डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से महज 15 किलोमीटर दूर शेरागांव (सेरागांव) की बेटियां 12वीं पास करने के बाद भी सरकारी मदद के लिए भटक रही हैं. ‘अपणि सरकार पोर्टल’ पर गांव का नाम नहीं होने से जाति, मूल निवास और आय प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं. नतीजा ये है कि नंदा गौरा योजना का लाभ लेने की उम्मीद लगाए बैठी छात्राओं के सामने आवेदन की समय सीमा खत्म होने का डर है. वहीं, गांव की समस्या सामने आने के बाद शासन ने जल्द समाधान का भरोसा दिया है.देहरादून से सहस्रधारा की ओर जाने वाले रास्ते पर बसा शेरागांव (सेरागांव) भले ही राजधानी से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर हो, लेकिन यहां रहने वाले लोगों के लिए सरकारी सुविधाओं तक पहुंचना आसान नहीं रह गया है. मसूरी विधानसभा क्षेत्र की सैरा यानी शेरा ग्राम पंचायत के ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी ऑनलाइन व्यवस्था में उनके गांव का नाम दर्ज नहीं होने के कारण उन्हें जरूरी प्रमाण पत्र बनवाने में परेशानी हो रही है. यह समस्या केवल एक दस्तावेज बनवाने तक सीमित नहीं है. इसका सीधा असर उन छात्राओं पर पड़ रहा है, जिन्होंने हाल ही में 12वीं की परीक्षा पास की है और अब आगे की पढ़ाई के लिए सरकार की नंदा गौरा योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता का इंतजार कर रही हैं. जिन बेटियों के लिए यह मदद कॉलेज की फीस और आगे की पढ़ाई का सहारा बन सकती है, वे आज अपने ही गांव का नाम सरकारी पोर्टल पर दर्ज कराने के लिए परेशान हैं. ग्रामीणों के मुताबिक, गांव का नाम ‘अपणि सरकार पोर्टल’ पर उपलब्ध नहीं होने के कारण जाति, मूल निवास और आय जैसे प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है. उत्तराखंड में नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए इस पोर्टल के माध्यम से प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन किया जाता है, लेकिन जब संबंधित गांव का नाम ही सूची में दिखाई नहीं देता, तो ग्रामीणों के सामने आवेदन करने का रास्ता बंद हो जाता है.शेरागांव के लोगों का कहना है कि वे पिछले करीब एक साल से इस समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट रहे हैं. इसके बावजूद समस्या दूर नहीं हो सकी है. अब नंदा गौरा योजना के आवेदन की अंतिम तारीख नजदीक आने के कारण छात्राओं और उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है. इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा परेशानी उन छात्राओं को हो रही है, जिन्होंने 12वीं पास करने के बाद उच्च शिक्षा हासिल करने के सपने देखे हैं. शेरागांव की छात्रा श्वेता राणा भी इन्हीं में से एक हैं. श्वेता ने मेहनत करके 12वीं की परीक्षा पास की है और आगे कानून की पढ़ाई करना चाहती हैं.उनके लिए यह केवल कॉलेज में दाखिला लेने का सवाल नहीं है, बल्कि अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में बढ़ाया गया पहला कदम है. श्वेता ने अपनी समस्या रखी. अंशिका का कहना है कि हमारा गांव राजधानी के इतने करीब होने के बावजूद उन्हें बुनियादी सरकारी सेवाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है. उन्हें चिंता है कि अगर समय पर आवेदन नहीं हो पाया, तो आगे की पढ़ाई के लिए मिलने वाली मदद से वे वंचित रह सकती हैं. . इसी ग्राम पंचायत के बसवाल गांव की छात्रा अनीषा भी नंदा गौरा योजना के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं बनवा पा रही हैं. अनीषा ने बताया कि 12वीं पास करने के बाद वे आगे पढ़ना चाहती हैं.