• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

अपना घर, अपना घर होता है, संकटकाल में वही होता है शरणदाता

30/04/20
in उत्तराखंड, हेल्थ
Reading Time: 1min read
90
SHARES
112
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

शंकर सिंह भाटिया
अपना घर अपना घर होता है, कोरोनाकाल ने हम सबको इसकी याद दिलाई है। काम के लिए घर छोड़कर जाने वालों को इस कोरोना संकटकाल में अपने घर की सबसे अधिक याद आ रही है। लोग किसी भी सूरत में अपने घर जाना चाहते हैं। अपने घर पहुंचने के लिए कई लोगों ने तो 500, 700, 1000 किमी तक का पैदल सफर किया है। जिन लोगों को लाकडाउन को फोलो करने के लिए रास्ते में रोक दिया गया था, वे अक्सर भीड़ के रूप में एकत्र हो जाते हैं। वह एक ही रट लगाए हुए हैं कि उन्हें घर भेज दिया जाए। यही वजह है कि केंद्र सरकार को बीच लाकडाउन में ऐसे लोगों को घर भेजने के लिए राज्यों को कहना पड़ा है।
मैं उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का रहने वाला हूं। वहां से पलायन कर देहरादून आ गया हूं। लेकिन मैं अपने गांव से पूरी तरह कटा नहीं हूं। मैंने वहां पर अपने लिए कुछ ऐसी चीजें छोड़ी हैं, जिसके लिए मुझे अक्सर वहां जाना पड़ता है। इसलिए हमेशा अपनी मातृभूमि से जुड़ा हुआ हूं।
मैंने बहुत करीब से देखा है कि किस तरह हम लोग अपने घरों को बेरहमी के साथ छोड़कर पलायन कर जाते हैं। पहाड़ के गांवों में घर खंडहरों में तब्दील हो रहे हैं, गांव के गांव खाली हो रहे हैं। लेकिन कोरोना काल में अपने घरों को छोड़कर आने वालों को घर की याद आ रही है। लोग किसी तरह घर पहुंचना चाहते हैं।
जहां तक उत्तराखंड के दस पर्वतीय जिलों का सवाल है, राज्य के पलायन आयोग ने आंकड़े दिए हैं कि करीब 60 हजार लोग कोरोनाकाल में पहाड़ों की ओर लौटे हैं। इतना ही नहीं हजारों लोग रास्तों में अटके हुए हैं। वे किसी भी तरह घर पहुंचना चाहते हैं। पहाड़ों में अपने घर पहुंचने की इतनी बेसब्री इससे पहले कभी नहीं देखी गई। लेकिन कोरोना महामारी ने हम सभी को एहसास कराया है कि अपना घर अपना घर होता है। वही सबसे बड़ा शरणदाता है। मुझे अच्छी तरह याद है, जब हम पहाड़ों में अपनी गाय, बैल, बकरी आदि पालतू जानवरों को जंगल में चरने के लिए ले जाते हैं, तो शाम होते-होते उनके कदम अपने घरों की तरफ स्वतः ही बढ़ने लगते हैं। यदि जानवरों की यह हालत होती है तो हम तो मनुष्य हैं। ईश्वर ने हमको सबसे अधिक सोचने, विचारने वाला दिमाग दिया है। अपने निहित स्वार्थों के लिए हमने अपने घर के एहसास को बिसरा दिया था, लेकिन संकटकाल में घर की महत्ता बहुत अधिक बढ़ गई है।
यदि उत्तराखंड की बात करें तो पलायन आयोग के अनुसार दस पर्वतीय जिलों में 60 हजार लोग अपने घरों को लौटे हैं, हजारों लोग रास्तों में अटके हुए हैं। यदि रास्ता खुल जाए तो एक लाख से अधिक लोग अपने मूल घरों में लौट आएंगे। आयोग यह भी कहता है कि घर लौटने वालों में अधिकांश वे लोग हैं, जिनके परिवार का कोई न कोई पहाड़ में रहता है, वे लोग अक्सर साल में एक-दो बार पहाड़ आते रहे हैं। मतलब यह हुआ कि घर लौटने वालों में वे लोग नहीं हैं, जो अपने मूल घरों को पूरी तरह से छोड़कर परिवार सहित यहां से चले गए हैं। यह तय है कि ये जो लोग कोरोनाकल में घर लौटे हैं, अधिकांश लोग मैदानों के विभिन्न शहरों में होटलों, रेस्टोरेंटों आदि में काम कर रहे थे। लाकडाउन की वजह से ये सारे व्यवसाय बंद हो गए हैं, इसलिए उन्हें घर आना पड़ा है। जो लोग मैदानों में आकर संपन्न हो गए हैं, बड़े पदों पर काम कर रहे हैं, ऐसे लोगों का पुनः अपने मूल घरों की तरफ आना तो संभव नहीं दिखता, लेकिन बहुत सारे लोग जो पहाड़ से निकलकर भी संपन्न नहीं हो पाए हैं या फिर छोटी-मोटी नौकरी कर जीवनयापन कर रहे हैं, ऐसे लोगों के पहाड़ों की तरफ लौट आने की संभावनाएं बरकरार हैं।
इस संकटकाल ने यह तो बता ही दिया है कि बंजर और जनशून्य हो चुके गांवों को एक बार फिर से आबाद किया जा सकता है। संपन्न लोग न भी आएं तो बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिन्हें संकटकाल में अपनी मातृ की शरण में आने की विवशता हो सकती है। लाख कोशिशें करने के बाद भी उत्तराखंड की सरकारें ऐसा कर पाने में पूरी तरह से विफल साबित हो रही थीं। यह बात अलग है कि करीब साढ़े अड़तालीस लाख की आबादी वाले पहाड़ में एक लाख लोगों का आना बहुत मायने नहीं रखता है, लेकिन यह दिशा दिखाता है कि यदि इस संकटकाल में इन लोगों के लिए पहाड़ में रोजगार सृजित कर लिया गया तो यह उन गांवों तक पहुंचने की दिशा होगी, जो बंजर हो गए हैं। हमें आशा करनी चाहिए कि अपना घर अपना घर होता है, उसे बंजर नहीं छोड़ा जाता, यदि हमने उसे बंजर छोड़ दिया है तो संकटकाल ऐसे हालात पैदा करेगा कि उन्हें आबाद करना हमारी विवशता हो जाएगी।

