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गोल्ज्यू महाराज न्याय के देवता पर बनेगी फिल्म

30/03/25
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है. यहां कण-कण में देवी-देवताओं का वास माना जाता है. हिमालय की गोद में बसे इस सबसे पावन क्षेत्र को मनीषियों की कर्मभूमि और तपस्थली कहा जाता है. उत्तराखंड में देवी-देवताओं के कई चमत्कारिक मंदिरों को लेकर लोगों में बहुत आस्था भी है. इन मंदिरों की प्रसिद्धि भारत ही नहीं बल्कि विदेशों तक फैली हुई है.इन्हीं में से एक मंदिर नैनीताल जिले के घोड़ाखाल का गोल्ज्यू देवता का मंदिर है. गोल्ज्यू देवता को स्थानीय मान्यताओं में न्याय का देवता कहा जाता है. मान्यता है कि जो भी भक्त इस मंदिर में आकर न्याय के देवता भगवान गोल्ज्यू से जो भी गुहार लगाता है, उसकी पुकार गोल्ज्यू सुनते हैं. इसके लिए भक्त चिट्ठी लिखकर अर्जी भी लगाते हैं. मनोकामना पूर्ण होने पर देवता के मंदिर में घंटी और चुनरी चढ़ाते हैं. उत्तराखंड में गोल्ज्यू देवता को ‘गोल्ज्यू महाराज’ और न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है.उत्तराखंड में गोल्ज्यू महाराज (गोलू देवता) को न्याय का देवता माना जाता है. गोल्ज्यू भगवान को कुमाऊं का आराध्य देव भी कहा जाता है. अब गोलू देवता पर फिल्म बनने जा रही है, जिसका निर्माण हिमाद्री प्रोडक्शन द्वारा किया जाएगा. फिल्म का नाम बाला गोरिया होगा. फिल्म की कास्ट के लिए उत्तराखंड की अलग-अलग जगहों पर ऑडिशन चल रहे हैं. फिल्म निर्माता मनोज चंदोला ने कहा कि यह फिल्म कुमाऊंनी बोली पर आधारित है. फिल्म बनाने में करीब तीन करोड रुपये की लागत आएगी. फिल्म की शूटिंग पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और बागेश्वर में होगी. फिल्म की शूटिंग 18 मार्च से शुरू होगी.उन्होंने कहा कि वह पिछले 2-3 साल से गोल्ज्यू भगवान पर फिल्म बनाने के बारे में सोच रहे थे. अब समय आ गया है. उन्होंने इसपर काम करना शुरू कर दिया है. पहाड़ों की अलग-अलग जगहों पर जाकर वह कलाकारों का ऑडिशन ले रहे हैं. उनका मानना है कि पहाड़ का सब कुछ आज दांव पर है. जल, जंगल, जमीन, कुमाऊंनी भाषा और पहाड़ों के देवता भी दांव पर हैं. आज हम सिर्फ भगवान के नाम से डरते हैं. शायद हम इस फिल्म के जरिए अपने पहाड़ों को बचाने और यहां की बोली को जीवित रखने का काम कर सकते हैं. उनका मकसद है कि पहाड़ के लोग अपनी संस्कृति और अपने ईष्ट देवता के बारे में और करीब से जानें, साथ ही गौरवान्वित महसूस करें.फिल्म निर्माता मनोज चंदोला ने आगे कहा कि बाला गोरिया फिल्म की शूटिंग कुमाऊं के पहाड़ी क्षेत्रों में की जाएगी. पिथौरागढ़, बागेश्वर और अल्मोड़ा में इसे शूट किया जाएगा. वहीं ऑडिशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब वह फिल्म के ऑडिशन लेने के लिए जा रहे हैं, तो हर उम्र के लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. बागेश्वर और अल्मोड़ा के युवाओं में काफी जोश देखने को मिला. जब कलाकारों का ऑडिशन लिया जा रहा था, तो मानो ऐसा लग रहा था कि गोल्ज्यू महाराज का आशीर्वाद उन्हें साक्षात मिल रहा है. कुमाऊं के लोक देवता गोलज्यू के जीवन पर आधारित कुमाउनी फिल्म ‘बाला गोरिया’ के शूटिंग स्थल लीती में आज उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने फिल्म के शूट का क्लैप देकर शुभारंभ किया। उन्होंने इस फिल्म की सफलता के लिए ‘हिमाद्रि प्रोडक्शंस’ को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की। देशभर में कई ऐसे मंदिर है जो अपने चमत्कारों और रहस्यों के लिए दुनियाभर में जानें जाते हैं और ये पवित्र स्थल भक्तों की आस्था और विश्वास का केंद्र भी मानें जाते हैं ऐसे में आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा उत्तराखंड में मौजूद एक ऐसे कुल देवता के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें लेकर यह मान्यता है कि इस देवता के मंदिर में चिट्ठी लिखने से साधक की सारी इच्छा पूरी हो जाती है और न्याय भी मिलता हैलेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। *लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*

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