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बांस की बोतल प्लास्टिक निस्तारण और पर्यावरण संरक्षण के लिए साबित होगा वरदान

16/10/19
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला दून विश्वविद्यालय, देहरादून, उत्तराखंड
2 अक्टूबर से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में हैण् इसीलिए सरकार एक नया विकल्प लाई हैण् इसके विकल्प के तौर पर एमएसएमई मंत्रालय के अधीन कार्यरत खादी ग्रामोद्योग आयोग ने बांस की बोतल का निर्माण किया हैए जो प्लास्टिक बोतल की जगह इस्तेमाल होगीण् केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने बांस की इस बोतल को एक कार्यक्रम के दौरान लॉन्च कर दिया हैण्प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्लास्टिक मुक्त भारत के सपने को पूरा करने के लिए हमें निरन्तर प्रयास करने के लिए दुनियाभर में की जलवायु परिवर्तन को लेकर बहस छिड़ी हुई है। सरकार जनता से प्लास्टिक का बहिष्कार करने की अपील कर रही है। प्लास्टिक पर्यावरण के साथ साथ सेहत के लिए भी खतरनाक है।
प्लास्टिक की बोतल की बजाय अगर आप बांस की बोतल में पानी पीएंगे तो आपको सेहत संबंधी फायदे होंगे। बांस की बोतल प्लास्टिक का बढ़िया विकल्प है और इससे आपका दिल और आपकी त्वचा भी जवां बनी रहेगी। इसका उत्पादन नियमित रूप से किया जा सकता है। इसके साथ ही प्लास्टिक की तुलना में यह एंटी बैक्टीरियलए एंटी फंगल के साथ.साथ बायोडीग्रेबल भी है। इसे आसानी से डीकंपोज कर सकते है क्योंकि यह पूरी तरह से कुदरती रुप से बना होता है। जानें बांस की बोतल में पानी पीने के फायदे। इस बनाने में किसी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यह पूर्ण रूप से फर्टीलाइजर से उगाया जाता है। बांस काफी मजबूत होता है। यह एंटी फंगल के साथ.साथ एंटीबैक्टीरियल होता है। बांस की बोतल में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते है जैसे प्रोटीनए पोटेशियमए कॉपरएआयरनए विटामिन बी6 और बी12ए मैंगनीजए जस्ताए ट्रिप्टोफैन और आइसोल्युसिन है। ये सभी आपके शरीर के लिए सबसे बेस्ट हैं। बांस की बोतल में पानी पीने के फायदे दिल को रखें हेल्दी बांस की बोतल में कई ऐसे गुण पाए जाते है। जिसमें रोजाना पानी पीने से हार्ट अटैक के अलावा कार्डियोवेस्कुलर डिजीज से भी बचाव हो जाता है। इम्यूनिटी को रखें मजबूत अधिकतर खराब खान पान के कारण कई लोगों की इम्यूनिटी बहुत ही कमजोर होती है। इस वजह से मौसमी बीमारियां ऐसे लोगों को जल्द अपना शिकार बना लेती हैं। ऐसे में अगर आप बांस की बोतल का पानी पिएंगे तो आपका इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होगा क्योंकि इसमें लेक्टोन्स ग्लाइकोसाइट्सए पॉलीफिनोल्स जैसे फ्लेवेनॉइड्स पाए जाते है जो आपकी इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है। बांस में सिलिका नामक तत्व पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
कोलेस्ट्रॉल को करें कंट्रोल आज के समय में खराब लाइफ स्टाइल के साथ कोलेस्ट्राल का ऊपर.नीचे होना आम बात हो गई है। ऐसे में बांस की बोतल का पानी फायदेमंद साबित हो सकता है। इसका पानी कोलेस्ट्राल लेवल कंट्रोल करता है। बांस की बोतलें बना सकते हैंण् यह कंस्ट्रक्शन के काम आ रहा हैण् आप इससे घर बना सकते हैंण् फ्लोरिंग कर सकते हैंण् फर्नीचर बना सकते हैंण् हैंडीक्रॉफ्ट और ज्वैलरी बनाकर कमाई कर सकते हैंण् बैंबू से अब साइकिलें भी बनने लगी हैंण् कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का दावा है कि सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ;सीबीआरआईद्धए रुड़की ने इसे कंस्ट्रक्शन के काम में लाने की मंजूरी दी हैण् अब शेड डालने के लिए सीमेंट की जगह बांस की सीट भी तैयार की जा रही हैण् हरिद्वार में रेलवे ने इसी से स्टेशन का शेड बनाया हैण् प्लास्टिक पर बैन के बाद अब बांस प्लास्टिक के सामान का बड़ा विकल्प बनने जा रहा हैण् घर बनाने से लेकर फर्नीचर तक सब बांस के तैयार हो रहे हैंण्
