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देवभूमि में अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ नरम रुख क्यों?

23/06/26
in चमोली
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उत्तराखंडी किसी अराजक तत्वों की कृपा के पात्र नहीं, आप कानून का पालन करें, उत्तराखंडियों की चिंता छोड़ें
शंकर सिंह भाटिया
देवभूमि उत्तराखंड में यह यात्राकाल चल रहा है। एक तरफ चार धाम यात्रा पीक पर है, दूसरी तरफ हेमकुंड साहब यात्रा है। मैदान की गरमी से बेहाल लोग पहाड़ में आने का बहाना ढूंढ रहे हैं। इसलिए पहाड़ अपनी धारण क्षमता से अधिक धारण करने को मजबूर है। जब भीड़ अधिक हो तो कानून व्यवस्था की समस्या भी उठ खड़ी होती है। उत्तराखंड इस समय इन समस्याओं से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, लेकिन कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी करने वाले लोग इसके लिए अपनी अराजक मानसिकता को जिम्मेदार ठहराने के बजाय उत्तराखंड के स्थानीय लोगों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
सीजन के शुरूआती दौर में उत्तराखंड ने हरियाणा के युवाओं की अराजकता देखी। पहाड़ में प्रवेश करते ही शराब का सेवन, कपड़े खोलकर अधनंगे होकर अराजकता फैलाना, नदियों के किनारे शराब पीकर उत्पात मचाना, महिलाओं बच्चों से छेड़छाड़ करना इनका शगल बन जाता है। ऋषिकेश में इसी तरह के एक प्रदर्शन में शराब के नशे में अधनंगे होकर अराजकता फैलाते इन युवाओं को कुछ स्थानीय लोगों ने पहले समझाने की कोशिश की, नाकाम होने पर पिटाई कर दी। यह मामला तूल पकड़ गया। उनकी अराजकता, हुड़दंग फैलाने की कोशिश को दरकिनार कर हरियाणा के कुछ यूट्यूबर ने इसे दूसरा ही रंग देने की कोशिश कर दी। उनका कहना था कि यदि स्थानीय लोग इसी तरह पर्यटकों से मारपीट करेंगे तो हरियाणा के लोग पहाड़ में आना बंद कर देंगे और पहाड़ के लोगों की रोजरोटी पर इसका बुरा असर पड़ेगा। मतलब यह कि अधनंग होकर शराब के नशे में हुड़दंग मचाना लोगों से मारपीट और अराजकता करना कोई मायने नहीं रखता स्थानीय लोगों द्वारा उनको रोकना सबसे बड़ी समस्या है। इस घटनाक्रम के बाद कुछ हरियाणा के महिला इंफ्लुंएंसर ने पहाड़ में आते ही अधनंग होकर हुड़दंग मचाने वालों की करनी को पूरी तहर से बेनकाब कर दिया। इससे साफ होता है कि कुछ लोग स्थानीय लोगों के रोजगार की आड़ लेकर अराजकता फैलाने वालों खुली छूट दे रहे हैं।
अब नया मामला निहंग सिखों का आया है। जो हर यात्रा में अराजकता फैलाते हैं। धर्म की आड़ में तलवार लेकर चलते हैं और छोटी सी बात पर किसी पर भी तलवार से हमला कर देते हैं। कर्णप्रयाग में स्थानीय दुकानदारों पर बिना किसी बात के तलवार से हमला करने वाले निहंग सिखों की करतूत सबने सोशल मीडिया के जरिये देखी। अपनी जान को हथेली में रखकर स्थानीय लोगों ने अराजक निहंगों को किसी तरह नियंत्रित किया। स्थानीय लोगों की आत्म सुरक्षा में की गई इस कार्यवाही को उन्होंने अपने मानसम्मान से जोड़ लिया। उन्हें अराजकता करने से क्यों रोका गया? नगरासू गुरूद्वारा के प्रबंधकों ने क्यों खुलकर उनका समर्थन नहीं किया? इन सवालों को लेकर अब वे नया बखेड़ा खड़ा कर रहे हैं और रुद्रप्रयाग चमोली जिलों में अराजकता फैला रहे हैं। एक दो दिनों के अंदर कर्णप्रयाग, नगरासू और रुद्रप्रयाग में इनकी अराजकता देखने को मिली है।
