डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
देश के प्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन पद्मश्री डॉ योगी ऐरन का नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है. डॉक्टर योगी ने अपना पूरा जीवन आग में झुलसे लोगों एवं जंगली जानवरों के लिए समर्पित किया है. साल 2020 में ‘पद्मश्री’ से सम्मानित डॉक्टर ऐरन पिछले 40 सालों से मसूरी की तलहटी राजपुर कुठाल गेट के पास एक पहाड़ी के हिस्से में प्राकृतिक संसाधनों से प्राइवेट बंकर तैयार कर रहे हैं, जहां लोग आपातकालीन स्थिति में भी सुरक्षित रह सकते हैं. ये उनका ड्रीम प्रोजक्ट है. खुद डॉक्टर ऐरन ने अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट की एक-एक बारीकी समझाई.साल 1966 से 1984 तक अमेरिका में प्रेक्टिस करने के बाद देहरादून में आकर बसे डॉक्टर योगी ऐरन आज के युग में प्रकृति से जुड़कर उसकी गोद में कुछ जीवनदायनी वस्तुओं के बीच रहने का भी ठिकाना बना रहे हैं. मसूरी की पहाड़ी की तलहटी में बना यह पूरा इलाका ‘जंगल मंगल’ के नाम से पहचाना जाता है. यहां 6 हजार से अधिक पेड़ पौधे लगाए गए हैं, जिसमें मुख्यतः ढाई सौ से अधिक बरगद के पेड़ और पीपल के पेड़ लगाए गए हैं. इतना ही नहीं, लगभग ढाई एकड़ में फैले जंगल-मंगल के नाम पहचान रखने वाले स्थान में पालतू जीव-जन्तु भी हैं. गी ऐरन का जन्म 1937 में मेरठ में हुआ, उन्होंने केजीएमसी से 1967 में एमबीबीएस किया। पटना के प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल से 1971 में पीजी किया। 1973 में उन्हें दून अस्पताल में नौकरी मिली, लेकिन उस दौरान प्लास्टिक सर्जरी के प्रचलित नहीं होने से उन्हें खास काम नहीं मिला।70 का दशक था, और प्लास्टिक सर्जरी के बारे में लोगों में जागरूकता नहीं थी। ऐसे में वह शुरुआती सालों में सिर्फ पोस्टमार्टम ड्यूटी करते रहे। जिसके बाद दून अस्पताल की नौकरी छोड़ वह अमेरिका चले गए। जहां उन्होंनें डॉ. मिलार्ड से प्लास्टिक सर्जरी की बारीकियां सीखीं। 1984 में दून वापस आने के बाद मालसी में जंगल मंगल अस्पताल बनाया, लेकिन जंगल से घिरे क्षेत्र में कम मरीज आते थे। बाद में आईटी रोड पर दस बेड का अस्पताल बनाया। जहां वह गरीबों के जले और कटे मानव अंगों की फ्री प्लास्टिक सर्जरी करते हैं। उनका कहना है कि लोगों ने उन पर विश्वास किया, इसी कारण उन्हें सफलता मिली है। कभी अमेरिका में प्लास्टिक सर्जन रह चुके डॉ. योगी में पिछले 14 साल से मानवता की सेवा करने में जुटे हुए हैं। वह कहते हैं कि जलने या जानवर के हमले में घायल होने के कारण शारीरिक विकृति से जूझ रहे लोगों को दोबारा वही काया पाकर न सिर्फ नया जीवन, बल्कि सामान्य जीवन जीने का एक हौसला भी मिलता है। वह न सिर्फ सफल प्लास्टिक सर्जन हैं, बल्कि 84 साल की उम्र में भी उनके हाथों की सर्जरी में लोगों को जादू नजर आता है। डॉ.योगी ऐरन को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया…. उनके सम्मान से उत्तराखंड का भी मान बढ़ा है। डॉ.योगी ऐरन कई सालों से लोगों को निशुल्क सेवाएं देते आये हैं, आज 84 की उम्र में उन्होंने 5000 से अधिक फ्री प्लास्टिक सर्जरी कर लोगों को जीवन दान दिया है। भारत में ऐसे कई लोग है जो आर्थिक रूप से कमज़ोर है और दुर्घटना के चलते त्वचा में विकृति आ जाने पर यह प्लास्टिक सर्जरी नहीं करा पाते हैं। ऐसे ही लोगो के लिए डॉ. योगी ऐरन सालों से मुफ्त में इलाज कर रहे हैं।