाव आता न देख आज बड़े पैमाने पर किसान पलायन को मजबूर हो गए हैं। आज पहाड़ में औसतन प्रति परिवार आधा एकड़ कृषि भूमि ही किसानों के पास बची है। कृषक आबादी के भूमिहीनता की स्थिति में पहुंचते जाने और रोजगार के कोई नए क्षेत्र विकसित न होने के कारण ग्रामीणों के सामने रोटी के लिए पलायन ही एकमात्र रास्ता बचा रह गया। आज की परिस्थियों को ध्यान में रख कर भूमि की सीलिंग सीमा को घटा कर उपरोक्त भूमि असुंतलन को ठीक करने की जरूरत है। हरिद्वार का क्षेत्रफल उत्तराखंड में मात्र 5 प्रतिशत है। जबकि राज्य बनते समय राज्य की कुल आबादी में हरिद्वार का हिस्सा 20 प्रतिशत थाण् इसी तरह राज्य की कृषि भूमि के मामले में भी जो 14 प्रतिशत कृषि भूमि थी, उसमें अकेले 5 प्रतिशत हरिद्वार की है। यानी कुल कृषि भूमि का लगभग 35 प्रतिशत, इसका नतीजा यह हुआ कि आबादी के हिसाब से विकास कार्यों का 20 प्रतिशत बजट और कृषि पर मिलने वाली सुविधाओं का 35 प्रतिशत अकेले राज्य के 5 प्रतिशत क्षेत्रफल हरिद्वार में जाने लगा। राज्य बनने के बाद संशाधनों के इस असमान वितरण के कारण पहाड़ से पलायन तेजी से बढ़ने लगा। इस पलायन से राज्य के मैदानी क्षेत्रों में आबादी का घनत्व और बढ़ता गया। इसने विकास और राज्य द्वारा पूंजी निवेश में पहाड़ और मैदान के बीच की खाई को और भी चौड़ा कर दिया है।
यही नहीं राज्य विधानसभा और लोकसभा में प्रतिनिधित्व के मामले में भी यह खाई और चौड़ी होती जा रही हैण् भविष्य में होने वाले चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन के बाद उत्तराखंड विधान सभा में पहाड़ मैदान का अनुपात क्रमशः 35-65 तक पहुंच सकता है। अगर पहाड़ में कृषि भूमि के आंकड़ों पर नजर डालें तो सन् 1823 के बंदोबस्त के समय पहाड़ में 20 प्रतिशत भूमि पर खेती होती थी। मगर सन् 1865 में अंग्रेजों द्वारा वन विभाग का गठन करने और वन कानूनों को लागू करने के बाद किसानों के हाथ से जमीनों के छिनने का सिलसिला शुरू हो गया था। सन् 1958 के अंतिम बंदोबस्त के समय उत्तराखंड में ;हरिद्वार को छोड़कर, मात्र 9 प्रतिशत कृषि भूमि ही बची थी। ताजे अनुमान के अनुसार राज्य बनने के बाद इन 19 वर्षों में राज्य की कृषि भूमि में से 1 लाख हैक्टेयर से ज्यादा भूमि कृषि से बाहर निकल चुकी हैण् सात राज्यों ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश में प्रस्तावित प्रावधानों को अपना लिया है, जबकि 14 राज्यों ने इसमें मामूली बदलाव किया है। इन बदलावों ने कानून को काफी हद तक निष्प्रभावी बना दिया है।गौर करने लायक बात है कि इस दौरान गरीब व सीमांत किसानों की जमीनें ही मुख्य रूप से खेती से बाहर निकली हैण्इसके साथ ही हिमांचल प्रदेश की तर्ज पर बाहरी लोगों के कृषि भूमि खरीदने पर रोक लगाने की जरूरत है। नए भूमि सुधार कानून में इन बुनियादी सवालों को प्रमुखता मिलनी चाहिए। पूरे राज्य के लिए एक नया भूमि सुधार कानून लाना उत्तराखंड राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

Share185SendTweet116
Previous Post

सहायक उपनिरीक्षक व निरीक्षक पुलिस को वर्दी भत्ते में 1000 रुपये की वृद्धि

Next Post

निष्कासित रोडवेज कर्मियों के समर्थन में उक्रांद सभी डिपो पर धरना-प्रदर्शन करेगा

Related Posts

उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने हर घर तिरंगा यात्रा कार्यक्रम में किया प्रतिभाग

August 9, 2026
9
उत्तराखंड

डिब्बे में फंस गया विशाल मॉनिटर लिजर्ड का सिर, शिक्षिका और युवक ने बचाई जान

August 9, 2026
10
उत्तराखंड

समय के साथ उधड़ने लगी हथकरघे से बुनी विरासत

August 9, 2026
6
उत्तराखंड

डोईवाला: साईं सृजन पटल ने मनाया द्वितीय स्थापना दिवस

August 9, 2026
16
उत्तराखंड

डोईवाला: जेसीबी की मदद से सोंग नदी पर फिर तैयार किया अस्थायी बांध

August 9, 2026
26
उत्तराखंड

देहरादून एयरपोर्ट की जिप्सम फॉल्स सीलिंग का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त

August 9, 2026
9

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67718 shares
    Share 27087 Tweet 16930
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45787 shares
    Share 18315 Tweet 11447
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38074 shares
    Share 15230 Tweet 9519
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37453 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37374 shares
    Share 14950 Tweet 9344

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

मुख्यमंत्री ने हर घर तिरंगा यात्रा कार्यक्रम में किया प्रतिभाग

August 9, 2026

डिब्बे में फंस गया विशाल मॉनिटर लिजर्ड का सिर, शिक्षिका और युवक ने बचाई जान

August 9, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.