डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर गुरुवार को बड़ा हादसा हो गया। सोनप्रयाग स्थित हनुमान मंदिर के पास अचानक पहाड़ी से भारी पत्थर गिरने लगे, जिसकी चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद यात्रा मार्ग पर अफरा-तफरी मच गई और मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई। जानकारी के अनुसार घटना उस समय हुई जब मार्ग पर आवाजाही जारी थी। अचानक पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन दो लोग इसकी चपेट में आ गए। मृतकों और घायलों में एक नेपाली मूल का व्यक्ति तथा एक स्थानीय निवासी शामिल बताए जा रहे हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों और सुरक्षा कर्मियों की मदद से घायल व्यक्ति को तुरंत बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। प्रशासन ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।हादसे के बाद प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। संवेदनशील और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि जिन स्थानों पर पत्थर गिरने का खतरा अधिक है, वहां संचालित अस्थायी दुकानों और ढांचों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से रुकने से बचें। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बदलते मौसम और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए यात्रा मार्ग पर निगरानी भी बढ़ा दी गई है।उत्तराखंड में चारधाम यात्रा जोरो शोरों पर चल रही है. चारों धामों के कपाट खुलने के बाद से अभी तक 15,63,672 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं. वहीं, ये आंकड़ा उत्तराखंड में मानसून सीजन शुरू होने से पहले तक करीब 25 लाख तक पहुंचने की संभावना है. जहां एक ओर चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है. वहीं, दूसरी ओर हृदय गति और स्वास्थ्य खराब होने की वजह से श्रद्धालुओं के मौत का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है. चारधाम यात्रा में 17 मई तक यानी इन 29 दिनों में 55 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है.दरअसल, देवभूमि की चारधाम यात्रा, 19 अप्रैल को गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही शुरू हो गई थी. इसके साथ ही 22 अप्रैल को बाबा केदारनाथ धाम और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे. ऐसे में चारधाम की यात्रा पूर्ण रूप से शुरू हो गई. चारधाम यात्रा के कपाट खुलने के दौरान खासकर केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ देखी गई. वर्तमान समय में चारधाम के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 15 लाख 63 हजार 672 पहुंच गया है. हालांकि, इस दौरान मौसम खराब होने और धामों में बारिश-बर्फबारी होने के बावजूद श्रद्धालुओं की भीड़ पर कोई असर नहीं पड़ा. लेकिन उत्तराखंड चारधाम यात्रा के मार्गों पर हो रही श्रद्धालुओं की मौत अब सरकार और स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौंती बनती जा रही है. जिसके पीछे की मुख्य वजह यही है कि लगातार श्रद्धालुओं के मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, अभी तक 55 श्रद्धालुओं की मौत हृदय गति रुकने और स्वास्थ्य खराब होने की वजह से हो चुकी है. जिसमें से सबसे अधिक बाबा केदारनाथ यात्रा मार्ग पर 30 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है. इसके अलावा, बदरीनाथ धाम यात्रा मार्ग पर 10 श्रद्धालुओं, यमुनोत्री धाम के यात्रा मार्ग पर आठ श्रद्धालुओं और गंगोत्री धाम की यात्रा मार्ग पर सात श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है. वहीं, बीते दिन यानी, 17 अप्रैल को दो श्रद्धालुओं की मौत केदारनाथ यात्रा मार्ग पर हुई है. चारधाम यात्रा मार्ग पर लगातार बढ़ रहे श्रद्धालुओं के मौतों का आंकड़ा इसलिए भी चुनौंती बना हुआ है, क्योंकि चारधाम यात्रा शुरू हुए अभी महज एक महीने का ही वक्त पूरा होने जा रहा है. जबकि अभी भी यात्रा में 5 महीने का वक्त बचा हुआ है. इसके अलावा मानसून सीजन के दौरान चार धाम की यात्रा श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी चुनौंती होती है. इस दौरान भी श्रद्धालुओं के मौत के मामले पिछले सालों में देखे गए हैं. ऐसे में चारधाम की यात्रा पर लगातार हो रहे श्रद्धालुओं के मौत के आंकड़े में लगाम लगाना स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौंती बन गई है. जबकि यात्रा शुरू होने से पहले स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया था कि इस साल श्रद्धालुओं के मौतों के आंकड़े में कमी देखने को मिलेगी. बावजूद इसके आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. नका कहना है कि सबसे बड़ी चिंता मौसम और भीड़ का संतुलन बनाए रखना है. पहाड़ों में मौसम कब बदल जाए इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं होता. ऐसे में भारी भीड़ के बीच बारिश, भूस्खलन या रास्ता बाधित होने जैसी स्थिति कभी भी परेशानी बढ़ा सकती है. यही वजह है कि प्रशासन लगातार यात्रियों से अपील कर रहा है कि वे बिना पंजीकरण यात्रा पर न निकलें, स्वास्थ्य जांच जरूर कराएं और यात्रा के दौरान नियमों का पालन करें. चारधाम यात्रा 2026 एक ओर जहां आस्था और श्रद्धा का विशाल उत्सव बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर यह हमें यह भी याद दिलाती है कि प्रकृति के कठिन रास्तों पर चलने के लिए तैयारी और सावधानी अत्यंत आवश्यक है।प्रधानमंत्री स्तर से लेकर राज्य सरकार तक, सभी इस यात्रा को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए प्रयासरत हैं। लेकिन अंततः हर यात्री की जिम्मेदारी है कि वह अपनी स्वास्थ्य स्थिति को समझते हुए ही इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बने।आस्था तभी सार्थक है, जब वह जीवन की सुरक्षा और संतुलन के साथ जुड़ी हो।.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