सवाल उठता है कि स्थानीय प्रशासन हर साल अराजकता फैलाने वाले इन निहंगों को तलवार लेकर चलने की अनुमति क्यों दे रहा है? 1699 को जब खालसा पंथ की स्थापना की गई थी, तब सिख पंथ अपनाने वालों के पांच ककार लेने का नियम बनाया गया। ये पांच ककार हैं-केश, कंघा, कड़ा, कच्छा और किरपाण। किरपाण को लेकर साफ कहा गया है कि आत्मरक्षा के लिए लोहे का छोटा सा छुरा रखा जा सकता है। इस नियम के आड़ में तलवारें लेकर चलना और तलवारों से हमला करना इन्होंने अपना अधिकार मान लिया है।
कर्णप्रयाग में जिस तरह एक युवक पर छह निहंगों ने तलवारों से हमला कर उसे बुरी तरह से घायल किया है, उसकी किस्मत अच्छी थी कि वह बच गया। उत्तराखंड के स्तर पर अराजकता फैलाने वाले निहंगों पर कठोर कार्रवाही करने के बजाय स्थानीय लोग जो तलवारबाज निहंगों से आत्मरक्षा कर उन्हें निहत्थे काबू करने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें बराबर का हमलावर घोषित कर उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। घटना चमोली जिले में घटी जांच हरिद्वार पुलिस को सौंपी गई है। उत्तराखंड की ढुलमुल व्यवस्था यदि जांच पंजाब पुलिस को भी सौंप दे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। यह साबित नहीं करता कि क्या स्थानीय लोगों को उनके आत्मरक्षा के संवैधानिक अधिकार से उन्हें वंचित नहीं किया जा रहा है?
अब पंजाब से सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं। जिनमे कहा जा रहा है कि यदि सिख तीर्थयात्री उत्तराखंड नहीं आए तो वहां के लोगों की रोजरोटी का क्या होगा? हरियाणा के बाद इस तरह का कुतर्क देने वाले पंजाब को सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर तथ्यों से बिल्कुल अनजान लगते हैं। तुम्हें उत्तराखंड के लोगों की रोजरोटी की चिंता करने की जरूरत नहीं है। अराजकता फैलाने वालों के कारनामों को दरकिनार कर उत्तराखंड के लोगों पर आरोप लगाने वाले पक्षपाती और असलियत से अनविज्ञ लोग लगते हैं। उन्हें उत्तराखंड के लोगों के रोजगार की चिंता छोड़कर अराजकता फैलाने वाले चाहे कोई भी हो उनके कुकृत्य का विरोध करने का साहस दिखाना होगा तभी यात्रा में अराजकता रोकी जा सकती है।
उत्तराखंड की सरकार को चाहिए कि बात-बात पर तलवार निकालकर हमला करने वाले अराजक निहंगों से सबसे पहले तलवार लेकर यात्रा में आने से रोक लगाई जाए। सिख धर्म का सम्मान बरकरार रखते हुए उन्हें किरपाण लेकर चलने की इजाजत दी जा सकती है। कर्णप्रयाग, नगरासू और रुद्रप्रयाग में इतनी अराजकता फैलाने के बाद भी अपनी बात पर अड़े रहने वाले निहंगों को भी कानून व्यवस्था मानने के लिए तैयार नहीं किया गया, उनकी अराजकता ऐसे ही चलती रही तो इससे कुछ अहंकारियों के अतिरिक्त किसी को लाभ नहीं होगा।

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