• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

हिंदू धर्म में सुहागिन का प्रतीक है वट सावित्री व्रत

15/05/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
17
SHARES
21
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व पति की लंबी आयु, बेहतर स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति का प्रतीक है। इस बार यह पावन व्रत शनिववार, 16 मई को रखा जाएगा। वट सावित्री का पावन त्योहार हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. साल 2026 में यह पर्व 16 मई, शनिवार को रखा जाएगा. मुख्य रूप से हिंदू धर्म की सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने से पति की आयु लंबी होती है और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन सती सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे.सावित्री का अर्थ वेद माता गायत्री और सरस्वती भी मानाजाताहै.सावित्री के जन्म के बारे में कहा जाता है कि भद्रदेश के राजा अश्वपति के कोई संतान न थी. संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने अठारह वर्षों तक मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिदिन एक लाख आहुतियाँ दीं. इससे प्रसन्न होकर सावित्री देवी ने प्रकट होकर उन्हें एक तेजस्वी कन्या के पैदा होने का वर दिया. सावित्री की कृपा से जन्म लेने वाली कन्या नाम भी सावित्री रखा गया. इस रूपवान कन्या के बड़े हो जाने पर भी कोई योग्य वर न मिलने की वजह से सावित्री के पिता दुःखी थे. उन्होंने कन्या को स्वयं वर तलाशने भेजा. वर की तलाश में सावित्री तपोवन में भटकने लगी. वहां साल्व देश के सत्ताचुत राजा द्युमत्सेन रहते थे क्योंकि उनका राज्य किसी ने छीन लिया था. उनके पुत्र सत्यवान को देखकर सावित्री ने पति के रूप में उनका वरण करना चाहा. सावित्री के पिता को भी सत्यवादी, सर्वगुण संपन्न सत्यवान अपनी पुत्री के वर के रूप में पसंद था. वेदों के ज्ञाता सत्यवान अल्पायु थे इसी वजह से नारद मुनि ने सावित्री को सत्यवान से विवाह न करने की सलाह भी दी थी इसके बावजूद सावित्री ने सत्यवान से ही विवाह रचाया. एक वर्ष बीत जाने के बाद पिता की आज्ञानुसार सत्यवान लकडियां और फल लेने वन में गए. उनके साथ सावित्री भी थीं. यहाँ नियतिनुसार सत्यवान की वृक्ष से गिरकर मौत हो गयी. यमराज ने उनके सूक्ष्म शरीर को लेकर यमपुरी को प्रस्थान किया तो सावित्री भी साथ चल पड़ी. यमराज ने सावित्री को समझाया कि मृत्युलोक के शरीर के साथ कोई यमलोक नहीं आ सकता अतः अपने पति के साथ आने के लिए तुम्हें अपना शरीर त्यागना होगा. सावित्री की दृढ निष्ठा और पतिव्रतधर्म से प्रसन्न होकर यम ने एक-एक करके वरदान के रूप में सावित्री के अन्धे सास-ससुर को आँखें दीं, खोया हुआ राज्य दिया, उसके पिता को सौ पुत्र दिये और सावित्री को लौट जाने को कहा. परन्तु सावित्री अपने प्राणप्रिय को छोड़कर नहीं लौटी. विवश होकर यमराज ने कहा कि सत्यवान को छोडकर चाहे जो माँग लो, सावित्री ने यमराज से सत्यवान से सौ पुत्र प्रदान होने का वरदान मांग लिया. यम ने बिना सोचे प्रसन्न मन से तथास्तु भी कह दिया. यमराज के आगे बढ़ने पर सावित्री ने कहा- मेरे पति को आप साथ अपने लेकर जा रहे हैं और मुझे सौ पुत्रों का वर दिये जा रहे हैं. यह कैसे सम्भव है? मैं पति के बिना सुख, स्वर्ग और लक्ष्मी, किसी की भी कामना नहीं करती. बिना पति के मैं जीना भी नहीं चाहती।ज्येष्ठ मास के कृष्णपक्ष के आमावास्या के दिन धारण किये जाने वाला वट सावित्री व्रत अखंड सुहाग का प्रतीक है। महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य के लिए इस व्रत रखती हैं।पुराणों के अनुसार वट देववृक्ष माना जाता है। वट वृक्ष के मूल में भगवान ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्रभाग में देवाधिदेव शिव विद्यमान हैं। इसके अलावा वट वृक्ष में देवी शक्तियां भी विद्यमान है। इसी वट वृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने पतिव्रत से मृत पति को जीवित किया था, तब से यह व्रत वट सावित्री के नाम से किया जाता है। व्रत करने वाली महिलाएं इस दिन वट वृक्ष की पूजा करती हैं। इस दिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य एवं कल्याण के लिए व्रत रखती हैं। पंडित केशव दण्त बेलवाल कहते हैं कि अखंड सुहाग के लिए वट सावित्री व्रत किया जाता है। एक चौकोर लकड़ी पर लाल वस्तु बिछाकर इसकी पूजा की जाती है। वट वृक्ष में कुमकुम, रोली, अक्षत, पुष्प, फल, दीप व सौभाग्य आभूषण वस्त्र अर्पण कर वृक्ष को कच्चे सूत्र से लपेटते हुए कम से कम सात बार अथवा एक सौ आठ बार परिक्रमा कर सावित्री व्रत की कथा पढ़े जाने का विधान है। इसके अलावा ऊं सती सावित्राय नम: ऊं धर्मराजाय नम: मंत्र का जाप करना है। शहरी क्षेत्रों मे सबसे अधिक समस्या वट वृक्ष की रहती है। ऐसे में लोग आसपास के क्षेत्रों से वट की टहनी लाकर घर में ही पूजा कर लेते है। दून में वट वृक्ष गिने-चुने हैं। ऐसे में अधिकाश परिवार वट की टहनी घर लाकर पूजा कर लेते हैं। टहनी में पत्तों की विषम संख्या शुभ मानी जाती है। पुष्पा ने बताया कि वट की टहनियों को पेड़ स्वरूप मानकर उसकी परिक्रमा कर पूजा जाता है। इस अवसर पर ज्योतिषाचार्य ऋतुराज ने लोगों से अपील की है कि अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए वट की पूजा करते समय शारीरिक दूरी के नियम का पालन अवश्य बनाकर करें। घर में वट की टहनी की भी पूजा की ऐसे करें . वैश्वीकरण और बाजारीकरण की आंधी में लोकोत्सवों, स्थानीय त्यौहारों का वजूद ख़त्म होता जा रहा है, या फिर उनका मूल स्वरुप लुप्त होता जा रहा है. उत्तराखण्ड के भी कई मेले, त्यौहार अपना मूल स्वरुप खोते जा रहे हैं या फिर विलुप्त होने के कगार पर हैं. करवा चौथ एक ऐसा त्यौहार है जिसे उत्तराखण्ड में कुछ साल पहले तक नहीं मनाया जाता था. सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इसका कोई वजूद नहीं है. तिलिस्मी टेलीविजन धारावाहिकों और हिंदी सिनेमा में इस त्यौहार को परोसे जाने ने 90 के दशक में इसे देश विभिन्न शहरों, कस्बों के साथ-साथ उत्तराखण्ड की महिलाओं के बीच भी लोकप्रिय बना दिया. अब यह त्यौहार उत्तराखण्ड के कई शहरों-कस्बों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है. करवा चौथ से ही मिलता-जुलता त्यौहार हैं वट सावित्री. इस त्यौहार को उत्तराखण्ड समेत कुछ राज्यों में पारंपरिक रूप से मनाया जाता रहा है. वट की परिक्रमा करते समय एक सौ आठ बार या यथाशक्ति कलावा लपेटा जाता है। ‘नमो वैवस्वताय’ इस मंत्र से वटवृक्ष की प्रदक्षिणा करनी चाहिए। ‘अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते। पुत्रान्‌ पौतांश्च सौख्यं च गृहाणार्ध्यं नमोऽस्तु ते।’ इस मंत्र से सावित्री को अर्घ्य देना चाहिए।इस दिन चने पर रुपया रखकर बायने के रूप में अपनी सास को देकर आशीर्वाद लिया जाता है। सौभाग्य पिटारी और पूजा सामग्री किसी योग्य साधक को दी जाती है। सिंदूर, दर्पण, मौली, काजल, मेहंदी, चूड़ी, माथे की बिंदी, हिंगुल, साड़ी, स्वर्णाभूषण इत्यादि वस्तुएं एक बांस की टोकरी में रखकर दी जाती हैं। यही सौभाग्य पिटारी के नाम से जानी जाती है।कुछ महिलाएं केवल अमावस्या को एक दिन का ही व्रत रखती हैं। इस व्रत में सावित्री-सत्यवान की पुण्य कथा का श्रवण किया जाता हैं। इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियों का भी पूजन होता है यह कहना गलत न होगा कि अब यह त्यौहार विलुप्त होने की कगार पर पर है. लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share7SendTweet4
Previous Post

