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कोरोना हो रहा फुर्र, कोविड केयर सेंटरों लटकने लगे हैं ताले

08/10/21
in उत्तराखंड
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला:

वर्ष 2020 में जब दून सहित पूरे प्रदेश में कोविड पीक पर था और पेशेंट्स के लिए कोविड केयर सेंटरों की जरूरत पड़ रही थी। तब आनन-फानन में दून में एक के बाद एक-एक करके कई कोविड केयर सेंटर्स बनाए गए। उनमें से रायपुर स्थित राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के अलावा सर्वे चौक स्थित तीलू रौतेली वन स्टॉप सेंटर को भी कोविड केयर सेंटर बनाया गया। इसके अलावा गढ़ी कैंट स्थित अस्पताल को भी सेंटर के रूप में यूज किए जाने लगा।

लेकिन, अब दून में कोविड करीब-करीब दम तोड़ते हुए नजर आ रहा है तो कोरोना मरीजों के लिए तैयार किए गए ये सभी कोविड केयर सेंटर्स खाली पड़ गए हैं। कोरोना की फर्स्ट व सेकेंड वेव में राजीव गांधी कोविड केयर सेंटर कोरोना मरीजों के लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर सामने आया था। यहां सेकेंड वेव में करीब 350 तक पेशेंट तक एडमिट रहे। इसको तैयार करने में रायपुर विधायक निधि से एक करोड़ तक खर्च किए गए।

बकायदा, संचालन का जिम्मा दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल को दिया गया। लेकिन, बीते कई माह से यहां एक भी कोरोना संक्रमित पेशेंट भर्ती नहीं हो पाया। आजकल वह खाली है। सर्वे चौक स्थित तीलू रोतेली वन स्टॉप सेंटर को भी कोरोना मरीजों को देखते हुए कोविड केयर सेंटर के तौर पर तैयार किया गया। जबकि इस सेंटर में डोमैस्टिक वॉयलेंस का शिकार हुई महिलाएं को शेल्टर दिया जाता था।

फिलहाल यहां सेंटर संचालित है, लेकिन इस पर तीन माह से कोई पेशेंट नहीं पहुंचा है और गेट पर ताला लटा हुआ है। गढ़ी कैंट हॉस्पिटल को कोविड अस्पताल के तौर पर तैयार किया गया था। विधायक व सांसद निधि से इसको तैयार करने में चार करोड़ रुपए खर्च किए गए। यहां ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट व ऑक्सीजन बेड तक की सुविधा मरीजों को देने की व्यवस्था की गई थी।

लेकिन, यहां भी चार महीने से कोई कोविड पेशेंट्स चैकअप तक के लिए नहीं पहुंचे हैं।फिलहाल, इन कोविड केयर सेंटर को भविष्य में कोरोना की संभावनाओं को देखते हुए अभी भी चालू हालत में रखा गया है। जिससे जरूरत पड़ने पर इनका यूज किया जा सके। इनकी देखरेख अभी तक हेल्थ डिपार्टमेंट के अधीन है। कोरोना से अब तक राज्य में 7396 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार निजी व सरकारी लैब से 16 हजार 539 सैंपल की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है।

इनमें 16 हजार 531 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। दून में सबसे अधिक चार लोग संक्रमित मिले हैं। इसके अलावा उत्तरकाशी में 2, चमोली व पौड़ी में एक-एक व्यक्ति संक्रमित मिला है। जबकि अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी व ऊधमसिंह नगर में कोरोना का कोई नया मामला नहीं मिला है।  हेल्थ विभाग के आंकड़ों के अनुसार दून में 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के 14,97,625 लोगों का वैक्सीनेशन किया जाना है।

मंडे को जारी आंकड़ों के अनुसार अब तक सभी कैटेगिरी के 14,44,458 लोगों को फर्स्ट डोज दी जा चुकी है। यानी 52,762 लोगों को अब तक फर्स्ट डोज वैक्सीन नहीं दी जा सकी है। 31 दिसंबर वैक्सीनेशन का टारगेट पूरा करने के लिए जरूरी है कि 8 अक्टूबर तक सभी लोगों को फर्स्ट डोज वैक्सीन दे दी जाए। यानी अगले 4 दिन दून में हर रोज 13,191 लोगों को फर्स्ट डोज वैक्सीन देनी जरूरी होगी। अगले चार दिन में यह टारगेट पूरा होने की संभावना इसलिए भी कम है कि हाल के दिनों में दून में वैक्सीनेशन की रफ्तार काफी सुस्त रही है। मंडे को 5,768 लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई।