इसके लिए योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके परिवार के लिए काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन जाति और मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन करने पहुंचीं, तो उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा. अनीषा ने सरकार से गुहार लगाते उनकी समस्या का समाधान करने की मांग की है. मामला सरकारी योजनाओं और ऑनलाइन सेवाओं के बीच तालमेल की अहमियत को सामने लाता है. एक ओर सरकार बेटियों की शिक्षा और आर्थिक सहायता के लिए योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर गांव का नाम पोर्टल पर दर्ज नहीं होने जैसी समस्या जरूरतमंद परिवारों को उन योजनाओं तक पहुंचने से रोक रही है. ग्रामीणों की शिकायत है कि वे लंबे समय से इस परेशानी को उठा रहे हैं, लेकिन समाधान में देरी का सबसे ज्यादा असर छात्राओं पर पड़ रहा है. अब जबकि सचिव आईटी ने मामले को प्राथमिकता पर लेने और संबंधित अधिकारियों से बातचीत का भरोसा दिया है, तो उम्मीद है कि जल्द रास्ता निकलेगा, लेकिन गांव की बेटियों के लिए सिर्फ आश्वासन काफी नहीं है. उन्हें समय पर प्रमाण पत्र चाहिए, आवेदन करने का अवसर चाहिए और अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए जरूरी सहायता हासिल करने का मौका चाहिए.प्रशासन के सामने चुनौती यही है कि वह पोर्टल पर गांव का नाम दर्ज करने और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को जल्द पूरा करें. ताकि, सरकारी व्यवस्था की एक चूक इन छात्राओं के भविष्य के रास्ते में रुकावट न बने. शेरागांव की बेटियां अब यही उम्मीद कर रही हैं कि उनकी आवाज शासन तक पहुंचने के बाद समस्या का वास्तविक समाधान भी जल्द जमीन पर दिखाई देगा. इन ऑनलाइन सेवाओं के शुरू होने से लोगों को आवश्यक प्रमाण पत्र सुगमता से प्राप्त होंगे. समय और खर्चे की भी बचत होगी. सभी प्रमाण पत्र डिजी लॉकर में एकीकृत एवं संग्रहित होंगे. साथ ही एक तय समयसीमा के अंदर सभी सेवाओं का लाभ आवेदनकर्ता को घर बैठे मिल सकेगा. अनेक विशेषताओं वाले इस पोर्टल के निगरानी तंत्र के माध्यम से सभी कर्मचारियों व अधिकारियों की जबाबदेही भी सुनिश्चित की जा सकेगी, जिसके परिणाम स्वरूप एक पारदर्शी व जवाबदेह व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहेगी.वहीं, इस पोर्टल के जरिए नागरिकों के आवेदन करने की प्रक्रिया प्रारंभ होते ही सक्षम पदाधिकारी के निगरानी में सभी प्रक्रिया संपन्न होगी. पटवारी से तहसीलदार, जिलाधिकारी से मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव व मुख्यमंत्री तक इस मॉनिटरिंग तंत्र के हिस्सा हैं. जिससे यह स्पष्ट है कि ‘अपणि सरकार पोर्टल’ सुलभता के साथ उत्तराखंड सरकार को आपके द्वार लाने का ही नहीं बल्कि जबाबदेह प्रशासन की नीति को भी मुकम्मल करेगी. अपणि सरकार और उन्नति पोर्टल शुरू किया था. लेकिन ये पोर्टल शुरुआत से ही लोगों के लिए सिर दर्द बने हुए हैं. ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल की सभी सेवाएं अपणि सरकार पोर्टल पर उपलब्ध करवा दी गईं हैं. अपणि सरकार और उन्नति पोर्टल शुरू किया था. माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का खर्च चलाते हैं. ऐसे में निजी कॉलेजों की फीस और पढ़ाई से जुड़े दूसरे खर्च उठाना उनके परिवार के लिए आसान नहीं है. सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके लिए बड़ी मदद साबित हो सकती थी, लेकिन प्रमाण पत्रों के अभाव में योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया ही शुरू नहीं हो पा रही हैलेकिन ये पोर्टल शुरुआत से ही लोगों के लिए सिर दर्द बने हुए हैं. ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल की सभी सेवाएं अपणि सरकार पोर्टल पर उपलब्ध करवा दी गईं हैं. प्रशासन के सामने चुनौती यही है कि वह पोर्टल पर गांव का नाम दर्ज करने और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को जल्द पूरा करें. ताकि, सरकारी व्यवस्था की एक चूक इन छात्राओं के भविष्य के रास्ते में रुकावट न बने. शेरागांव की बेटियां अब यही उम्मीद कर रही हैं कि उनकी आवाज शासन तक पहुंचने के बाद समस्या का वास्तविक समाधान भी जल्द जमीन पर दिखाई देगा. ।.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.














