• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

‘पतंजलि’ का फेल होना आयुर्वेद की विफलता कैसे हुई?

25/08/19
in उत्तराखंड, हरिद्वार
Reading Time: 1min read
150
SHARES
187
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

शंकर सिंह भाटिया
कुछ दिनों पहले बहुचर्चित आयुर्वेदिक संस्थान पतंजलि के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण जब अचानक बीमार हुए तो सोशल मीडिया में इसे हार्ड अटैक बताया गया। लेकिन वास्तव में यह फूड प्वाइजनिंग का मामला था, जो कि स्वामी रामदेव ने खुद बताया। इसके बाद मीडिया में टीका टिप्पणियों की बाढ़ सी आ गई। जिसका लब्बोलुआब यह था कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ खड़े पतंजलि के विशाल अस्पताल में फूड प्वाइजनिंग का समुचित इलाज तक नहीं है। अन्यथा अपने संस्थान में इलाज कराने के बजाय आचार्य को एम्स ऋषिकेश में क्यों भर्ती कराया जाता? इसका नतीजा कई लोगों ने यह निकाल लिया कि एलोपैथ के सामने आयुर्वेद फेल है। यह भी कि आयुर्वेद पर टिका पतंजलि का साम्राज्य सिर्फ ढकोसला है।
हम भारतियों की सबसे बड़ी कमी है कि हम बिना अधिक सोचे बिचारे नतीजे पर पहुंच जाते हैं। अपनी बात को सही साबित करने के लिए कुतर्क गढ़ने लगते हैं। हमें यहां पर एलोपैथ और आयुर्वेद की प्रणालियों को समझना होगा। तब किसी नतीजे पर पहुंचें। आयुर्वेद भारतीय वेद पुराणों से निसृत एक जीवन पद्धति है। जिसमें संपूर्ण शरीर विज्ञान का ज्ञान मौजूद है। चरक, पतंजलि, वाण भट्ट समेत तमाम ऋषि मुनियों ने इस पर शोध कर इसे परिष्कृत किया है। आयुर्वेद का लब्बोलुआब यह है कि मनुष्य शरीर को प्रकृति के साथ तादात्म्य बनाकर चलने से स्वस्थ रखा जा सकता है। साथ ही आयुर्वेद यह भी बताता है कि यदि किसी कारणबश शरीर बीमार हो जाता है तो उसे ठीक करने वाली औषधियां हमारे इर्द-गिर्द प्रकृति में मौजूद हैं। मतलब कि आयुर्वेद एक जीवन पद्धति है। इस पद्धति में उल्लिखित औषधियों का मनुष्य शरीर पर कोई साइडइफेक्ट नहीं होता है।
दूसरी तरफ एलोपैथ है। इसे आप पश्चिमी स्वास्थ विज्ञान कह सकते हैं। यह आम धारणा है और इसमें सच्चाई भी है कि एलोपैथिक दवाओं का कोई न कोई साइडइफेक्ट अवश्य होता है। आप सिर दर्द की दवा लेते हैं, पेन किलर कुछ ही मिनट में आपका सिर दर्द ठीक कर देगा, लेकिन इस दवा के साइड इफेक्ट आपके आर्गन तक पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं। एलोपैथ में अत्यधिक शोध की वजह से कुछ क्षेत्रों में बहुत अधिक प्रगति हुई है। जीवन रक्षा प्रणाली को एलोपैथ ने बेहतर बनाया है। हार्ड अटैक, ब्रेन हेमरेज, फूड प्वाइजनिंग, अत्यधिक रक्तस्राव जैसे तुरंत मृत्यु तक पहुंचाने वाली बीमारियों में एलोपैथ का इलाज तुरंत प्रभावी है। इसके अलावा डायग्नोस्टिक जांच में, खून, यूरिन, स्टूल से लेकर एक्सरे, सिटी स्केन, पैट स्केन, एमआरआई समेत तमाम जांचों के जरिये बीमारियों का पता लगाने की प्रणाली विकसित की है। एलोपैथ की एक और उपलब्धि है, जान लेवा बीमारियों का टीकाकरण। यह सब उच्च स्तरीय शोध कार्यों की वजह से हो पाया है। ये शोध कार्य सालों से हो रहे हैं, अब भी निरंतर जारी हैं। इस सब के बावजूद एलोपैथ की दवाएं साइडइफेक्ट से कभी मुक्त नहीं हो सकती हैं।
इसके विपरीत आयुर्वेदिक दवाएं इतनी गुणकारी होने के बावजूद तुरंत प्रभावी नहीं हैं। क्योंकि आयुर्वेद एक जीवन पद्धति है। सिर दर्द होने पर आयुर्वेद चिकित्सक यह पता लगाएगा कि सिर दर्द की वजह क्या है? कब्ज गैस की वजह से सिर दर्द हो रहा है कि किसी अन्य कारण से हो रहा है। सीधे सिर दर्द की गोली देने के बजाय उस मर्ज का इलाज किया जाएगा, जिसमें समय लगता है। आयुर्वेद का अब अत्यधिक प्रचार हो रहा है। इसमें बहुराष्ट्रीय कंपनियों से लड़ने का दावा करने वाली पतंजलि का भी योगदान है। दावा किया जा रहा है कि पतंजलि के हरिद्वार में स्थित बड़े-बड़े चिकित्सालयों में शोध कार्य हो रहे हैं। जो आयुर्वेद में शोध कार्यों की कमी को दूर करेगा। लेकिन यह तय है कि किसी एक संस्थान या एक व्यक्ति के शोध से आयुर्वेद को वह मुकाम नहीं मिल सकता है। इसके लिए विस्तृत और बहुआयामी शोध करने होंगे। आज एलोपैथ इतनी बुराइयों के बावजूद यहां तक पहुंचा है तो पूरे यूरोप, अमेरिका समेत तमाम देशों में किए गए निरंतर शोध इसकी वजह हैं।
सतही शोधों से यह संभव नहीं हो सकता। जैसे आचार्य बालकृष्ण आयुर्वेदिक औषधियों के बारे में अपने वीडियो जारी करते रहते हैं। जो आस्था चैनल में प्रसारित होते हैं। इन वीडियो में अलग-अलग आयुर्वेदिक दवाओं, बनस्पतियों के बारे में जानकारी दी जाती है। अपने ऐसे ही एक वीडियो में आचार्य बालकृष्ण ने एक पौधे भारंगी के बारे में बताया है। जिसे वे ब्राह्मण यष्ठिका भी कहते हैं। आचार्य के अनुसार भारंगी की पत्तियों का काढ़ा किसी भी तरह के फूड प्वाइजनिंग का अचूक इलाज है। लेकिन जब उन्हें पेड़ा खाने से फूड प्वाइजनिंग हुई तो इस काड़े का प्रभाव नहीं दिखाई दिया। उन्हें इलाज के लिए एम्स में जाना पड़ा। इसलिए आयुर्वेद में सतही शोधों के बजाय गंभीर रूप से काम करने की जरूरत है। किसी दवा के बारे में तभी जानकारी प्रचारित की जाए, जब कई लोगों पर इसके प्रभाव को आजमा लिया जाए।
पतंजलि के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण के फूड प्वाइजनिंग का इलाज पतंजलि के अस्पताल में करने के बजाय एम्स में किया जा रहा है, इसलिए आयुर्वेद, एलोपैथ से कमतर है, इस नतीजे पर पहुंचना कतई उचित नहीं है। पतंजलि संस्थान आयुर्वेद का पर्याय नहीं है। यदि पतंजलि कहीं फेल होता है तो आयुर्वेद भी फेल हो जाता है, इस नतीजे पर पहुंचना मूर्खतापूर्ण होगा। बहुत सारी खामियों के बावजूद एलोपैथ ने जो मुकाम हासिल किया है, वह इस क्षेत्र में किए गए शोध का परिणाम है। आयुर्वेद भी इसी तरह के विस्तृत शोध की अपेक्षा करता है। यह किसी एक व्यक्ति तथा एक संस्थान के बस की बात नहीं है। आयुर्वेद को वहां तक पहुंचाने के लिए अकूत धन, संसाधन और समय की जरूरत होगी।

