• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड में वन्यजीव हमलों से दहशत, तीन साल में 345 बाघ और तेंदुओं की मौत

22/05/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
11
SHARES
14
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में राज्य में 45 बाघों की मौत दर्ज की गई। इनमें तीन बाघों का अवैध शिकार किया गया, जबकि नौ की मौत अज्ञात कारणों से हुई। पांच बाघ सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए और 20 की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई। इसके अलावा कुछ मामलों में रेल दुर्घटनाएं और अन्य हादसे भी सामने आए। वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में राज्य में 45 बाघों की मौत दर्ज की गई। इनमें तीन बाघों का अवैध शिकार किया गया, जबकि नौ की मौत अज्ञात कारणों से हुई। पांच बाघ सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए और 20 की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई। इसके अलावा कुछ मामलों में रेल दुर्घटनाएं और अन्य हादसे भी सामने आए।स्थिति तेंदुओं के मामले में और अधिक गंभीर दिखाई देती है। रिपोर्ट के अनुसार, तीन साल में 303 तेंदुओं की मौत हुई है। इनमें कई तेंदुए जाल में फंसकर मारे गए, कुछ रेल और सड़क दुर्घटनाओं की भेंट चढ़े, जबकि बड़ी संख्या में तेंदुओं की मौत आपसी संघर्ष और अन्य दुर्घटनाओं में हुई। वन विभाग के अनुसार, 64 तेंदुओं की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, जबकि पांच को मानव जीवन के लिए खतरनाक घोषित किए जाने के बाद मारना पड़ा।विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, वन्यजीवों के लिए सबसे बड़ा खतरा अवैध शिकार है। जहर, खटका और क्लच वायर जैसे खतरनाक तरीकों से वन्यजीवों का शिकार किया जा रहा है। खासतौर पर वन क्षेत्रों में अवैध रूप से रह रहे कुछ वन गुर्जरों पर वन्यजीव शिकार में संलिप्त होने के आरोप लगते रहे हैं। कई मामलों में वन्यजीव अंगों की तस्करी के नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है।हाल ही में हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज में दो बाघों को जहर देकर मारने का मामला सामने आया। इससे पहले भी कई घटनाओं में वन्यजीव अंगों के साथ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में उत्तर प्रदेश सीमा से जुड़े लोगों की संलिप्तता भी सामने आई है। मोहंड क्षेत्र में तेंदुए की खाल के साथ वन गुर्जरों की गिरफ्तारी और वर्ष 2016 में गैंडीखत्ता में बाघ की खाल के साथ चार लोगों की गिरफ्तारी जैसे मामले वन्यजीव तस्करी की गंभीरता को दर्शाते हैं।वन्यजीव संरक्षण के लिए विभाग ने एंटी पोचिंग सेल और सर्विलांस सिस्टम गठित किए हैं। जंगलों में गश्त बढ़ाई गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। बावजूद इसके, अवैध शिकार की घटनाएं पूरी तरह नहीं रुक पा रही हैं।वन मंत्री ने भी माना है कि वन गुर्जरों के विस्थापन में चुनौतियां बनी हुई हैं। सरकार की ओर से प्रति परिवार 15 लाख रुपये तक का पुनर्वास पैकेज देने की पेशकश की गई थी, लेकिन विस्थापन की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। विभाग का मानना है कि जंगलों में मानवीय गतिविधियों का बढ़ता दबाव वन्यजीवों के लिए खतरा बन रहा है।वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो उत्तराखंड की समृद्ध वन्यजीव विरासत पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। बाघ और तेंदुए केवल जंगलों की शान ही नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी संतुलन के महत्वपूर्ण आधार भी हैं। इनके संरक्षण के लिए सरकार, वन विभाग और समाज को मिलकर प्रभावी रणनीति अपनानी होगी, ताकि जंगलों के ये बेशकीमती प्रहरी सुरक्षित रह सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे जैव विविधता वाले राज्य में बाघ और तेंदुए केवल वन्यजीव नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं। लगातार हो रही मौतें वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियों को उजागर करती हैं। संरक्षणवादियों ने जंगलों में गश्त बढ़ाने, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करने और वन्यजीव अपराधों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।इसके साथ ही जंगलों में रहने वाले समुदायों के पुनर्वास, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो राज्य की वन्यजीव संपदा पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है। राज्य में पिछले तीन साल में 45 बाघों की मौत हुई है। इनमें अवैध शिकार से तीन, अज्ञात वजह से नौ, सड़क दुर्घटना में पांच और प्राकृतिक कारणों से 20 बाघ शामिल हैं। इस अवधि में 303 तेंदुए भी मारे गए हैं। इनमें एक जाल में फंसकर, तीन रेल दुर्घटना में, 21 सड़क दुर्घटना में, 52 आपसी लड़ाई से, 33 अन्य दुर्घटनाओं में, 64 प्राकृतिक कारणों से और पांच मानव जीवन के लिए खतरनाक घोषित किए जाने के बाद मारे गए। मंत्री के इस बयान के बाद विभागीय हलकों में भी हलचल तेज हो गई है. बताया जा रहा है कि जिस रेंजर पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है, वह लंबे समय से हरिद्वार जिले की विभिन्न रेंजों में तैनात रहा है. कभी श्यामपुर रेंज तो कभी रुड़की और खानपुर रेंज में उसकी पोस्टिंग रही है. ऐसे में अब इस बात को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतने लंबे समय तक एक ही जिले में तैनाती क्यों बनी रही? और पर्वतीय जनपदों में ऐसे अधिकारियों को क्यों नहीं भेजा जाता.उधर, इस पूरे मामले की जांच फिलहाल एसडीओ स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है. हालांकि, इतने संवेदनशील मामले की जांच प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट स्तर के अनुभवी अधिकारी की निगरानी में होनी चाहिए थी. एसडीओ स्तर का अधिकारी मुख्य रूप से अधीनस्थ कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर सकता है, लेकिन यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी की जवाबदेही तय करनी हो तो उच्च स्तर की स्वतंत्र जांच जरूरी है.वन विभाग के भीतर भी अब यह चर्चा तेज है कि आखिर जंगल में दो-दो टाइगर का शिकार कैसे हो गया? शुरुआती जांच में शिकारियों के संगठित नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है. 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि एक अन्य आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है. विभागीय टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और आरोपियों की तलाश में कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है. इस घटना ने उत्तराखंड में वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.NTCA की टीम अगले कुछ दिनों में उत्तराखंड पहुंच सकती है. यह टीम घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ-साथ कई पहलुओं पर स्वतंत्र रूप से जांच करेगी. माना जा रहा है कि टीम वन विभाग द्वारा अब तक जुटाए गए साक्ष्यों, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, घटनास्थल की सुरक्षा व्यवस्था और गश्त रिकॉर्ड का भी परीक्षण करेगी.एनटीसीए की जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि देशभर में बाघ संरक्षण की निगरानी करने वाली यह सर्वोच्च संस्था है. यदि जांच में गंभीर लापरवाही सामने आती है तो विभागीय अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है. साथ ही भविष्य में उत्तराखंड की टाइगर सुरक्षा रणनीति में भी बदलाव देखने को मिल सकता है.उत्तराखंड में पिछले कुछ समय से वन्यजीव अपराधों की घटनाएं बढ़ी हैं. हाथियों की संदिग्ध मौत, सांपों के जहर की तस्करी और अब बाघों के शिकार जैसी घटनाओं ने राज्य की वन सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है. केवल गश्त बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि खुफिया नेटवर्क मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र विकसित करने की भी जरूरत है.फिलहाल पूरे मामले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. वन विभाग की जांच, फरार आरोपी की गिरफ्तारी और लापता बाघिन के सुराग आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे कर सकते हैं. सबसे अहम बात यह होगी कि क्या इस बार वास्तव में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या फिर मामला केवल निचले कर्मचारियों तक सीमित रह जाएगा. लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share4SendTweet3
Previous Post

