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‘चुप्पी तोड़ो, स्त्रीत्व से नाता जोड़ो’ कार्यक्रम में शामिल हुईं राज्यपाल बेबी रानी मौर्य एवं माता मंगला

07/03/21
in उत्तराखंड, देहरादून
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर ऋषिकेश एम्स अब महिलाओं को एक तोहफा देने जा रहा है। ऋषिकेश एम्स के रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गाइनेकोलॉजी विभाग की तरफ से एक अभियान चलाया जा रहा है। जिसका उद्देश्य है ‘चुप्पी तोड़ो स्त्रीतत्व से नाता जोड़ो’, इस कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तराखंड की राज्यपाल महामहिम बेबी रानी मौर्य, हंस फाउंडेशन की संस्थापक माताश्री मंगला जी, स्वामी अवधेशानंद जी महाराज और यमकेश्वर विधायिका रितु खंडूरी ने दीप जलाकर किया।

इस कार्यक्रम के तहत ऋषिकेश एम्स के डॉक्टरों के साथ मिलकर महिलाएं वैलेंटअर दुर्गम इलाकों में जाकर गंभीर बीमारियों से जूझ रही महिलाओं को बीमारियों से निजात दिलाने के लिए जानकारी उपलब्ध कराएंगे, ऋषिकेश एम्स के डायरेक्टर डॉ रवि कांत के मार्गदर्शन में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। डायरेक्टर रविकांत का मानना है कि आज पूरे विश्व में 90ः महिलाएं कई तरह की गंभीर बीमारियों से जूझ रही हैं। लेकिन समाज के डर के चलते बीमारी के बारे में किसी को नहीं बताती हैं। पहाड़ और गांव में रहने वाली महिलाएं कई तरह की गंभीर बीमारियों से त्रस्त रहती है और मन ही मन में भयानक पीड़ा से जूझती रहती है। इन बीमारियों में मुख्य बीमारी है। खासते हुए और छीकते हुए यूरिन का निकल जाना और कई गंभीर बीमारियां भी महिलाओं में अक्सर पाई जाती है जिनको वह किसी को बताने में संकोच करती हैं। उन सभी बीमारियों का इलाज करने के लिए ऋषिकेश एम्स ने पहल की है और इन सभी गंभीर बीमारियों का इलाज ऋषिकेश एम्स में मुफ्त किया जाएगा।

इस कार्यक्रम का आयोजन करने पर महामहिम राज्यपाल बेबी रानी मौर्य हंस फाउंडेशन की संस्थापक माता मंगला जी ने एवं समस्त साधु संतों ने ऋषिकेश एम्स के डॉक्टरों की खासकर डॉ रवि कांत की तारीफ की, राज्यपाल बेबी रानी मौर्य इस मौके पर कहा कि स्त्री वरदान कार्यक्रम उन अंतर्मुखी महिलाओं की आवाज बनेगाए जो अपनी निहायत निजी स्वास्थ्य समस्याओं को चुपचाप सहती रहती हैं। उन्होंने कहा महिलाओं के कल्याण के लिए एक पहल की गई है। अच्छी बात यह है कि इसकी शुरुआत उत्तराखंड से की जा गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह संकल्प जल्द साकार होगा और महिलाएं अपनी पीड़ा से मुक्त होंगी।

समाजसेवी एवं हंस फाउंडेशन की संस्थापक मातश्री मंगला जी ने इस मौके पर सबसे पहले उत्तराखंड की वीरांगनाओं तीलू रौतेली, रानी कर्णावती, चिपको आन्दोलन का नेतृत्व करने वाली गौरा देवी, पर्वतारोही चंद्रप्रभा ऐतवाल, उत्तराखंड की पहली लोकगायिका कबूतरी देवी और देश की सभी प्रबुद्ध महिलाओं को प्रणाम करते हुए, दुनिया की सभी महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस शुभकामनाएं दी।

इस मौके पर माता मंगला जी कहा कि निश्चित तौर पर यह विषय बहुत ही गंभीर हैं। इस पर निरंतर चर्चाएं होती रहती है। लेकिन मेरा मानना हैं कि यह विषय केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इस तरह के विषयों पर जब तक गंभीरता से चर्चा नहीं होगी। वह भी हमारी माता.बहनों के बीच जाकर। तब तक हम किसी निर्णय पर पहुंच पाएंगा, यह कह पाना आसान नहीं है।

