पिथौरागढ़, 22 जून। “शिक्षा के सवाल बहुत गहरे हैं। शिक्षा ही है जो उचित नेतृत्व, समझ और विकास के मार्ग प्रशस्त करती है।
दुनिया युद्ध के भयावह परिणामों से त्रस्त है। आज समय है कि हम मनुष्य के शैक्षणिक विकास का सिंहावलोकन करें ।” जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान ( डायट ) डीडीहाट के प्राचार्य भास्करानन्द पांडे स्त्री शिक्षा के सवालों पर हुई शैक्षिक संवाद गोष्ठी को बतौर अध्यक्ष संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्त्री शिक्षा के सवालों पर आयोजित इस शैक्षिक संवाद गोष्ठी में वक्ताओं ने माना कि समाज में महिला शिक्षा का महत्व बढ़ा है।
शैक्षिक दखल समिति के वार्षिक अधिवेशन एवं स्थापना दिवस के पहले दिवस के दूसरे सत्र का संचालन करते हुए शिक्षक एवं व्यंग्यकार रमेश चंद्र जोशी ने कहा कि स्त्री शिक्षा पर विमर्श को बढ़ाने की आवश्यकता है। आगे बढ़ते हुए पीछे देखने की ज़रूरत है।
शिक्षक एवं साहित्यकार महेश चन्द्र पुनेठा ने विमर्श का आधार पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि बालिकाओं की शिक्षा में पहुंच, नामांकन, ठहराव और गुणवत्ता बढ़ी है। उनका परीक्षा परिणामों में प्रदर्शन बालकों से बेहतर दिखाई देता है। बावजूद इसके कई क्षेत्रों में अपेक्षाकृत बदलावों की जरूरत है। आज भी विज्ञान तकनीक और शोध के क्षेत्र में बालिकाओं की संख्या बालकों से कम है। साथ ही नौकरी और नेतृत्व के क्षेत्र में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर लड़कियों का ड्रॉप आउट रेट अधिक है। छेड़ खानी की घटनाओं का दर्ज होने का रेट बढ़ा है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे कहीं न कहीं स्कूल और समाज में व्याप्त पूर्वग्रह हैं,जो लड़कियों के आत्मविश्वास को कम करने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि इसके समाधान के लिए लैंगिक धारणाओं को तोड़ने और स्कूल कॉलेज में सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है।
स्त्री शिक्षा के बगैर एक स्वस्थ समाज की स्थापना संभव नहीं है। पुरुष सत्तात्मक समाज के कारणों पर चर्चा करते हुए हमें उन कारणों पर बात करते हुए समाधान भी सुझाने होंगे।
इस अवसर पर शिक्षा और स्त्री विषय पर केंद्रित शैक्षिक दखल संवाद गोष्ठी में बतौर वक्ताओं ने स्त्री शिक्षा के इतिहास, वर्तमान और भविष्य पर चर्चा की।
सामाजिक एक्टीविस्ट प्रियंका ने कहा कि समाज में बदलाव के लिए चेतना की आवश्यकता है। महिलाएं खुद अपने अस्तित्व के लिए आगे आएं । पुरुष सहयोग करें। यह समाज के विकास के लिए लाभदायक होगा । शिक्षक एवं लेखक डॉ० महेश बवाड़ी ने कहा कि बालकों को शिक्षित करना ज़्यादा जरूरी है। घर में बराबरी का समाज है। यह विकसित करना होगा। शिक्षक एवं चित्रकार मोहन चौहान ने कहा कि संवेदनाएं ही बराबरी का समाज स्थापित कर सकती हैं! बराबरी के लिए भी और बालिकाओं को पूर्ण अधिकार देने के लिए समाज को आगे आने की ज़रूरत है। डॉ० लोकेश डसीला ने कहा कि दुनिया में स्वस्थ समाज वहाँ पनपते हैं जहाँ स्त्रियों को सामापिक – आर्थिक और पारिवारिक स्तर पर बराबरी का अधिकार मिला । शिक्षा हमें मुक्त करती है। शिक्षक एवं विज्ञान सलाहकार डॉ० निर्मल न्यौलिया ने कहा कि वैज्ञानिक चेतना और तार्किक समाज तभी बनेगा जब हम स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देंगे । शिक्षक एवं सामाजिक एक्टी विस्ट सतीश जोशी ने कहा कि अपने अनुभवों के आधार पर स्त्रियों को स्वस्थ माहौल उपलब्ध कराना जरूरी है। हम स्त्रियों के सहयोगी बनें । बाधक नहीं ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य दुष्यन्त पांगती , विशिष्ट अतिथि शिक्षक नेता गोविंद भण्डारी और सेवानिवृत्त शिक्षिका राजेन्द्री कन्याल रहे. साहित्यकार एवं शिक्षक दिनेश कर्नाटक , लेखक एवं शिक्षक राजीव जोशी, कुंडल सिँह सहित डाइट प्रवक्ता विनोद बसेड़ा, बीबी मीना डसीला, मंजू वर्मा, संतोष मेहता, रामकुमार साहू, लोकेश डसीला, महेश बवाड़ी, मनोहर चमोली,प्रधानाचार्य प्रेम सिंह पापड़ा
सहित स्थानीय नागरिक मौजूद रहे.
इस अवसर पर शैक्षिक दखल पत्रिका के सभी अंकों और शिक्षा केंद्रित पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।











