डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड को देवों की भूमि भी कहा जाता है. यहां आने वाला हर रास्ता किसी न किसी धार्मिक स्थल और उसकी महत्वत्ता से जुड़ा है. चारधाम यात्रा हो या कांवड़ यात्रा, हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं. लेकिन पिछले कुछ सालों में धार्मिक यात्राओं के दौरान घटने वाली घटनाओं ने इस यात्रा की पवित्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जैसे मामूली विवाद के बाद मारपीट और तोड़फोड़ की घटना. इन घटनाओं ने सोशल मीडिया पर एक अलग बहस छेड़ दी है. कांवड़ यात्रा के दौरान हर साल बड़ी संख्या में शिवभक्त हरिद्वार और उत्तराखंड पहुंचते हैं. इनमें अधिकांश श्रद्धालु शांतिपूर्वक अपनी यात्रा पूरी करते हैं और आस्था के साथ अपने गंतव्य की ओर लौटते हैं. लेकिन कुछ हुड़दंगी और अराजक तत्वों के कारण पूरी यात्रा की छवि प्रभावित होती है. उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों से भी कांवड़ यात्रा के दौरान विवाद, मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आती हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर धार्मिक यात्रा पर निकला व्यक्ति उस आस्था, संयम और अनुशासन को क्यों भूल जाता है, जिसके लिए वह यात्रा कर रहा है? क्या भीड़ का हिस्सा बनने के बाद व्यक्तिगत जिम्मेदारी का भाव कमजोर पड़ जाता है या फिर सोशल मीडिया पर खुद को दिखाने और किसी घटना को वायरल करने की होड़ में ऐसे विवादों को बढ़ावा दिया जा रहा है. ऐसी तस्वीरें सिर्फ कांवड़ यात्रा तक सीमित नहीं है. उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के दौरान भी अलग-अलग मौकों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच विवाद के मामले सामने आते रहे हैं. ऋषिकेश में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच मारपीट और विवाद, केदारनाथ-बदरीनाथ जैसे धार्मिक स्थलों पर शराब, हुक्का या अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री और सेवन आस्था को ठेंस पहुंचाते हैं. ऐसे में सवाल उठते हैं कि जिन स्थानों पर लोग आस्था, आध्यात्मिक शांति और भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, वहां अगर हुड़दंग और विवाद की तस्वीरें सामने आएंगी तो देश-दुनिया तक उस धार्मिक स्थल का संदेश किस रूप में जाएगा. ऐसी तस्वीरें सिर्फ कांवड़ यात्रा तक सीमित नहीं है. उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के दौरान भी अलग-अलग मौकों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच विवाद के मामले सामने आते रहे हैं. ऋषिकेश में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच मारपीट और विवाद, केदारनाथ-बदरीनाथ जैसे धार्मिक स्थलों पर शराब, हुक्का या अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री और सेवन आस्था को ठेंस पहुंचाते हैं. ऐसे में सवाल उठते हैं कि जिन स्थानों पर लोग आस्था, आध्यात्मिक शांति और भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, वहां अगर हुड़दंग और विवाद की तस्वीरें सामने आएंगी तो देश-दुनिया तक उस धार्मिक स्थल का संदेश किस रूप में जाएगा. हरिद्वार कांवड़ यात्रा में ड्यूटी कर रहे एसपी अभय सिंह के मुताबिक, इन घटनाओं को समझने के लिए सोशल मीडिया की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कई बार छोटी घटना सोशल मीडिया के जरिए तेजी से वायरल हो जाती है. वीडियो को देखने वालों की संख्या बहुत अधिक होती है और उसके बाद उस घटना को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगती हैं. सोशल मीडिया किसी घटना को बड़ा जरूर बना सकता है. लेकिन विवाद के मूल वजह को भी समझना जरूरी है. हरिद्वार कांवड़ यात्रा में ड्यूटी कर रहे एसपी अभय सिंह के मुताबिक, इन घटनाओं को समझने के लिए सोशल मीडिया की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कई बार छोटी घटना सोशल मीडिया के जरिए तेजी से वायरल हो जाती है. वीडियो को देखने वालों की संख्या बहुत अधिक होती है और उसके बाद उस घटना को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगती हैं. सोशल मीडिया किसी घटना को बड़ा जरूर बना सकता है. लेकिन विवाद के मूल वजह को भी समझना जरूरी है. हरिद्वार कांवड़ यात्रा में ड्यूटी कर रहे एसपी के मुताबिक, इन घटनाओं को समझने के लिए सोशल मीडिया की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कई बार छोटी घटना सोशल मीडिया के जरिए तेजी से वायरल हो जाती है. वीडियो को