आवश्यता उन महिलाओं तक पहुंचने की है जो वास्तव में खुद के लिए खुद के स्वास्थ्य के लिए कभी चिंतित रही ही नहीं। आज जरूरत इस बात की हैं कि हम ऐसे ग्रामीणों क्षेत्रों में जाकर काम करे। जहां इस आधुनिक समय में भी हमारी माता.बहनें शिक्षित नहीं है। उनके लिए स्वास्थ्य की सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। उन्हें अपने शाररिक कष्टों के बारे में जानकारी ही नहीं हैं कि जो कष्ट उन्हें हो रहा है। उसका मूल कराण क्या है-

उन्हें यह मालूम ही नहीं हैं कि जिस संकट के वह गुजर रही है। उसके मूल कारण क्या है। इस लिए हम अक्सर देखते हैं कि ऐसी महिलाएं गंभीर से गंभीर बिमारियों से ग्रस्त हो जाती हैं और कई बार अल्प आयु में मौत की आगोश में चली जाती है।

दूसरा यह भी देखने में आता हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कि महिलाओं का सामिजिक दायर अपने घर.आगन तक ही सीमित रहता है। मुझे देखकर कष्ट होता हैं कि आज हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएं ऐसी है जो आज भी कई सामाजिक कुंठाओं से घिरी है। जिसके चलते हमारी यह मातें.बहनें अपने दर्द के लिए अपनी महिला समस्यों के लिए अपनी चुप्पी नहीं तोड़ पाती है। जिसका परिणाम वह अक्सर बिमारियों की शिकार हो जाती है। उनके बच्चे कई तरह की बिमारियों से ग्रस्त हो जाते है। यह बहुत ही दुःखद है।

माताश्री मंगला जी ने कहा कि कोशिश यह की जानी चाहिए की ऐसे महिलाओं को सामाज की मुख्य धारा से जोड़ा जाएं। इनकी शिक्षा के लिए इनके स्वास्थ्य के लिए धरातल पर उतरकर काम किया जाए। आज आवश्यकता इस बात की हैं कि ऐसी महिलाएं जो अपने दर्द, अपनी निजी स्वास्थ्य समस्याओं को चुपचाप सहती रहती है। उन्हें जागरूक किया जाएं और वह जागरूक कब होंगी, जब हम उनके हाथों में शिक्षा की कलम पकड़ाएंगे। वह जब शिक्षित होंगी तो उनकी सोच और समझ का दायरा बढ़ेगा। जिससे वह खुद के जीवन परिवेश को तो बदलेंगी ही साथ हैएसमाज में परिर्वतन आने के लिए काम करेंगी।

माता मंगला जी कहा की हम हंस फाउंडेशन के माध्यम से यही प्रयास हम कर रह है कि सबसे पहले इन महिलाओं की झीझक को मिटाया जाएं, हम उन अनुच्चरित महिलाओं को आवाज दे रहे है। जो अपनी निजी स्वास्थ्य समस्याओं को चुपचाप सहती रहती हैं।

माताश्री मंगला जी ने ऋषिकेश एम्स के डायरेक्टर डॉ रवि कांत को इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि हंस फाउंडेशन के माध्यम से इस तरह की सेवाओं के लिए जो भी सहयोग चाहिए होगा। वह हम उपलब्ध करवाएंगे।

ऋषिकेश एम्स के द्वारा एक व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया गया है। जिससे महिलाएं ऋषिकेश एम्स की महिला डॉक्टरों से खुलकर अपनी बीमारी के बारे में वार्तालाप कर सकेंगे और जानकारी दे सकेंगे, जिसके बाद डाक्टरों की टीम उनको हर संभव मदद देगी, ऋषिकेश एम्स के डॉक्टर व डायरेक्टर रविकांत ने कहा इस के कार्यक्रम ऋषिकेश एम्स में आयोजन के जाने के बाद दुर्गम पहाड़ी इलाकों में रहने वाले ग्रामीण तबके की महिलाओं तक अपने अपने संस्थानों के माध्यम से जानकारी पहुजाएं ताकि जो महिलाएं इन गंभीर बीमारियों से जूझ रही हैं और समाज के डर के चलते सामने आने से हिचकती हे । उनको हर संभव मदद दी जा सके और उनकी बीमारियों का इलाज भी ऋषिकेश एम्स में हो सके और उनको बीमारी से निजात दिलाई जा सके।

इस कार्यक्रम में यमकेश्वर क्षेत्र की विधायक ऋतु खंडूड़ी, ऋषिकेश की महापौर अनीता ममगाईं, दिव्य प्रेम मिशन से आशीष गौतम स्वामी विजय कौशल महाराज, स्वामी देवानंद सरस्वती, डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज कुमार गुप्ता, विभागाध्यक्ष स्त्री रोग प्रोफेसर जया चतुर्वेदी, डॉ नवनीत मग्गो प्रमुख रूप से शामिल हैं।

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