मोदी सरकार ने इसकी खेती और बिजनेस के लिए एक बड़ा प्लान बनाया हैए जिसमें वो किसानों को हर पौधे पर 120 रुपये की मदद भी दे रही हैण् इस स्कीम के बारे में जानिए और फायदा उठाईएण् पीएम नरेंद्र मोदी सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करने की कई बार अपील कर चुके हैंण् खादी ग्रामोद्योग आयोग ने बांस की बोतल को लॉन्च कर दिया हैण् बांस की खेती आमतौर पर तीन से चार साल में तैयार होती हैण् चौथे साल में कटाई शुरू कर सकते हैंण् जरूरत और प्रजाति के हिसाब से एक हेक्टेयर में 1500 से 2500 पौधे लगा सकते हैंण् अगर आप 3 गुणा 2ण्5 मीटर पर पौधा लगाते हैं तो एक हेक्टेयर में करीब 1500 प्लांट लगेंगेण् साथ में आप दो पौधों के बीच में बची जगह में दूसरी फसल उगा सकते हैंण् 4 साल बाद 3 से 3ण्5 लाख रुपये की कमाई होने लगेगीण् हर साल रिप्लांटेशन करने की जरूरत नहींण् क्योंकि बांस की पौध करीब 40 साल तक चलती हैण् दूसरी फसलों के साथ खेत की मेड़ पर 4 गुणा 4 मीटर पर यदि आप बांस लगाते हैं तो एक हेक्टेयर में चौथे साल से करीब 30 हजार रुपये की कमाई होने लगेगीण् इसकी खेती किसान का रिस्क फैक्टर कम करती हैण् क्योंकि किसान बांस के बीच दूसरी खेती भी कर सकता हैण् देश में आर्थिक सुस्ती और रोजगार की कमी पूर्वोत्तर राज्यों मे राजमार्ग के साथ बांस के पेड़ लगाकर रोजगार के दो लाख अवसरों का सृजन किया जा सकता हैण् भारत चीन से 4ए000 करोड़ रुपये की धूपबती की लकड़ी का आयात कर रहा हैए मोदी सरकार ने हाल में इस पर आयात शुल्क बढ़ाकर 30ः किया हैण् प्लास्टिक मुक्त भारत के सपने को पूरा करने के में से कूड़े के निस्तारण से ज्यादा प्लास्टिक निस्तारण से पर्यावरण और के रोजगार के अवसरों का सृजन बढ़ कर बनी रहेगी। पर्यावरण को बचाने और सेहत के प्रति सजगता को लेकर प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करने के लिए लगातार जागरुक किया जा रहा है। वहीं मोदी सरकार भी मेक इन इंडिया यानि अपनी स्वदेशी चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है देवभूमि उत्तराखंड में बांस की खेती ग्रामीणों के जीवन निर्वाह में सुधार के लिए एक प्रभावशाली तरीके के तौर पर बांस के बारे में जागरूकता प्रोत्साहित करने बढ़ावा देने की योजना तैयार की के बाद बांस के उत्पादन और खपत दोनों में भारी बढ़ोतरी होगी लोग भी ये जानकारी बाद से भी राज्य में नये रोजगारों का सृजन व पर्यावरण का ईको.पर्यटन जिसे पारिस्थिकीय पर्यटन भी कहा जाता है अनुदान सहायता सरकार राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत बांस की खेती से लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मुहैया होगा। इससे रोजगार के लिए गांवों से शहरों की ओर हो रहे पलायन पर भी रोक लगेगी। बांस की खेती ग्रामीण क्षेत्रों के कुशल एवं अकुशल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करेगी।
किसान गांव में बंजर पड़ी भूमि पर हरा सोना उगाकर अपना भविष्य संवार सकेंगे।
उत्तराखंड बांस एवं रेशा परिषद देहरादून की ओर से नर्सरी और अन्य संबंधित सामग्री के लिए बैंक से लोन दिलाया जाएगा। जिस पर किसानों को 50 प्रतिशत ;पचास हजार रुपयेद्ध की सब्सिडी मिलेगी। यह सब्सिडी तीन वर्ष में तीन किश्तों में दी जाएगी। वहींए छोटे काश्तकारों को बांस की खेती करने पर एक पौधे पर 120 रुपये की सब्सिडी मिलेगी। तीन साल बाद बांस तैयार होने पर परिषद देहरादून बांस बेचने का बाजार निर्धारित करेगी। बांस की खेती पहाड़ से हो रहे पलायन को रोकनेए किसानों की आय बढ़ाने और बेरोजगारों के लिए रोजगार देने के लिए लाभकारी साबित होगी। उत्तराखंड बांस एवं रेशा परिषद देहरादून की ओर से बांस की खेती करने वालों की हरसंभव मदद की उम्मीद जाएगीण्

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