देखने वालों की संख्या बहुत अधिक होती है और उसके बाद उस घटना को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगती हैं. सोशल मीडिया किसी घटना को बड़ा जरूर बना सकता है. लेकिन विवाद के मूल वजह को भी समझना जरूरी है. धार्मिक यात्राओं में व्यवस्था बनाए रखना केवल पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की भी बड़ी जिम्मेदारी है. अगर कोई व्यक्ति किसी धार्मिक स्थल पर आस्था के साथ पहुंच रहा है तो उसे वहां की स्थानीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मर्यादा का भी सम्मान करना होगा. पुलिस भी श्रद्धालुओं से अपील करती है कि चारधाम यात्रा हो या कोई अन्य धार्मिक यात्रा, लोग आस्था और संयम के साथ आएं और स्थानीय मान-मर्यादाओं का ध्यान रखें. क्योंकि किसी विवाद का नुकसान केवल उस घटना में शामिल लोगों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर स्थानीय निवासी, व्यापारी और दूसरे श्रद्धालुओं तक भी पहुंचता है. कांवड़ यात्रा के दौरान सीएम धामी भी कई बार हरिद्वार पहुंचे हैं. उन्होंने भी उत्तराखंड आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि आस्था के साथ आएं. स्थानीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करें. कानून-व्यवस्था का पालन करें. धार्मिक स्थल किसी एक व्यक्ति के निजी स्थल नहीं होते. यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु आस्था लेकर पहुंचते हैं. ऐसे में किसी भी तरह का हुड़दंग स्थानीय लोगों के लिए परेशानी पैदा करने के सात ही दूसरे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और यात्रा के अनुभव को भी प्रभावित करता है. उत्तराखंड का पर्यटन सीजन इस वक्त पुलिस-प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. एक तरफ चारधाम समेत अन्य धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है. वहीं स्कूलों की छुट्टियों के बाद बड़ी संख्या में सैलानी भी उत्तराखंड के पर्यटक स्थलों पर घूमने आ रहे है, लेकिन पुलिस-प्रशासन की समस्या ये सैलानी या फिर श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं, बल्कि वो लोग है, जो सैलानी और श्रद्धालुओं के नाम पर प्रदेश में हुड़दंग मचा रहे हैं.कुछ सैलानियों और श्रद्धालुओं की इन हरकतों के कारण न सिर्फ धार्मिक स्थलों की मर्यादा तार-तार हो रही, बल्कि सुरक्षा-व्यवस्थाएं भी बिगड़ रही है. बीते में इस तरह की कई घटनाएं सामने आ चुकी है. कहीं बार इस तरह की घटनाओं से प्रदेश का माहौल भी खराब हो रहा है. साथ ही सवाल भी खड़ा होता है कि क्या देवभूमि घूमने आने वाले कुछ लोग यहां की संस्कृति परंपराओं और मर्यादाओं का सम्मान करना भूलते जा रहे हैं. उत्तराखंड आने वाले करोड़ों श्रद्धालु और पर्यटक राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं, लेकिन देवभूमि की पहचान केवल पर्यटन नहीं बल्कि आस्था संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से भी जुड़ी हुई है. ऐसे में प्रशासन की चुनौती केवल भीड़ प्रबंधन तक सीमित नहीं बल्कि धार्मिक और सामाजिक मर्यादाओं को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है. पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही हैं. प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार कावड़ मेला प्रारंभ होने से अभी तक 03 करोड़ 80 लाख 18 हजार शिव भक्त जल लेकर अपने-अपने गंतव्य को रवाना हो चुके हैं. पिछले साल के कांवड़ मेले में करीब चार करोड़ कांवड़िए हरिद्वार आए थे, इस बार अनुमान है कि यह आंकड़ा पांच करोड़ तक पहुंच सकता है. उसी के अनुसार पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. आज भी हरिद्वार में शिवभक्त कांवड़ियों की भारी भीड़ उमड़ रही है.सोमवार सुबह आठ बजे से बारिश होने का सिलसिला शुरू हो गया था और दो घंटे से झमाझम बारिश होने का सिलसिला जारी है. बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगाजल लेकर बारिश में ही अपने गंतव्यों को आगे बढ़ रहे हैं. चौक चौराहों पर पुलिसकर्मी लगातार ड्यूटी दे रहे हैं. हरिद्वार के एसएसपी ने भी कमान संभाले हुए हैं. बारिश के बीच निरीक्षण कर मौजूदा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं. फिलहाल हरिद्वार से डाक कांवड़ के रवाना होने का सिलसिला भी जारी है और दोपहिया वाहनों से आने वाले कांवड़िए अभी भी हरिद्वार आ रहे हैं और हरकी पैड़ी से गंगाजल लेकर रवाना हो रहे हैं.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