Share60SendTweet38
Previous Post

आपने जो प्यार और सम्मान दिया उसे पाकर मैं, मेरे बच्चे और मेरी कर्मभूमि केलसु अभिभूत हुई- शिक्षक आशीष डंगवाल

Next Post

सांस्कृतिक मेले उत्तराखंड की पहचानः भंडारी

Related Posts

उत्तराखंड

ग्लेशियर ही नहीं उच्च हिमालय में बदलता मौसम चक्र त्रासदी का कारण!

September 9, 2026
4
उत्तराखंड

डॉ. भूपेंद्र सिंह बिष्ट का चयन दून विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग में प्रोफेसर पद पर, हेड आफ डिपार्टमेंट बनाए गए

September 9, 2026
7
उत्तराखंड

हिमालयी क्षेत्र के संरक्षण से ही थमेगा पर्यावरणीय संकट

September 9, 2026
4
उत्तराखंड

इंटरसेप्टर वाहन की टक्कर से स्कूटी सवार दो युवक गंभीर घायल

September 9, 2026
9
उत्तराखंड

थानों पीएचसी की बदहाल स्थिति पर उठे सवाल, निरीक्षण और उच्चीकरण की मांग

September 9, 2026
14
उत्तराखंड

डोईवाला: राष्ट्रीय पोषण माह में महिलाओं को दी योजनाओं की जानकारी

September 9, 2026
5

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67734 shares
    Share 27094 Tweet 16934
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45793 shares
    Share 18317 Tweet 11448
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38077 shares
    Share 15231 Tweet 9519
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37456 shares
    Share 14982 Tweet 9364
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37379 shares
    Share 14952 Tweet 9345

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

ग्लेशियर ही नहीं उच्च हिमालय में बदलता मौसम चक्र त्रासदी का कारण!

September 9, 2026

डॉ. भूपेंद्र सिंह बिष्ट का चयन दून विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग में प्रोफेसर पद पर, हेड आफ डिपार्टमेंट बनाए गए

September 9, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.