इनमें फर्स्ट डोज के साथ ही सेकेंड डोज वाले भी शामिल हैं। इससे पहले संडे को 3069 और सैटरडे को 4,429 लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई थी पिछले 10 दिनों में राज्य में वैक्सीनेशन की रफ्तार में भारी कमी आई है। वैक्सीनेशन मीटर जारी करते हुए फाउंडेशन ने बताया कि 23 सितंबर से 2 अक्टूबर तक 3,97,894 डोज वैक्सीन दी गई। जबकि इससे पहले 13 सितंबर से 22 सितंबर तक 7,87,390 डोज दी गई थी। वैक्सीनेशन मीटर के अनुसार अब बाकी 10 दिनों में हर दिन 61,605 डोज देनी होंगी।

जबकि 10 दिन पहले प्रतिदिन का टारगेट 59,410 डोज था। हेल्थ डिपार्टमेंट की माने तो दून में वैक्सीनेशन की कोई कमी नहीं है। वैक्सीनेशन सेंटर्स के अलावा मोबाइल वैन के जरिये भी वैक्सीनेशन किया जा रहा है। स्लॉट बुक करने और रजिस्ट्रेशन करने की बाध्यता भी अब खत्म हो गई है। अब सेंटर्स पर ही रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। हेल्थ डिपार्टमेंट की ओर से लोगों को वैक्सीनेशन के लिए अवेयर भी किया जा रहा है।

इसके बावजूद बहुत कम लोग वैक्सीनेशन सेंटर्स पर पहुंच रहे हैं। त्तराखंड राज्य में स्वास्थ्य विभाग द्वारा करवाई जा रही कोरोना टेस्टिंग की व्यवस्था लड़खड़ा गई है. अंतरराज्यीय सीमा पर जहां पहले रोजाना हजारों में टेस्टिंग हुआ करती थी वहीं अब ये संख्या 300 तक सिमट कर रह गई है. ये हाल तब है जब कोरोना की तीसरी संभावित लहर का खतरा बना हुआ है. राज्य में चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है. पड़ोसी राज्य हिमाचल में कोरोना पॉजिटिव मामलों में इजाफा हो रहा है और आने वाले महीने से फेस्टिवल सीजन भी शुरू होने जा रहा है.


गौरतलब है कि उत्तराखंड में कोरोना को दस्तक दिए हुए 79 हफ्ते पूरे हो चुके हैं. कोरोना के मामलों में जब इजाफा हुआ तब राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने 40 हजार टेस्ट प्रतिदिन यानी 2 लाख 80 हजार टेस्ट हर हफ्ते करवाने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन जून 2021 से अब तक लगभग 4 महीनों में कोरोना टेस्टिंग में उत्तराखंड राज्य में भारी गिरावट आई है.

जहां हर हफ्ते 2 लाख 80 हजार टेस्ट होने चाहिये उसकी तुलना में आधे से भी कम कोविड टेस्ट हो रहे हैं.ने कहा कि कोरोना टेस्टिंग में पिछले 4 महीने से लगातार गिरावट है. उन्होंने कहा कि आने वाले त्योहारी सीजन में उत्तराखंड के लाखों लोग जो बाहरी प्रदेशों में कार्यरत हैं वापस लौटते हैं. इसके अलावा बड़ी तादाद में पर्यटक राज्य मे आ रहे हैं. इन सभी दृष्टिकोण से उत्तराखंड कोरोना के मद्देनजर बेहद संवेदनशील राज्य है. उन्होंने कहा कि 99 प्रतिशत लोग सड़क के माध्यम से राज्य में आते हैं इसलिए सीमा पर सड़क मार्ग से आने वालों की टेस्टिंग होना बेहद जरूरी है

उन्होंने आगे कहा कि उत्तराखंड कोरोना टेस्टिंग को लेकर पहले गियर में चल रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य के सभी 13 जनपदों में कोरोना टेस्टिंग को चौथे गियर में लाने की आवश्यकता है. वहीं, स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने भारत सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक पूरी तैयारी की है. सभी अस्पतालों में व्यवस्था दुरुस्त कर दी हैं.

राज्य में कोरोना टेस्टिंग में गिरावट के बारे में उन्होंने कहा कि इसके लिए समीक्षा बैठक की है. उन्होंने कहा कि जिन-जिन जनपदों में टेस्टिंग कम की जा रही है उन जिलों के डीएम और सीएमओ को आदेश किये हैं कि भारत सरकार के मानक के मुताबिक सौ फीसदी टेस्टिंग हो ताकि कोई खतरा न हो.

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