डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
देवभूमि उत्तराखंड हाल के दिनों में मदरसों और मज़ारों को लेकर चर्चा में है. राज्य में मौजूद मदरसों की जांच के आदेश ने एक बार फिर मुद्दा गरमा दिया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के मदरसों के जांच के आदेश दिए हैं. पुलिस महानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में राज्य में संचालित सभी मदरसों की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी. इस जांच अभियान का मुख्य उद्देश्य अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना. साथ ही, यह सुनिश्चित करना है कि सभी मदरसे कानूनी ढांचे के भीतर कार्य कर रहे हैं या नहीं.पुलिस महानिरीक्षक कानून-व्यवस्था ने कहा कि राज्य के अवैध मदरसों की गहनता से जांच की जाएगी. इनमें बाहरी राज्यों के छात्रों के शामिल होने और अवैध गतिविधियों की आशंका पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. वहीं राज्य बाल अधिकार आयोग की अध्यक्ष ने इसे उत्तराखंड की डेमोग्राफी को बदलने की साजिश बताया और कहा कि अवैध मदरसों में न केवल बच्चों का शोषण हो रहा है, बल्कि उनकी आड़ में संपत्तियां कब्जाई जा रही हैं. हालांकि, वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि डेमोग्राफी चेंज जैसी बातें निराधार हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक, उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी लगभग 14% थी, लेकिन अब देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंहनगर और नैनीताल जैसे जिलों में यह 30% से ज्यादा हो गई है. इसे राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक संरचना के लिए चुनौती माना जा रहा है. मुख्यमंत्री ने राज्य में अवैध रूप से चल रहे मदरसों की जांच के लिए गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. इसके तहत जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी, जो विभिन्न विभागों के समन्वय से एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी. उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के मुताबिक, 2003 में इसके पास करीब 2100 संपत्तियां थीं, जो अब बढ़कर 5000 से अधिक हो गई हैं. इनमें सबसे ज्यादा 1891 संपत्तियां हरिद्वार में हैं. हरिद्वार, जिसे तीर्थनगरी माना जाता है, वहां 322 मस्जिदें, 58 दरगाह, 25 मदरसे और 386 कब्रिस्तान हैं. देहरादून में 1680, उधमसिंहनगर में 885, और नैनीताल में 407 वक्फ संपत्तियां हैं. पूरे राज्य में 800 से ज्यादा मदरसे संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से केवल 416 ही पंजीकृत हैं. अपंजीकृत मदरसों में अवैध गतिविधियों और बच्चों के शोषण के आरोप लगाए जा रहे हैं. इसके अलावा, उत्तराखंड में डेमोग्राफी चेंज का मुद्दा चर्चा का विषय बना रहता है. प्रदेश में संचालित होने वाले सभी मदरसों का मदरसा बोर्ड में पंजीकृत होना जरूरी है। इस समय मदरसा बोर्ड के अंतर्गत 415 मदरसे संचालित हो रहे हैं। यहां 40 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रदेश में बड़ी संख्या में अपंजीकृत मदरसों के संचालित होने की शिकायतें आ रही हैं। पहाड़ी जिलों में चमोली में एक, रुद्रप्रयाग में एक, टिहरी में चार, पौड़ी में दस, उत्तरकाशी में एक, बागेश्वर में तीन, चंपावत में छह, अल्मोड़ा में छह और पिथौरागढ़ में तीन मस्जिद होने की जानकारी सामनेआई उत्तराखंड के कई जिलों में चलाए जा रहे मदरसों की एक रिपोर्ट सामने आई है, जो कि बेहद चौंकाने वाली है. 30 मदरसों में बड़ी संख्या में गैर मुस्लिम बच्चे पढ़ रहे हैं. जिनकी संख्या 749 है. हाल ही में शिक्षा परिषद ने मान्यता प्राप्त सभी मदरसों की मैपिंग कराई है. रिपोर्ट के मुताबिक ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और नैनीताल जिलों के कई मदरसों में कुल 7,399 बच्चे पढ़ रहे हैं. इनमें 749 बच्चे गैर मुस्लिम हैं. रिपोर्ट के मुताबिक इन मदरसों की संख्या 30 है. जहां 749 गैर मुस्लिम बच्चे मदरसों में शिक्षा ले रहे हैं. दरअसल, पिछले कुछ सालों में देवभूमि में तेजी के साथ मस्जिद, मदरसे, मजार का जाल फैला है और इनके पीछे-पीछे बाहरी मुसलमानों की घुसपैठ भी बढ़ी है और इसका उदाहरण 2011 के जनसंख्या के आंकडे. आंकडे बताते हैं कि उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी तब 14 फीसदी के आसपास थी, जो अब देहरादून, यूएसनगर, हरिद्वार, नैनीताल जैंसे जिलों में बढ़कर तीस फीसदी से ऊपर जा चुकी है. जिसे देवभूमि की डेमोग्राफी के लिए एक बड़े चैलेंज के रूप में देखा जा रहाहै. उत्तराखंड की सरकारी जमीनों पर कब्जे कर मदरसे बनाए जाने के मामले भी खुलकर सामने आ रहे है, किंतु इस बारे में अल्पसंख्यक मंत्रालय, नगर विकास मंत्रालय क्यों मौन धारण कर लेता है? ये बड़ा सवाल है। पछुवा देहरादून हरिद्वार जिले में ऐसे बड़े-बड़े मदरसे बिना प्रशासन की अनुमति से आखिर कैसे बनते चले गए ये भी बड़ा सवाल है? खास बात ये है कि शासन स्तर पर इन मदरसों को लेकर जांच पड़ताल की बात शुरू तो होती है। लेकिन, एका-एक इसमें रहस्यमई खामोशी भी छा जाती है। ऐसा प्रतीत होता है कि इन अवैध मदरसों के संचालक ऊंची पहुंच का इस्तेमाल कर जांच पड़ताल को निष्क्रिय कर देते है। बहरहाल देवभूमि उत्तराखंड में भी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और असम राज्यों की तरह अवैध मदरसों के खिलाफ कारवाई की जरूरत समझी जा रही है।














