डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
ऋषिकेश में बजरंग सेतु के निर्माण के साथ एक नए युग की शुरुआत हो रही है. यह एक आधुनिक सस्पेंशन ब्रिज है, जो इंजीनियरिंग के साथ-साथ आध्यात्मिकता का भी उत्तराखंड की धर्मनगरी और पर्यटन स्थल ऋषिकेश में करीब 69 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया नया हनुमान झूला उद्घाटन से पहले ही एक बार फिर चर्चा में आ गया है. पुल के कई ग्लास पैनलों में दूसरी बार छोटे-छोटे क्रैक्स दिखाई देने के बाद लोगों के बीच इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं. खास बात यह है कि अभी तक इस पुल का आधिकारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ है, लेकिन उससे पहले ही लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है.यह पहला मौका नहीं है जब पुल के कांच में दरारें दिखाई दी हों. इससे पहले एक पूरे ग्लास टाइल में बड़ा क्रैक आने की घटना सामने आई थी, जिसके बाद उसकी मरम्मत करवाई गई थी. लेकिन अब दोबारा कई जगहों पर छोटे-छोटे क्रैक्स नजर आने से लोग हैरान हैं. लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अगर उद्घाटन से पहले ही पुल की ऐसी स्थिति है, तो भविष्य में यहां आने वाले लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी. हनुमान झूला को आधुनिक डिजाइन और आकर्षक संरचना के साथ तैयार किया गया है. पुल में लगाए गए ग्लास पैनल लोगों के लिए खास आकर्षण माने जा रहे हैं, ताकि पर्यटक यहां से गंगा और आसपास के खूबसूरत नजारों का अनुभव कर सकें. लेकिन अब इन्हीं कांचों में दरारें आने से लोगों का भरोसा कमजोर होता नजर आ रहा है. पुल को देखने पहुंचे पर्यटकों ने भी इस पर चिंता जाहिर की. बातचीत के दौरान दिल्ली से आए धीरज ने कहा, ‘जब हमने करीब से देखा तो कई ग्लास पर छोटे-छोटे क्रैक्स दिखाई दिए. पहली नजर में ही डर महसूस हुआ. अगर आगे चलकर यहां ज्यादा भीड़ होगी तो यह काफी रिस्की साबित हो सकता है. प्रशासन को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए.’ ग्लास ब्रिज का नाम सुनकर काफी उत्साह था, लेकिन जब कांच टूटा हुआ दिखाई दिया तो भरोसा कम हो गया. लोग यहां घूमने और अनुभव लेने आते हैं, लेकिन अगर सुरक्षा को लेकर ही डर बना रहे तो पर्यटक कैसे सहज महसूस करेंगे.’ उन्होंने आगे कहा कि अगर समय रहते समस्या का सही समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में यह बड़ा खतरा बन सकता है. खासकर पर्यटन सीजन में ऋषिकेश में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. ऐसे में पुल की मजबूती और सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए. हालांकि, समय और लगातार बढ़ती भीड़ के साथ, संरचना को लेकर चिंताएं पैदा हुईं. इंजीनियरिंग अध्ययनों में पुल के ढांचे में कमजोरियां सामने आईं, सुविधा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन गया है।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











