डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड, जिसे देवभूमि या देवताओं की भूमि के नाम से भी जाना जाता है, मंदिरों से भरा हुआ है और साल भर पर्यटकों का स्वागत करता है। उत्तराखंड की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक यात्राओं में से एक चार धाम यात्रा है। यह तीर्थयात्रा श्रद्धालुओं को हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित चार पवित्र स्थलों – यमुनात्री, गंगोत्री, केदारनाथ (भगवान शिव को समर्पित) और बद्रीनाथ (भगवान विष्णु को समर्पित) – की यात्रा कराती है। हिंदी में ‘चार धाम’ का अर्थ ‘चार निवास’ होता है, जो इन धार्मिक स्थलों के महत्व को दर्शाता है। आजकल यात्रा डिजिटल हो चुकी है. सब कुछ ऑनलाइन बुक होता है इसी बात का फायदा उठाते हैं स्कैमर्स, साइबर फ्रॉड करने वाले लोग, हूबहू वैसी डिजाइन के फेक वेब. चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण शुरू होते ही साइबर ठगों ने भी अपने जाल बिछाने शुरू कर दिए हैं. देश में साइबर क्राइम के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। एक तरफ जहां डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने के लिए लोग तेजी से इंटरनेट और तकनीकी सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जालसाज और साइबर अपराधी इस डिजिटल युग का नाजायज़ फायदा उठा रहे हैं। आश्चर्य और चिंता की बात तो यह है कि पढ़े-लिखें लोग इस ढगी का सबसे अधिक शिकार हो रहे हैं, हालाँकि इससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि इन ठगों के आगे सरकारी तंत्र पूरी तरह विफल और लाचार नजर आता है। ऐसा इसलिए क्योंकि डिजिटल फ्रॉड से बचने के कुछ सुझावों के अतिरिक्त सरकार के पास, लोगों की गाढ़ी कमाई में सेंध लगाने वाले इन सेंधमारों को पकड़ने और सजा देने का कोई ठोस उपाय नहीं दिखता हैहर साल की तरह इस बार भी ठग श्रद्धालुओं को निशाना बनाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं. हेलीकॉप्टर बुकिंग, होटल रिजर्वेशन और यात्रा पंजीकरण के नाम पर फर्जी वेबसाइट्स और कस्टमर केयर नंबर के जरिए लोगों से ठगी की जा रही है. उत्तराखंड साइबर पुलिस ने ऐसे गिरोहों पर नजर रखते हुए कार्रवाई तेज कर दी है और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट्स के माध्यम से ही बुकिंग और पंजीकरण कराएं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर हेलीकॉप्टर सेवा देने वाली कंपनी के नाम पर एक फर्जी अकाउंट सामने आया है. इस अकाउंट के जरिए चारधाम यात्रा पैकेज के नाम पर लोगों को ठगने की कोशिश की जा रही थी. जांच में पता चला है कि यह फर्जी अकाउंट बिहार से ऑपरेट किया जा रहा है. साइबर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित नेटवर्क को ट्रेस किया जा रहा है साइबर ठग इंटरनेट पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर डालकर उन्हें आधिकारिक हेल्पलाइन के रूप में पेश कर रहे हैं. इन नंबरों पर कॉल करने पर लोगों को झूठी जानकारी देकर बुकिंग के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं. ठग सीमित सीट और विशेष छूट का लालच देकर लोगों पर जल्दबाजी का दबाव बनाते हैं, जिससे लोग बिना जांच किए भुगतान कर देते हैं.चारधाम यात्रा की त्वरित बुकिंग कराने पर आकर्षक पैकेज और छूट वाले लिंक पर भरोसा करना जनप्रिय विहार कालोनी के वैद्यनाथ सिंह को महंगा पड़ गया। टिकट बुकिंग तो हुई नहीं, उलटे जालसाजों 36 हजार रुपये ठग लिए।वैद्यनाथ की तरह और भी हैं, जो आकर्षक पैकेज के झांसे में आकर ठगी का शिकार हुए। इससे साफ है कि साइबर ठगों ने चारधाम यात्रा के नाम पर ठगी का जाल फैला दिया है। इसे लेकर गृह मंत्रालय की ओर से साइबर दोस्त हैंडल ने एक्स पर अलर्ट भी जारी किया है।