हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली।अब जबकि श्री नंदादेवी बड़ी जात एवं श्री नंदादेवी लोकजात यात्रा एक दिन बाद अर्थात गुरुवार को यात्रा मार्ग के अंतिम आबादी वाले गांव वांण से निर्जन पड़ाव गैरोलीपातल पहुंच जाएगी तों हजारों की संख्या में यात्राओं के साथ चल रहे नंदा भक्तों की बड़ी परीक्षा भी शुरू हो जाएगा। बड़ी जात एवं लोकजात यात्रा में उलझी इस बार की यात्रा में राज्य सरकार के द्वारा अब बिना संसाधनों के यात्रा के अंतिम समय में पुलिस, प्रशासन को तों झोंक दिया है किन्तु निर्जन पड़ावों में, बिजली, पानी, पैदल मार्गों, स्वास्थ्य, शौचालयों, ठहरने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं को करने से पूरी तरह से हाथ खिंचे हुए हैं।उसे देख लग रहा हैं कि सरकार को इस देव यात्रा से कोई भी लेना-देना नही रह गया हैं।अब तक ग्राउंड जीरो को देख कुछ यही लग रहा हैं। यात्रा में जानें वाले यात्रियों को अपने स्वयंम के संसाधनों से ही निर्जन पड़ावों की यात्रा करनी होगी, किंतु जिस तरह से दशोली, बण्ड एवं ज्वाल्पा देवी कमेटियों एवं यात्रा में चल रहे यात्रियों के हौसले बुलंद हैं उसे देख लग रहा हैं कि उन्हें भी सरकार से कुछ लेना-देना न रह कर अपनी देवी की आस्था पर ही विश्वास हैं।
दरसअल प्रति वर्ष सदियों से छोटी जात अर्थात लोकजात यात्रा का और 12 वर्षों अथवा 12 वर्षों के बाद श्री नंदादेवी राजजात, बड़ी जात का आयोजन होता आया हैं। श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी की लोकजात यात्रा प्रति वर्ष भादों मास में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के बाद सिद्धपीठ कुरूड़ से शुरू हो कर वेदनी बुग्याल तक जाती हैं और वहां से लौट कर सिद्धपीठ देवराड़ा-थराली के मंदिर में 6 माह के प्रवास पर विराजमान हो जाती हैं।इस यात्रा में पिछले वर्षों तक कम ही यात्री सामिल होते आए हैं, यात्रियों की संख्या कम होने से एक मात्र निर्जन पड़ाव गैरोलीपातल अथवा वेदनी बुग्याल में रात्रि कालीन व्यवस्थाओं को जुटाने में किसी भी तरह की परेशानियां खड़ी नही होती थी।किंतु इस बार श्री नंदादेवी लोकजात एवं श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा के चलते इतिहास में पहली बार यात्रियों का जो हुजूम यात्रा में उमड़ रहा हैं उसे एतिहासिक माना जा रहा हैं, सरकार अब चाहे कितने भी बहाने बना लें किन्तु राज्य सरकार अपनी गलतियों से नही मुकर सकती हैं।2025 के अंतिम महिनों को याद करें तों स्वयंम मुख्यमंत्री ने श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी राजजात को लेकर कई बार हाई लेवल मीटिगें कर 2026 की राजजात की तैयारियों में जुटने के प्रशासन को निर्देश दिए थें। यहां नही प्रशासन के अधिकारी भी 2025 तक राजजात को लेकर मीटिंग -मीटिंग का खेल खेलते रहे। इससे बड़ी बात राजराजेश्वरी राजजात समिति नौटी ने तों हिंदु पंचांग में तक नंदादेवी राजजात 2026 को लेकर लेख तक छपवा दिए थें। अचानक 2026 आतें-आतें राजजात समिति नौटी एवं राज्य सरकार ने बिना ठोस कारणों के एक तरफा फैसला लेते हुए 2025 में प्रस्तावित श्री नंदादेवी राजजात यात्रा को स्थगित कर 2027 में आयोजित करने का निर्णय लें कर सरकार यात्रा को लेकर गहरी नींद में सो गईं। किंतु सर्वमान्य निर्माण नही होने से नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से 2026 में राजजात के बजाय श्री नंदादेवी बड़ी जात के सर्वसम्मति से निर्णय लेकर अपनी तैयारियां भी शुरू कर दी, पिछले तीन महिनों से अधिक समय से बड़ी जात आयोजन कमेटी यात्रा का लगातार प्रचार, प्रसार करती रही परिणामस्वरूप नंदा की बड़ी जात एवं बधाण की लोकजात यात्रा में जिस कदर देवी भक्त सामिल हो रहें हैं उससे पूरे चमोली जनपद वासी स्वयंम ही भौचक्के हों कर रह