• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

अल्मोड़ा के छत्रपति जोशी ने स्थापित की थी बीएसएफ की संचार प्रणाली

11/10/21
in उत्तराखंड
Reading Time: 1min read
239
SHARES
299
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला:

1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत और पृथक बांग्लादेश राष्ट्र निर्माण की चर्चा उत्तराखंड के छत्रपति जोशी के बिना अधूरी है। जीत के नायकों में एक बेतारों का यह महारथी भी शामिल था। उनका तंत्र इतना सटीक था कि संभावित आक्रमण की सूचना चार मिनट पहले ही मिल जाने से भारतीय सेनानायकों ने शत्रु के लड़ाकू विमानों व टैंकों को भारी क्षति पहुंचाई थी। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का यह विशाल संचार तंत्र छत्रपति जोशी ने ही स्थापित किया था। इस युद्ध में बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी की सहायता के लिए भी जोशी ने तुरत-फुरत वायरलेस नेटवर्क स्थापित किया था।

अल्मोड़ा के प्रसिद्ध फौजदारी अधिवक्ता हरिश्चंद्र जोशी के पुत्र छत्रपति का जन्म 23 जुलाई 1922 को सेलाखोला मोहल्ले में हुआ था। राजकीय इंटर कालेज अल्मोड़ा से इंटर मीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने बाद उन्होंने 1939 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में विज्ञान स्नातक के पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। जबकि 1942 में इलाहाबाद विवि से स्नातकोत्तर करने के लिए भौतिकी (बेतार) में प्रवेश लिया। तब भौतिकी के विभागाध्यक्ष प्रो. केएस कृष्णन से उन्होंने धातु-सिद्धांत के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल की। बचपन में ही टार्च के बुझे हुए सेल से रेडियो बजा चुके छत्रपति ने अपनी वैज्ञानिक सोच से प्रो. कृष्णन का दिल जीत लिया।

परिणामस्वरूप सर सीवी रमण से उनकी मेधा से अवगत कराया। उन दिनों कैंब्रिज जाने से पूर्व रमण के शिष्य विक्रम साराभाई पुणे में अपनी आकाशीय किरण प्रयोगशाला (कास्मिक रे लैब) के लिए योग्य प्रभारी की खोज में थे। इसके लिए सर रमण, होमी भाभा तथा साराभाई ने उनका साक्षात्कार लिया, जिसमें वह अव्वल आए थे। 1945 में इस लैब से जुडऩे के बाद उन्होंने जो शोध किए, उनकी गूंज सुनकर भारत के तत्कालीन वायसराय वेवल भी वहां का भ्रमण किया था।

1949 में उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस बेतार अफसर (पुलिस अधीक्षक के समकक्ष) पद पर लखनऊ जाकर दायित्व संभाला। 1950 में विशिष्ट उपकरण विकसित कर प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया। इसी तंत्र से रावलपिंडी से नेहरू की हत्या के लिए कुछ लोगों को भेजे जाने का भंडाफोड़ हुआ था। बाद में उन्होंने तिब्बत सीमा पर दस हजार से 16 हजार फीट की ऊंचाइयों पर स्थित चौकियों में पुलिस बेतार स्टेशन खोले। अत्यधिक ठंड के कारण जम जाने से इस ऊंचाई पर बेटरी वाले वायरलेस सेट काम नहीं कर सकते थे, लिहाजा उन्होंने स्वचालित बैटरी जनरेटर का उपयोग किया तथा मिलम, गब्र्यांग, निलंग, नीती, माणा, कुटी बेदांग जैसे क्षेत्रों में बेतार स्टेशन स्थापित किए।

यानी भारत-तिब्बत पर संचार व्यवस्था को समृद्ध बनाया। 1965 में भारतीय सीमाओं में शत्रुओं द्वारा घुसपैठ को रोकने व सुरक्षा व्यवस्था हेतु सीमा सुरक्षा बल का गठित हुआ। इसकी संचार व्यवस्था को स्थापित करने के लिए छत्रपति जोशी को 1971 में महानिदेशक बनाया गया। इसके साथ ही निदेशक (पुलिस समन्वयन) का पदभार भी ग्रहण किया, जिसमें अंतरराज्यीय पुलिस संचार व इंटरपोल आते थे। उन्होंने बीएसएफ की विशाल संचार व्यवस्था प्रणाली स्थापित कर उस रूप तक पहुंचाया, जो बाद में 1971 में ही तीन दिसंबर से 16 दिसंबर तक लड़े गए युद्ध में भारत की जीत का कारण बना। 1983 में देश का चौथा नागरिक सम्मान पद्मश्री से अलंकृत किया ।  

प्रदेश में वायरलेस नेटवर्क के विकास और विस्तार में छत्रपति जोशी के योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता. संचार का तब यही सबसे विश्वसनीय माध्यम था, जिसकी आज कल्पना करना भी कठिन है. उन्होंने 1962 में चीन से युद्ध के बाद दुर्गम पहाड़ों में वायरेस संचार का विस्तृत जाल बिछाया. बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में तुरत-फुरत वायरलेस नेटवर्क स्थापित करके मुक्ति वाहिनी को सफलता दिलाने में श्री जोशी ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई थी. पीएसी में वायरलेस अधिकारी के रूप में सेवा शुरू करने वाले श्री जोशी को बाद में सरकार ने पद्मश्री से नवाजा और आईपीएस संवर्ग दिया था

Share96SendTweet60
Previous Post

सर्वोच्च भारतीय विज्ञान शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार विजेता. विनोद भाकुनी

Next Post

सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं समिति के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन

Related Posts

उत्तराखंड

नीम करौली बाबा ने जिंदगी बदल दी’ कैंची धाम में अमेरिकी भक्त मैक्स विलियम

June 16, 2026
15
उत्तराखंड

विख्यात हिम क्रीड़ा केन्द्र औली की पहचान जोशीमठ -औली रोप वे के पुनः संचालन की मांग

June 16, 2026
8
उत्तराखंड

लोनिवि अधिशासी अभियंता एवं ब्लाक प्रमुख ने राजजात यात्रा मार्ग के कार्यों का किया निरीक्षण

June 16, 2026
7
उत्तराखंड

कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटने पर अधिवक्ता मनीष धीमान का स्वागत

June 16, 2026
40
उत्तराखंड

शुगर मिल ने जारी की 26.27 करोड़ की अंतिम किश्त, किसानों में खुशी

June 16, 2026
27
उत्तराखंड

श्री नंदादेवी राजजात की तैयारियों को लेकर वाणी गांव में हुई राजराजेश्वरी समति बधाण की बैठक

June 16, 2026
79

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67699 shares
    Share 27080 Tweet 16925
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45782 shares
    Share 18313 Tweet 11446
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38060 shares
    Share 15224 Tweet 9515
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37448 shares
    Share 14979 Tweet 9362
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37337 shares
    Share 14935 Tweet 9334

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

नीम करौली बाबा ने जिंदगी बदल दी’ कैंची धाम में अमेरिकी भक्त मैक्स विलियम

June 16, 2026

विख्यात हिम क्रीड़ा केन्द्र औली की पहचान जोशीमठ -औली रोप वे के पुनः संचालन की मांग

June 16, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.