19 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू होने की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर फर्जी ट्रैवल एजेंसियों के बुकिंग लिंक की बाढ़ आ गई है। जालसाज सस्ते पैकेज, वीआइपी दर्शन और हेलीकाप्टर सेवा का लालच देकर लोगों को फंसा रहे हैं।ठगों ने सरकारी पोर्टल जैसा ही इंटरफेस तैयार कर लिया है, जिससे आम लोग धोखा खा जा रहे हैं। जालसाज पहले इंटरनेट मीडिया पर विज्ञापन डालते हैं, फिर वाट्सएप या काल के जरिये संपर्क कर एडवांस भुगतान की मांग करते हैं। भुगतान होते ही उनका नंबर बंद हो जाता है या वे संपर्क से बाहर हो जा रहे हैं।यात्रा के दौरान होटल और हेलीकाप्टर की बुकिंग के नाम पर साइबर जालसाज लोगों को ज्यादा शिकार बनाते हैं। साइबर कमांडो बताते हैं एक दंपती ने यात्रा के लिए होटल और हेलीकाप्टर से सात दिन का पैकेज बुक कराया। इसके बदले में 25 हजार रुपये भुगतान कर दिया। यात्रा की तिथि नजदीक आने पर संपर्क नंबर बंद बताने लगा। बाद में बुकिंग वाली साइट भी इंटरनेट से गायब हो गई। चारधाम यात्रा शुरू होते ही साइबर ठगों ने जाल बिछाना शुरू कर दिया है। केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर बुकिंग, वीआईपी दर्शन और पूजा बुकिंग की सुविधाओं के नाम पर लोगों को चूना लगाने की कोशिशें की जा रही हैं। एसटीएफ के एसएसपी के मुताबिक इस साल यात्रा के शुरुआती दिनों में ही एसटीएफ ने 225 फर्जी वेबसाइट्स और लिंक को ब्लॉक कर दिया है। 65 मोबाइल नंबर और व्हाट्एप एकाउंट और 12 बैंक खाते ब्लॉक कराए हैं। 2025 में पूरे सीजन में 156 वेबसाइट-पेज, 117 मोबाइल और 35 व्हाट्सएप नंबर और 126 बैंक खातों पर कार्रवाई हुई थी। साल 2024 पूरे यात्रा सीजन में 80 वेबसाइट और 24 पेज ब्लॉक किए गए थे। साथ ही 55 बैंक खाते सीज हुए थे। इधर, चारधाम यात्रा में ठगी के पांच मामले साइबर थाने पहुंच चुके हैं। इन्हें ठगी का शिकार बने लोगों ने दर्ज कराया है। एक मुकदमा साइबर थाना पुलिस अपनी ओर से दर्ज कर चुकी है। चारधाम यात्रा को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने पर यात्रा से जुड़े फर्जी संदेश, वीडियो पोस्ट करने या उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। पर्यटन विभाग ने सोमवार को जारी अपनी विस्तृत आधिकारिक गाइडलाइन में इस संबंध में स्पष्ट चेतावनी दी है। गाइडलाइन में कहा गया है कि यात्रा से जुड़ी गलत सूचनाएं न केवल श्रद्धालुओं को भ्रमित करती हैं, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था व जनभावनाओं को भी प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर हर संदेश-वीडियो पर विभाग की पैनी नजर रहेगी हर साल केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए हेली सेवाओं का संचालन होता है, लेकिन फर्जी वेबसाइट्स और स्कैमर्स यात्रियों को ठगने में जुट जाते हैं. इसे रोकने के लिए उत्तराखंड साइबर सेल ने प्राथमिकता के आधार पर कई कदम उठाए हैं. वहीं, साइबर पुलिस ने अपील की है कि यात्री केवल उत्तराखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ही बुकिंग करें. पिछले साल चारधाम यात्रा के नाम पर ठगी करने वाली 80 फर्जी वेबसाइट्स को बंद किया गया था और 30 से अधिक फेक फेसबुक विज्ञापनों को हटाया गया था. इसके अलावा, 50 से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज किया गया था. साइबर पुलिस ने कई ठगों को गिरफ्तार भी किया है, जिनके पास से मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद हुए. पुलिस ने यात्रियों से आग्रह किया है कि ऑनलाइन आधार कार्ड या पैन कार्ड जैसी संवेदनशील जानकारी किसी के साथ शेयर न करें. प्रशासन और पुलिस की सतर्कता से उम्मीद है कि इस बार यात्रा सुचारु और सुरक्षित रहेगी. लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