गए हैं। उदाहरण के तौर पर जिस तादाद में यात्रीगण थराली -देवाल, ग्वालदम-नंदकेशरी -देवाल होते हुए वांण एवं आगे के पड़ावों में बुधवार की सुबह से देर सांय तक जा चुके हैं और गुरुवार की सुबह से ही जानें वाले यात्रियों का सिलसिला जारी है वह अपने आप में लोकजात के लिए इतिहास हैं,इसके अलावा नंदानगर (घाट) से आ रही नंदादेवी दशोली परगना,नंदादेवी बण्ड़ परगना, ज्वालपा देवी की उत्सव डोलियों के अलावा भारी संख्या में नंदा छतोलियां यात्रा के तहत कैलाश के लिए रवाना हुई हैं और इनके साथ जिस बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा राज्य के अलग-अलग हिस्सों व देश के अन्य भागों से चल रहें भक्तों गणों को देख कर अनुमान लगाया जा रहा है कि 17 सितंबर जिस दिन यात्रा गैरोलीपातल अथवा वेदनी बुग्याल पहुंचेगी उस दिन अर्थात गुरुवार को हजारों की संख्या में नंदा भक्त गैरोलीपातल व वेदनी बुग्याल में इकट्ठा हो सकतें हैं। श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी समिति बधाण थराली के जारी यात्रा कार्यक्रम के अनुसार बधाण की नंदादेवी की डोली सप्तमी को वेदनी कुंड में तर्पण एवं नंदा देवी मंदिर में पूजा अर्चना के बाद सिद्धपीठ देवराड़ा के लिए लौट पड़ेगी, जबकि दशोली,बण्ड़ व ज्वालपा देवी की डोलियां कैलाश गमन के तहत होम कुंड की ओर प्रस्थान कर जाएगी।सवाल उठ रहा है कि जब हजारों की संख्या में गैरोलीपातल व वेदनी बुग्याल जों कि निर्जन क्षेत्र हैं और इससे आगे पातरनचौनियां,बगवाबासा,शीलासमुद्र,तातणा,नारिंग खोपड़ी जोकि पूरी तरह से निर्जन पड़ाव हैं। बड़ी जात यात्रा को गैरोलीपातल अथवा वेदनी,आली बुग्याल, पातरनचौनियां अथवा बगवाबासा, शीलासमुद्र, जामुन डाली अथवा तातणा , नारिंग खोपड़ी में रात्रि विश्राम करना पड़ेगा। बड़ी जात के यात्रियों को कम-से-कम 4 रातें निर्जन पड़ावों पर गुजारनी होगी, जहां पर राज्य सरकार के द्वारा अबतक किसी भी तरह की कोई व्यवस्था नही की हैं। हालांकि सरकार ने बधाण की नंदादेवी का डोला थराली पहुंचे ही पुलिस, प्रशासन की सक्रियता बढ़ा दी हैं, किंतु पुलिस के जवानों से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक स्वयंम अपनी व्यवस्थाओं के लिए मौहताज हों कर आगे बढ़ रहें हैं तो उनसे यात्रियों को किसी भी तरीके की व्यवस्था जुटाने की आशा करना बेमानी ही होगी। यें हालत एवं सूरत उस समय की बायं कर रहे हैं,जबकि अभी यात्रा मोटर सड़क के इर्द-गिर्द के पड़ावों से हों कर गुजर रही हैं, निर्जन पड़ावों में क्या होगा कोई भी कुछ कहने की स्थिति में नही हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों के लिए श्री नंदादेवी की यात्रा काफी अधिक मायने रखती हैं। किंतु इस की अनदेखी करना किस पर भारी पड़ेगी यह तों समय ही बताएगा। परंतु सरकार के द्वारा यात्रियों को उनके हाल पर छोड़ देना किसी के भी गले नही उतर रहा है। सरकार चहाती तों कुरूड़ से 5 सितंबर से शुरू हुई बड़ी जात एवं लोकजात यात्रा में कुरूड़ नंदा भक्तों के उमड़े सैलाब को देखते हुए 4 निर्जन पड़ावों पर मूलभूत सुविधाओं को कायम करवाने के साथ ही पैदल रास्तों को युद्ध स्तर पर ठीक करवा कर यात्रियों की वाहवाही लूट सकती थी, किंतु सरकार ने ऐसा कुछ नही किया और जों भी यात्रीगण यात्रा में भाग लें रहें हैं वें अपने संसाधनों के बल पर आगे बढ़ेंगे और जों काफी संख्या में भक्त 2000 व 2014 की राजजात यात्रा में प्रतिभाग कर चुके हैं और उस दौर में सरकारी व्यवस्थाओं की उन्हें जानकारी थी वें एक मैंट्रस, स्लिपिंग बैंग, कपड़े एवं ड्राई-फ्रूट्स को अपने बैंगों में रख कर निकलें हैं उन्हें निर्जन पड़ावों से निश्चित ही वापस लौटना पड़ेगा, और तय हैं कि वें इसके लिए राज्य सरकार को जरूर कोसेंगे।
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