Share36SendTweet23
Previous Post

लाकडाउन की वजह से जगह-जगह फंसे लोग पहुंच सकेंगे अपने घर

Next Post

सुविधाओं के अभाव में अकेला पड़ा जौनसार बावर का औकेला गांव

Related Posts

उत्तराखंड

श्री नंदा राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा के तहत नंदा देवी की तीनों डोलियां अपने चौथे अलग-अलग गांवों के पड़ावों पर पहुंची

September 8, 2026
3
उत्तराखंड

बालिकाओं के स्वास्थ्य एवं जागरूकता हेतु निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

September 8, 2026
3
उत्तराखंड

रतगांव की छात्रा कुमारी दिव्या का हिंदी ऑनर्स के लिए देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में चयन

September 8, 2026
2
उत्तराखंड

श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर श्रीबालाजी मन्दिर कोटद्वार में भव्य कार्यक्रम में उमड़ा भक्तों का शैलाब

September 8, 2026
8
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने किया ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ

September 7, 2026
19
उत्तराखंड

हर साल आपदा से बड़ा नुकसान होता है. प्रदेश के कई गांव आज भी विस्थापन की बाट जोह रहे हैं.

September 7, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67734 shares
    Share 27094 Tweet 16934
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45793 shares
    Share 18317 Tweet 11448
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38077 shares
    Share 15231 Tweet 9519
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37456 shares
    Share 14982 Tweet 9364
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37378 shares
    Share 14951 Tweet 9345

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

श्री नंदा राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा के तहत नंदा देवी की तीनों डोलियां अपने चौथे अलग-अलग गांवों के पड़ावों पर पहुंची

September 8, 2026

बालिकाओं के स्वास्थ्य एवं जागरूकता हेतु निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

September 8, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.