*चीन सीमा को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे में भारी भूस्खलन गांवों का संपर्क टूटा* डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला उत्तराखंड के सीमांत जिले चमोली में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले नीति-मलारी नेशनल हाईवे पर प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला है। सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान पहाड़ी का एक विशाल हिस्सा अचानक भरभराकर हाईवे पर आ गिरा। इस भूस्खलन के कारण न केवल सामरिक आवाजाही प्रभावित हुई है, बल्कि नीति घाटी के दो दर्जन से अधिक गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट गया है।अक्सर मानसून सीजन में दिखने वाली तस्वीरें अब पहले ही दिखाई दे रही हैं. कुछ ऐसा ही चमोली जिले के नीति-मलारी नेशनल हाईवे पर देखने को मिला है, यहां देखते ही देखते बिन बारिश पूरी पहाड़ी दरक गई. इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मंजर को स्थानीय लोगों ने कैमरे में कैद कर लिया. बताया जा रहा है कि हाईवे पर डबल लाइन का कार्य चल रहा है. इसी दौरान भरभरा कर पहाड़ी से भूस्खलन होने लगा और धुएं का गुबार चारों ओर फैल गया. साथ ही मलबा और पत्थर गिरने से मार्ग बाधित हो गया.गौर हो कि उत्तराखंड के चमोली जिले में नीति-मलारी नेशनल हाईवे पर बड़ा लैंडस्लाइड होने से सड़क मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है. बताया जा रहा है कि हाईवे पर इन दिनों सड़क को डबल लेन बनाने का कार्य चल रहा है. इसी दौरान पहाड़ की कटिंग के समय अचानक पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा. भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर आने से हाईवे बंद हो गया है. इस घटना के बाद नीति घाटी के दो दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया है. सड़क बंद होने से स्थानीय लोगों, सेना की आवाजाही और जरूरी सामानों की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है. प्रशासन और बीआरओ की टीमें मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने के कार्य में जुटी हुई हैं, लेकिन लगातार पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण राहत कार्य में दिक्कतें आ रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिसके चलते आए दिन भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं. फिलहाल प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने और वैकल्पिक व्यवस्था होने तक अनावश्यक यात्रा न करने की अपील की है.गौर हो कि पर्वतीय अंचलों में अक्सर ऐसी तस्वीर मानसून सीजन में ज्यादा देखने को मिलती है. मानसून सीजन में भारी बारिश से पहाड़ियों को दरकने से कई मार्ग बाधित हो जाते हैं और लोगों को आवाजाही में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. कई बार पहाड़ी दरकने से वाहन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और लोगों को जान तक गंवानी पड़ती है. जानकारी के अनुसार, इन दिनों सीमा सड़क संगठन नीति-मलारी हाईवे को डबल लेन बनाने का काम युद्ध स्तर पर कर रहा है। सड़क कटिंग के दौरान पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा कमजोर होकर सड़क पर आ गिरा। गनीमत रही कि जिस समय मलबा गिरा, वहां कोई वाहन या मजदूर इसकी चपेट में नहीं आया, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और बीआरओ की टीमें जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंच गई हैं। हालांकि, मलबा हटाने के कार्य में भारी चुनौतियां आ रही हैं। पहाड़ी के ऊपरी हिस्से से अभी भी रुक-रुक कर पत्थर गिर रहे हैं, जिससे मशीनों को चलाने और मजदूरों के काम करने में खतरा बना हुआ है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने आम जनता से इस हिस्से से दूर रहने की अपील की है।प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता सड़क को जल्द से जल्द खोलने की है। लेकिन विशालकाय बोल्डरों को हटाने के लिए ब्लास्टिंग या ड्रिलिंग की जरूरत पड़ सकती है। मौसम साफ रहने पर जल्द ही मार्ग सुचारू होने की उम्मीद है, हालांकि ग्रामीणों को अभी कुछ और समय तक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।बदरीनाथ हाईवे अवरुद्ध होने के चलते गोविंदघाट, पांडुकेश्वर, लामबगड़ सहित आस पास क्षेत्र से ज्योतिर्मठ जा रहे व ज्योतिर्मठ से क्षेत्र में लौट रहे लोगों को घंटों हाईवे खुलने का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











