• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड में विलुप्त हो रहे फर्न

19/02/21
in उत्तराखंड, हेल्थ
Reading Time: 1min read
213
SHARES
266
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
प्राचीन समय से धरती पर मौजूद फर्न एक तरह से उपेक्षित ही रहा है। कुछ फर्न जहरीले भी होते हैं। उत्तराखंड में स्थानीय बोली में ल्यूंणा नाम से प्रचलति फर्न की खाने के लिहाज से अच्छी मांग है। अंजू कहती हैं कि फर्न की बहुत सी किस्में पत्थरों पर और लकड़ियों पर भी उग आती हैं। फर्नेटम में ऐसे पौधों को पत्थर और लकड़ी के साथ ही संरक्षित किया गया है। इसकी कुछ प्रजातियों पर विलुप्त होने का भी खतरा है। फर्नेटम में मौजूद एडिएनटम वेनुस्टम नाम के फर्न को हंसराज भी कहा जाता है। हिमालय में पाया जाने वाला ये पौधा पहाड़ों की ढलान पर पत्थरों के बीच उगता है। इसका इस्तेमाल सर्दी. जुकाम के साथ कई अन्य बीमारियों में किया जाता है।

उत्तराखंड वन विभाग में वन संरक्षक अनुसंधान कहते हैं कि फर्न की तमाम किस्मों को एक साथ एक जगह पर लाने से इन्हें संरक्षित किया जा सकेगा। इसके साथ ही यदि कोई शोधार्थी फर्न पर अध्ययन करना चाहें तो उनके लिए भी ये बेहद सुविधाजनक हो जाएगा। कई किस्में एक साथ मौजूद होने से शोधार्थियों के लिए फर्न के बारे में समझना और जानकारियां जुटाना आसान रहेगा। साथ ही पर्यटन के लिहाज से भी फर्नेटम लोगों का ध्यान आकर्षित करेगा।फर्न के पौधे वर्षा ऋतु के प्रिय हैं। बारिश के दिनों मेंए जब नमी ज्यादा होती है, वे खुद.ब.खुद पत्थरों के बीच से झांकते हुए या इधर.उधर अपनी सर्पीली बाहें पसार दिखाई देने लगते हैं। इन पर अधिक अध्ययन की जरूरत समझी जाती है ताकि जैव.विविधता में इनके महत्व को बेहतर तरीके से समझा जा सके। उत्तराखंड के पारिस्थितकीय तंत्र में तो इनकी खासी अहमियत है।

फर्न लगभग ढाई सौ लाख वर्ष पहले पृथ्वी पर वनस्पति संपदा का प्रमुख और प्रभावशाली हिस्सा रहा। इसकी 12 हज़ार से अधिक प्रजातियां हैं। जिसमें से करीब एक हजार हमारे देश में हैं। पांडे और पांडे 2002 ने अपनी शोध रिपोर्ट में लिखा कि फर्न और उससे जुड़ी 350 किस्में अकेले कुमाऊं में पायी जाती हैं। दीक्षित और कुमार 2001 ने अपने शोध में पाया कि फर्न की 18 प्रजातियां ऐसी हैं जो सिर्फ उत्तराखंड में ही पायी जाती हैं। ये सभी शोषण, अपने प्राकृतिक वास खोने और मौसमी वजहों से लुप्त होने की कगार पर आ पहुंची हैं।

उत्तराखंड वन विभाग की रिसर्च विंग ने वर्ष 2017 में फर्न की बिखरी हुई प्रजातियों को एक जगह पर लाने के लिए विशेष प्रोजेक्ट शुरू किया। रानीखेत में कालीगढ़ रिजर्व ब्लॉक में करीब एक हेक्टेअर क्षेत्र में फर्न की तमाम किस्मों को संरक्षित किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2022 तक पूरा किया जाना है। फर्न की 18 प्रजातियां ऐसी हैं जो सिर्फ उत्तराखंड में ही पायी जाती हैं। ये सभी शोषण, अपने प्राकृतिक वास खोने और मौसमी वजहों से लुप्त होने की कगार पर आ पहुंची हैं। पारिस्थितिकी के संरक्षण में अहम भूमिका निभाने वाली घास प्रजातियों को महफूज रखने की दिशा में उत्तराखंड वन महकमे ने पहली बार बड़ी पहल की है। इसके तहत राज्य में मिलने वाली घास की 185 प्रजातियों का संरक्षण किया जाना हैए ताकि ये भविष्य के लिए सुरक्षित रह सकें। इस कड़ी में महकमे की अनुसंधान शाखा ने रानीखेत के द्वारसौं पौधालय में प्रथम चरण में फर्न की 25 प्रजातियों का रोपण किया है, जो वहां ठीक से फलीभूत हुई हैं।