आस्था के साथ बढ़ती चिंता बढ़ती भीड़ के बीच स्वास्थ्य चुनौतियां गंभीर

Next Post

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने हक-हकूकधारियों तीर्थ पुरोहितों, व्यापार सभा, होटल एसोसिएशन तथा स्थानीय हितधारकों के साथ बैठक की

Related Posts

उत्तराखंड

डोईवाला क्षेत्र में सीवर नेटवर्क स्थापित करने की मांग

July 9, 2026
37
उत्तराखंड

सेवा पखवाड़े के तहत थराली विकासखंड के अंतर्गत लोल्टी न्याय पंचायत का विकास भवन ग्वालदम में बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन

July 9, 2026
5
उत्तराखंड

डॉ.हरीश चन्द्र अंडोला सराहनीय कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया

July 9, 2026
37
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय रेल मंत्री से रेल परियोजनाओं एवं कनेक्टिविटी विस्तार पर की चर्चा

July 9, 2026
7
उत्तराखंड

देवाल में आयोजित 3 दिवसीय विशेष स्वास्थ्य शिविर के तीसरे दिन 204 लोगों की जांच कर निःशुल्क दवाओं का वितरण किया

July 9, 2026
6
उत्तराखंड

9 सूत्रीय मांगों को लेकर, तहसील मुख्यालय थराली में आशा कार्यकत्रियों ने लूस निकाला

July 9, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67712 shares
    Share 27085 Tweet 16928
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45785 shares
    Share 18314 Tweet 11446
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38066 shares
    Share 15226 Tweet 9517
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37452 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

डोईवाला क्षेत्र में सीवर नेटवर्क स्थापित करने की मांग

July 9, 2026

सेवा पखवाड़े के तहत थराली विकासखंड के अंतर्गत लोल्टी न्याय पंचायत का विकास भवन ग्वालदम में बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन

July 9, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.