भैरों सिंह शेखावत राजनीति के अजातशत्रु थे

Next Post

साइबर क्राइम: एक लिंक पर क्लिक…और खाते से उड़ गए 03 लाख 15 हजार रूपये

Related Posts

उत्तराखंड

सेवा, सुशासन एवं समर्पण की भावना को समर्पित ‘सेवा पखवाड़ा’ का शुभारम्भ

July 4, 2026
8
उत्तराखंड

विश्व बंधुत्व के विचार और संदेश की मिसाल थे स्वामी विवेकानंद

July 4, 2026
4
उत्तराखंड

दिल्ली मेट्रो का यह फैसला बढ़ जाएगी यात्रियों की परेशानी

July 4, 2026
6
उत्तराखंड

डोईवाला: समिति के सदस्यों ने कैंसर पीड़ित मासूम के लिए किया रक्तदान

July 4, 2026
10
उत्तराखंड

डोईवाला: पीटीए में अंकित रस्तोगी व एसएमसी में सचिन बने अध्यक्ष

July 4, 2026
18
उत्तराखंड

एक वर्ष बाद भी जाखन पुल का निर्माण शुरू न होना सरकारी उदासीनता का प्रमाण : उनियाल

July 4, 2026
6

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67710 shares
    Share 27084 Tweet 16928
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45785 shares
    Share 18314 Tweet 11446
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38065 shares
    Share 15226 Tweet 9516
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37452 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

सेवा, सुशासन एवं समर्पण की भावना को समर्पित ‘सेवा पखवाड़ा’ का शुभारम्भ

July 4, 2026

विश्व बंधुत्व के विचार और संदेश की मिसाल थे स्वामी विवेकानंद

July 4, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.