वन संरक्षक अनुसंधान वृत्त बताते कि इनमें उच्च हिमालय से लेकर तराई के मैदानी क्षेत्र तक पाई जाने वाली घास प्रजातियां शामिल हैं। धीरे.धीरे इस मुहिम को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी फैलाया जाएगा। जैव विविधता के लिए मशहूर 71.05 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड में वन महकमा पेड़.पौधों के साथ ही झाड़ी प्रजातियों के संरक्षण को तो कदम उठाता आया है, मगर पहली मर्तबा उसका ध्यान फर्न प्रजातियों के संरक्षण की तरफ गया। वन संरक्षक अनुसंधान वृत्त के अनुसार फर्न को अभी तक उपेक्षित समझा गया थाए जबकि पारिस्थितिकी के संरक्षण में इसकी सबसे अहम भूमिका है। फर्न का संबंध मनुष्य के संस्कारों से लेकर पर्यावरण के संरक्षण एवं संतुलन के साथ ही भूमि व मिट्टी को क्षरण से बचाने और भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ाने तक है। यहां पाई जाने वाली फर्न की सभी प्रजातियां सुरक्षित रहेंए ताकि भविष्य में ये किसी क्षेत्र से विलुप्त भी हो गई तो इन्हें फिर से वहां लौटाया जा सके। पर्यावरण संतुलन के लिए फर्न भी जरूरी है। एक शोध में सामने आया कि फर्न जंगलों से गायब हो रहा है जबकि मिट्टी के लिए फायदेमंद है। इसके दवा, सजावटी सामान में भी उपयोग होता है।

Share85SendTweet53
Previous Post

वाह्य सहायतित योजनाओं में अवमुक्त राशि का शतप्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करेंः मुख्यमंत्री

Next Post

कुलपुरोहित ने संगम में 7 फरवरी को होने वाला कार्यक्रम न टाला होता तो….

Related Posts

उत्तराखंड

प्रदेश में कांग्रेस की मजबूती का आधार है समर्पित कार्यकर्ता: उनियाल

May 2, 2026
6
उत्तराखंड

दो दिवसीय लाटू देवता जागृति पर्यटन सांस्कृतिक महोत्सव का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ समापन

May 2, 2026
4
उत्तराखंड

बैसाख पूर्णमासी के मौके पर वांण स्थित श्री नंदादेवी के मुंहबोले भाई लाटू देवता के विधिवत कपाटों उद्घाटन के आयोजन दो दिवसीय लाटू देवता जागृति पर्यटन सांस्कृतिक महोत्सव का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ समापन हो गया हैं। शुक्रवार को कपाटों उद्घाटन के बाद वांण बस स्टेशन में आयोजित दो दिवसीय महोत्सव की प्रथम रात्रिकालीन सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन चमोली जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट ने बतौर मुख्य अतिथि करते हुए आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि निश्चित ही महोत्सव के दौरान प्रस्तुत किए गए लोक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लाभ भावी पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति को जानने एवं समझने में अहम भूमिका निभाएंगी, अध्यक्ष ने महोत्सव के विकास के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।इस मौके पर भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री बलवीर घुनियाल,देवाल के प्रमुख तेजपाल रावत, जिला पंचायत सदस्य उर्मिला बिष्ट, साक्षी देवी,गुवीला के नरेंद्र बिष्ट व फल्दियागांव के खिलाप बिष्ट दोनों ही देहरादून में सफल व्यवसाई के अलावा मंदोली के पूर्व प्रधान आनंद बिष्ट व भाजपा मंडल महामंत्री दर्शन दानू बतौर विशिष्ट अतिथियों ने भी आयोजन की सराहना करते हुए आयोजन को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग देने का आश्वासन दिया। इस मौके पर प्रसिद्ध गायककार मीणाल रतूड़ी के द्वारा प्रस्तुत हे नंदा सुनंदा श्रोण, भादों की जात…, देवराज आगरी की प्रस्तुति चार दिन चौमास लगी रो, फिर लगल हिवाल…, विवेक नौटियाल की प्रस्तुति दौय लगी ऊंचा कैलाश…, कुंदन सिंह की प्रस्तुति लाटू देवता तुम दैणा होई जाय आदि गीतों के गायन पर उपस्थित जनसमूह जमकर थिरका। महोत्सव के दूसरे दिन भी जमकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही समापन मौके पर आयोजकों ने अगले वर्ष महोत्सव को और अधिक भव्य रूप से आयोजित करने का संकल्प लिया। इस मौके पर मेला कमेटी के अध्यक्ष कृष्णा बिष्ट पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं मेला कमेटी के संरक्षक कृष्णा बिष्ट, वांण की ग्राम प्रधान नंदूली देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य हेमा देवी,उप प्रधान बीना देवी, महिला मंगल दल अध्यक्ष नंदी देवी, सीमा पहाड़न आदि ने अतिथियों का स्वागत किया।

May 2, 2026
3
उत्तराखंड

केदारनाथ–लिंचोली मार्ग पर कठिन हालात में श्रद्धालुओं के लिए जीवनरक्षक बनी एसडीआरएफ

May 2, 2026
5
उत्तराखंड

आपरेशन घर वापसी-दो नाबालिगों को हरिद्वार से बरामद कर घरवालों को सौंपा

May 2, 2026
3
उत्तराखंड

सीएम घोषणाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिये निर्देश

May 2, 2026
5

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67682 shares
    Share 27073 Tweet 16921
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45776 shares
    Share 18310 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38051 shares
    Share 15220 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37442 shares
    Share 14977 Tweet 9361
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37330 shares
    Share 14932 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

प्रदेश में कांग्रेस की मजबूती का आधार है समर्पित कार्यकर्ता: उनियाल

May 2, 2026

दो दिवसीय लाटू देवता जागृति पर्यटन सांस्कृतिक महोत्सव का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ समापन

May 2, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.