यही नहीं, डॉ. ऐरन तीन साल से प्लास्टिक सर्जरी पर ब्लू बुक तैयार कर रहे हैं। इसमें प्लास्टिक सर्जरी के जटिल ऑपरेशन करने का ब्लू प्रिंट शामिल होगा। इस बुक में उनकी सर्जरी वाले मरीजों की एक लाख तस्वीरें भी होंगी। मूलरूप से यूपी के मेरठ निवासी डॉ. ऐरन दून के आईटी पार्क रोड के पास हेल्पिंग हैंड नाम की संस्था और जंगल मंगल अस्पताल चलाते हैं। जो लंबे अरसे से गरीब लोगों के जले और कटे मानव अंगों की फ्री प्लास्टिक सर्जरी करती है। देश के प्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन पद्मश्री डॉ योगी ऐरन का नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है. डॉक्टर योगी ने अपना पूरा जीवन आग में झुलसे लोगों एवं जंगली जानवरों के लिए समर्पित किया है. साल 2020 में ‘पद्मश्री’ से सम्मानित डॉक्टर ऐरन पिछले 40 सालों से मसूरी की तलहटी राजपुर कुठाल गेट के पास एक पहाड़ी के हिस्से में प्राकृतिक संसाधनों से प्राइवेट बंकर तैयार कर रहे हैं, जहां लोग आपातकालीन स्थिति में भी सुरक्षित रह सकते हैं. ये उनका ड्रीम प्रोजक्ट है. ईटीवी भारत की टीम को खुद डॉक्टर ऐरन ने अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट की एक-एक बारीकी समझाई.साल 1966 से 1984 तक अमेरिका में प्रेक्टिस करने के बाद देहरादून में आकर बसे डॉक्टर योगी ऐरन आज के युग में प्रकृति से जुड़कर उसकी गोद में कुछ जीवनदायनी वस्तुओं के बीच रहने का भी ठिकाना बना रहे हैं. मसूरी की पहाड़ी की तलहटी में बना यह पूरा इलाका ‘जंगल मंगल’ के नाम से पहचाना जाता है. यहां 6 हजार से अधिक पेड़ पौधे लगाए गए हैं, जिसमें मुख्यतः ढाई सौ से अधिक बरगद के पेड़ और पीपल के पेड़ लगाए गए हैं. इतना ही नहीं, लगभग ढाई एकड़ में फैले जंगल-मंगल के नाम पहचान रखने वाले स्थान में पालतू जीव-जन्तु भी हैं. इस स्थान में किसी आपातकाल की स्थिति में भी आसानी से रहा जा सकता है. इस बंकर में तीन अलग-अलग बड़े कमरे हैं, जिसमें 10 से 12 लोग आसानी से रह सकते हैं. बंकर की दीवारें प्राकृतिक रूप से 10 फीट से अधिक हैं. बंकर में रहने के लिए बेड हैं, नेचुरल ऑक्सीजन, मेडिकल सहित और भी कई तरह की सुविधाएं दी गई हैं, जो लंबे वक्त तक किसी इंसान के जीवित रहने के लिए जरूरी हैं. यह सभी सुविधाएं प्राकृतिक संसाधनों से जोड़ी गई हैं, ताकि यहां रहकर भी प्रकृति की गोद में सुकून का समय बिताया जा सके. पिछले 40 सालों से उनके पास जो कारीगर काम कर रहे हैं वो जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, सहारनपुर और अन्य राज्यों से भी यहां काम कर रहे हैं. डॉक्टर योगी ने यहां स्कूली बच्चों को वैज्ञानिक शिक्षा देने के लिए भी कई तरह के जानवर्धक बातों का भी ध्यान रखा है. मसलन गुरुत्वाकर्षण की पद्धति, पृथ्वी की धुरी का संतुलन कैसे बनता है, पेड़ पौधों, पशुओं और प्राकृतिक संसाधनों से कितनी महत्वपूर्ण चीजें हमें जीवनदायिनी के रूप में मिलती हैं. साल 2020 के पद्म पुरस्कारों की सूची में शामिल किया गया और तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्होंने पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा था. डॉ योगी ने साल 1966 से साल 1984 तक अमेरिका में प्रेक्टिस की. इसके बाद वे अपनी जड़ों में वापस लौट आए. डॉ योगी ने हेल्पिंग हैंड नाम से एक संस्था भी शुरू की, जो अमेरिकी चिकित्सकों की मदद से निःशुल्क सर्जरी कैंप का आयोजन करती है.2047 के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में कैसे देश के हर एक नागरिक के जीवन को जोड़ा जा सकता है।।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.














