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इको टूरिज्म ने राज्य में पकड़ी रफ्तार पर्यटक तोड़ रहे सारे रिकॉर्ड

17/06/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
पर्यावरण संरक्षण के साथ साथ स्थानीय समुदाय की सहभागिता के आधार पर उत्तराखंड में संचालित इको टूरिज्म :पारिस्थितिकीय पर्यटन: गतिविधियों में पर्यटकों की रूचि बढ़ती जा रही है और पिछले वर्ष पांच लाख से ज्यादा लोग इनका आनंद उठाने के लिये प्रदेश में पहुंचे । उत्तराखंड वन विभाग का मानना है कि बाघों के लिये मशहूर कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान और एशियाई हाथियों के आवास के रूप में प्रसिद्ध राजाजी राष्ट्रीय पार्क समेत राज्य के सभी संरक्षित वन क्षेत्रों में अनूठी जैव विविधता की मौजूदगी के चलते इको—टूरिज्म की अपार संभावनायें उत्तराखंड लंबे समय से चारधाम यात्रा, धार्मिक पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है. लेकिन अब राज्य की पहचान केवल तीर्थाटन तक सीमित नहीं रह गई है. बीते कुछ सालों में इको टूरिज्म के क्षेत्र में हुए प्रयोगों और नई योजनाओं का असर जमीन पर साफ दिखाई देने लगा है. हालात यह हैं कि राज्य के प्रमुख इको टूरिज्म स्थलों पर पर्यटकों की संख्या लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है. देहरादून चिड़ियाघर और लच्छीवाला नेचर पार्क में हाल ही में दर्ज हुई पर्यटकों की संख्या इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड में प्रकृति आधारित पर्यटन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.चारधाम यात्रा के दौरान जहां लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंच रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में पर्यटक इको टूरिज्म स्थलों का भी रुख कर रहे हैं. वन विभाग की ओर से पिछले कुछ वर्षों में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल की गई हैं. जंगलों, नेचर पार्कों, वन विश्राम गृहों और प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन के लिहाज से विकसित किया गया है. इसका सकारात्मक परिणाम अब पर्यटकों की बढ़ती संख्या के रूप में सामने आ रहा है.अगर देहरादून चिड़ियाघर के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां लगातार नए रिकॉर्ड बन रहे हैं. वर्ष 2023 में 18 जून को एक दिन में 8065 पर्यटक चिड़ियाघर पहुंचे थे. उस दिन टिकटों और अन्य मदों से कुल 5 लाख 21 हजार 570 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था. उस समय इसे चिड़ियाघर के इतिहास का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना गया था. इसके बाद 8 जून 2025 को चिड़ियाघर में 7789 पर्यटक पहुंचे. हालांकि पर्यटकों की संख्या के लिहाज से यह रिकॉर्ड नहीं था, लेकिन आमदनी के मामले में इस दिन ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए. उस दिन चिड़ियाघर को 6 लाख 3 हजार 800 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था. यह पहली बार था जब किसी एक दिन में चिड़ियाघर की आमदनी छह लाख रुपये के आंकड़े को पार कर गई थी.पर्यटकों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका. 4 जनवरी 2026 को देहरादून चिड़ियाघर में 8662 पर्यटक पहुंचे और 5 लाख 44 हजार 860 रुपये की आय दर्ज की गई. इसके बाद 22 मार्च 2026 को एक नया इतिहास बना, जब 10 हजार 148 पर्यटक चिड़ियाघर पहुंचे. उस दिन 6 लाख 76 हजार 690 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ और यह सभी पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने वाला दिन साबित हुआ. हालांकि यह रिकॉर्ड भी ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सका. 14 जून 2026, रविवार को देहरादून चिड़ियाघर ने फिर से अपने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए. इस दिन चिड़ियाघर में कुल 10 हजार 621 पर्यटक पहुंचे. इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों की मौजूदगी ने न केवल नया रिकॉर्ड बनाया बल्कि राजस्व के मामले में भी नया इतिहास रच दिया. एक ही दिन में चिड़ियाघर को 7 लाख 9 हजार 570 रुपये की रिकॉर्ड आमदनी हुई.यह अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा माना जा रहा है.सिर्फ देहरादून चिड़ियाघर ही नहीं, बल्कि देहरादून का प्रसिद्ध लच्छीवाला नेचर पार्क भी पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है. गर्मी के मौसम और वीकेंड के दौरान यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. 14 जून 2026 को रविवार के दिन लच्छीवाला में भी रिकॉर्ड पर्यटक पहुंचे. इस दिन कुल 7322 लोगों ने लच्छीवाला का भ्रमण किया. इससे वन विभाग को लगभग 5 लाख 90 हजार रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ.खास बात यह है कि इससे पहले लच्छीवाला में एक दिन में लगभग 5500 पर्यटकों के पहुंचने का रिकॉर्ड था. लेकिन इस बार पर्यटकों की संख्या ने पुराने सभी आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया.इससे साफ है कि प्राकृतिक वातावरण, जंगलों के बीच बने मनोरंजन स्थल और इको फ्रेंडली पर्यटन गतिविधियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं.वन विभाग में इको टूरिज्म की जिम्मेदारी संभाल रहे मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) का कहना है कि इको टूरिज्म स्थलों पर लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या विभाग के लिए उत्साहजनक संकेत है. उनका मानना है कि इससे राज्य के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा मिल रही है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है. हालांकि इसके साथ कई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं.उत्तराखंड में इको टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं. राज्य के जंगल, जैव विविधता, वन्यजीव, नदियां और प्राकृतिक परिदृश्य पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं. यही वजह है कि वन विभाग लगातार नए इको टूरिज्म डेस्टिनेशन विकसित करने पर काम कर रहा है. देहरादून के अलावा नैनीताल, पौड़ी, टिहरी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जैसे पर्वतीय जिलों में भी इको टूरिज्म गतिविधियों को विस्तार दिया जा रहा है.वन विभाग की योजना विभिन्न वन विश्राम गृहों और प्राकृतिक स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की है ताकि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके. इसके साथ ही कुछ नए पर्यटन स्थलों को भी इको टूरिज्म मॉडल के तहत विकसित करने की प्रक्रिया चल रही है. विभाग का मानना है कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचेगा. जीने पर्यटकों के रहने के लिए डेवलप किया जाएगा। कहा इनसे होने वाली आय से ही इनकी देखरेख का खर्चा निकाला जाएगा। कहां अगर योजना परवान चढ़ती है तो इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने के साथ-साथ पर्यटन बढ़ेगा।. लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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