डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड की युवा आईएएस अधिकारी अपूर्वा पांडे आज प्रदेश की सबसे कम उम्र की जिला कलेक्टर (DM) के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। बागेश्वर की जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत अपूर्वा पांडे ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। उनका सफर आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।
अल्मोड़ा की रहने वाली अपूर्वा पांडे का जन्म 29 अप्रैल 1994 को हुआ। उनकी माता मीना पांडे नैनीताल के जीजीआईसी में रसायन विज्ञान की शिक्षिका हैं, जबकि पिता किशन चंद्र पांडे कोटाबाग पॉलिटेक्निक में अध्यापक रहे हैं। घर में सभी उन्हें प्यार से ‘मन्नू’ कहकर बुलाते हैं।
अपूर्वा ने शुरुआती पढ़ाई सेंट मैरीज़ स्कूल से की और इंटरमीडिएट बीरशिबा सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हल्द्वानी से पूरा किया। इसके बाद उन्होंने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया।
इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2017 में ऑल इंडिया 39वीं रैंक हासिल कर महज 23 वर्ष की उम्र में आईएएस बनने का सपना पूरा कर लिया।
आज अपूर्वा पांडे उत्तराखंड की सबसे युवा जिला कलेक्टर हैं। बागेश्वर से पहले वह मुख्य विकास अधिकारी (CDO) पौड़ी गढ़वाल, स्वजल निदेशक, अपर सचिव (पेयजल एवं गृह विभाग) समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। उन्होंने रानीखेत, रुड़की और देहरादून में भी प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाई हैं
बागेश्वर की कमान संभालने के बाद उन्होंने आपदा प्रबंधन, अतिक्रमण हटाने, अवैध निर्माण पर कार्रवाई, जनसुनवाई और शिकायतों के त्वरित निस्तारण को प्राथमिकता दी है। मानसून के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी और प्रशासन को अलर्ट रखने के निर्देश भी दिए गए ह
अपूर्वा पांडे को बचपन से किताबें पढ़ने और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेने का शौक रहा है। उनका मानना है कि नियमित पढ़ाई, अनुशासन और आत्मविश्वास ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी हैं।
घर में ‘मन्नू’ कहलाने वाली अपूर्वा पांडे ने अपनी मेहनत, लगन और जुनून के दम पर यह साबित कर दिया कि बड़े सपने देखने वाले ही इतिहास रचते हैं। उनकी सफलता आज उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल है।
लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











