डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में बारिश, लैंडस्लाइड और बाढ़ ने आफत मचा रखी है. यहां आपदा जैसे हालात हो रखे हैं. शुक्रवार को धारचूला के आदि कैलाश मार्ग पर भयानक लैंडस्लाइड हुआ. हालांकि बीआरओ ने कड़ी मशक्कत बाद मलबा हटा दिया. उधर धारचूला के ऊंचाई वाले इलाकों में हुई बारिश से आई बाढ़ में कुलागाड़ बैली ब्रिज बह गया है. इससे तीन घाटियों के लोगों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है. सुरक्षा के लिहाज से धारचूला-तवाघाट-गुंजी मार्ग बंद किया गया है.पिथौरागढ़ में धारचूला के आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर गस्कू के पास अचानक पहाड़ी से बोल्डरों की बरसात होने से शुक्रवार को करीब एक घंटे तक यातायात बाधित रहा था. पहाड़ी से लगातार बोल्डर गिरते देख मौके पर काम कर रहे जेसीबी ऑपरेटर ने सूझबूझ दिखाते हुए मशीन को तत्काल सुरक्षित स्थान पर हटा लिया. इससे बड़ा हादसा टल गया. आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर शुक्रवार को केवल गस्कू में ही नहीं, बल्कि कई अन्य स्थानों पर भी पहाड़ी से मलबा और बोल्डर आने के कारण यातायात प्रभावित हुआ. बनग्याल के अनुसार कुलागाड़ और एलागाड़ में सड़क बंद हो गई थी. इसके बाद मलघाट में भी सड़क पर मलबा आने से यातायात बाधित हुआ. गस्कू में पहले सड़क से मलबा हटाकर मार्ग खोला गया, लेकिन कुछ देर बाद दोबारा बोल्डर गिरने से स्थिति बिगड़ गई. पहाड़ी से बोल्डर गिरने का खतरा देखते हुए बीआरओ कर्मियों ने सावधानी बरतते हुए मार्ग खोलने का काम किया. बोल्डरों का गिरना रुकने के बाद ही मशीनों को प्रभावित हिस्से में भेजा गया. आदि कैलाश यात्रा शुरू होने के बीच यात्रा मार्ग पर अलग-अलग स्थानों पर बोल्डर और मलबा गिरने की घटनाओं ने चुनौती बढ़ा दी है. बारिश के बाद पहाड़ियों के कमजोर होने से संवेदनशील हिस्सों में अचानक पत्थर गिर रहे हैं. धारचूला के ऊंचाई वाले इलाके में हुई भारी बारिश से ऊफान पर आई कुलागाड़, बैली ब्रिज को अपने साथ बहा ले गई. 170 फीट लंबे इस पुल को 27 अगस्त को बनाया गया था. पुल बहने के साथ ही चीन सीमा के साथ ही व्यास, दारमा और चौदास घाटियों का शेष दुनियां से संपर्क कट गया है. कुलागाड़ पर बना पुल 18 अगस्त को पहाड़ी से बोल्डर गिरने से ध्वस्त हो गया था. इससे दारमा, चौदास और व्यास घाटी का तहसील मुख्यालय से करीब दो दिन तक पूरी तरह संपर्क कट गया था. बीआरओ ने युद्धस्तर पर काम करते हुए सात सीमेंटेड कलवर्ट डालकर तीसरे दिन अस्थायी मार्ग तैयार किया और यातायात सुचारू कराया था. बीआरओ ने 23 अगस्त से नए बैली ब्रिज का निर्माण शुरू किया था. 67 आरसीसी, ग्रेफ के ओसी चंद्र गुप्त के नेतृत्व में एक एई और छह जेई की टीम ने 35 मजदूरों, एक क्रेन, एक लोडर और एक जेसीबी की मदद से दिन-रात काम कर 27 अगस्त को नया पुल तैयार किया था. 28 अगस्त से यातायात सुचारू हुआ था. वाहनों की आवाजाही शुरू होने पर सुरक्षा कर्मियों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी. लेकिन शुक्रवार रात इस बैली ब्रिज के बह जाने से अब एक बार फिर मुसीबतें शुरू हो गई हैं. पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से धारचूला-तवाघाट-गुंजी मार्ग को आवागमन के लिए बंद कर दिया है. भारी वाहन, यात्री वाहन या अन्य वाहनों से आवागमन न करने की सलाह दी गई है. वर्तमान में बारिश के कारण एक दर्जन सडकें बंद हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लगातार बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से धारचूला-तवाघाट-गुंजी मार्ग को आवागमन के लिए बंद कर दिया है। लोगों को इस मार्ग पर भारी वाहन, यात्री वाहन या अन्य वाहनों से यात्रा नहीं करने की सलाह दी गई है।जिले में करीब एक दर्जन सड़कें बारिश के कारण बंद बताई गई हैं। संबंधित विभाग बंद सड़कों को खोलने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से बारिश और भूस्खलन के बीच अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। पुल के दोबारा बह जाने से क्षेत्र के लोगों के सामने फिर से आवागमन की समस्या खड़ी हो गई है। लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं











