डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में फर्जी दस्तावेजों से स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में एडमिशन लेने के मामले में नया खुलासा हुआ है. ये मामला अब और बड़ा होता दिखाई दे रहा है. क्योंकि इस मामले का खुलासा करने वाले एक्टिविस्ट प्रदीप बहुगुणा ने 370 संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंचाई हैं. साथ ही उन्होंने इस नई सूची के आधार पर जांच की मांग भी की हैं.दीप बहुगुणा का दावा है कि सूची में शामिल अभ्यर्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड, निवास और अन्य दस्तावेजों की जांच किए जाने की जरूरत है. आरोप है कि इनमें कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा और NEET की परीक्षा दूसरे राज्यों से की, लेकिन एमबीबीएस दाखिले के लिए उत्तराखंड के स्थायी निवास और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित से जुड़े प्रमाण-पत्र हासिल किए. दरअसल, यह पूरा मामला तब सामने आया जब स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्रों की जांच में गंभीर विसंगतियां मिलीं. देहरादून जिला प्रशासन की जांच के बाद चार अभ्यर्थियों के स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्र निरस्त किए गए और उनके एमबीबीएस दाखिले भी रद्द कर दिए गए. जांच में दिए गए पतों का सत्यापन नहीं होने और दस्तावेजों में विसंगतियां सामने आने की बात कही गई.मामला यहीं नहीं रुका. फर्जी प्रमाण-पत्र हासिल करने के आरोप में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ देहरादून के दो थानों में मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए दस्तावेज कहां से तैयार हुए और इसमें अन्य लोगों की भूमिका है या नहीं. यह अभी साबित नहीं हुआ है. इसलिए इन नामों को फिलहाल संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची के तौर पर देखा जा रहा है. अब प्रशासनिक जांच के बाद ही यह साफ होगा कि इनमें कितने मामलों में वास्तव में दस्तावेजों में गड़बड़ी है. चिकित्सा शिक्षा विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि काउंसलिंग के दौरान किसी अभ्यर्थी के दस्तावेज संदिग्ध पाए जाते हैं या कोई शिकायत मिलती है तो तत्काल संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जाए. उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से भी पहले कहा गया है कि काउंसलिंग के दौरान संदिग्ध प्रमाण-पत्र मिलने पर संबंधित जिला अधिकारियों को जानकारी भेजी गई और प्रमाण-पत्र निरस्त किए गए. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 370 अभ्यर्थियों की इस सूची में शामिल नामों की जांच किस स्तर पर होती है और क्या जांच पूरी होने से पहले इन अभ्यर्थियों को आरक्षण या अन्य सरकारी लाभ का फायदा मिलता है. सूची सौंपने वाले प्रदीप बहुगुणा ने मांग की है कि सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए और यदि किसी मामले में फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.इस मामले में प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ पहले सामने आए चार दाखिलों तक सीमित नहीं रह गई है. अब 370 संदिग्ध नामों की सूची सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाने की मांग उठ रही है. ऐसे में आने वाली एमबीबीएस काउंसलिंग से पहले इन दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी. वहीं पुलिस और प्रशासन की मौजूदा जांच से यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि पहले सामने आए फर्जी प्रमाण-पत्रों के पीछे केवल व्यक्तिगत स्तर पर गड़बड़ी थी या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे. उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से फर्जी प्रमाण पत्रों का मामला बेहद ज्यादा सुर्खियों में है. स्वतंत्रता सेनानियों के प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया. इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया. जिसके बाद इस मामले में एक के बाद एक कार्रवाई हो रही है.मामले का खुलासा होने के तीसरे दिन अब जिला प्रशासन में एक तरफ स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े प्रमाण पत्रों को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया है. तहसीलदार को भी इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी हो गए हैं. खास बात यह है कि प्रशासन की टीम लगातार दिए गए पतो पर भी पहुंच रही है, लेकिन संबंधित अभ्यर्थी जिला प्रशासन के अधिकारियों को यहां नहीं मिल रहे हैं. हालांकि पहले ही जिला प्रशासन ने इन अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों के संदिग्ध होने की बात कहते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र भेज दिया था, लेकिन अब इनके प्रमाण पत्र को भी निरस्त कर दिया गया है. उधर यह माना जा रहा है कि मुकदमा दर्ज होते ही और स्थाई निवास प्रमाण पत्र के निरस्त होने के साथ ही जिला प्रशासन के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही भी संभव है. बड़ी बात यह है कि इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह अभ्यर्थी MBBS की सीटों पर प्रवेश लेने में कामयाब रहे, हालांकि स्वतंत्रता सेनानी परिवार से ताल्लुक़ रखने वाले प्रदीप बहुगुणा ने इनकी पहचान कर इनके खिलाफ शिकायत की, जिसके बाद इस पूरे प्रकरण का खुलासा हो सका.क्या था मामला: उत्तराखंड में MBBS एडमिशन फर्जी प्रमाण पत्र मामले का खुलासा पद्मविभूषण पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा के बेटे प्रदीप बहुगुणा ने किया. प्रदीप बहुगुणा ने इस मामले में शुरुआती तफ्तीश अपने स्तर पर की. इसके बाद मामले में गड़बड़ी होने पर उन्होंने जिलाधिकारी, चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखा. जिसमें MBBS एडमिशन में फर्जी प्रमाण पत्र की बात कही गई.उन्होंने स्टेट कोटा फ्रीडम फाइटर के तहत एमबीबीएस में सीट पाने के लिए 5 अभ्यर्थियों के स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र और स्थायी निवास प्रमाण पत्र की जांच करवाने की मांग की. उन्होंने . पत्र में पांचों अभ्यर्थियों के नाम और उनके प्रमाण पत्रों से जुड़ी जानकारियां भी साझा की. जिसके बाद जिला प्रशासन को फर्जीवाड़ा होने की जानकारी मिली थी. अब स मामले में एक के बाद एक एक्शन हो रहे हैं. इस मामले में प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ पहले सामने आए चार दाखिलों तक सीमित नहीं रह गई है. अब 370 संदिग्ध नामों की सूची सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाने की मांग उठ रही है. ऐसे में आने वाली एमबीबीएस काउंसलिंग से पहले इन दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी. वहीं पुलिस और प्रशासन की मौजूदा जांच से यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि पहले सामने आए फर्जी प्रमाण-पत्रों के पीछे केवल व्यक्तिगत स्तर पर गड़बड़ी थी या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 370 अभ्यर्थियों की इस सूची में शामिल नामों की जांच किस स्तर पर होती है और क्या जांच पूरी होने से पहले इन अभ्यर्थियों को आरक्षण या अन्य सरकारी लाभ का फायदा मिलता है. सूची सौंपने वाले प्रदीप बहुगुणा ने मांग की है कि सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए और यदि किसी मामले में फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.इस मामले में प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ पहले सामने आए चार दाखिलों तक सीमित नहीं रह गई है. अब 370 संदिग्ध नामों की सूची सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाने की मांग उठ रही है. ऐसे में आने वाली एमबीबीएस काउंसलिंग से पहले इन दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी. वहीं पुलिस और प्रशासन की मौजूदा जांच से यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि पहले सामने आए फर्जी प्रमाण-पत्रों के पीछे केवल व्यक्तिगत स्तर पर गड़बड़ी थी या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे. उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से फर्जी प्रमाण पत्रों का मामला बेहद ज्यादा सुर्खियों में है. स्वतंत्रता सेनानियों के प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया. इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया. जिसके बाद इस मामले में एक के बाद एक कार्रवाई हो रही है.मामले का खुलासा होने के तीसरे दिन अब जिला प्रशासन में एक तरफ स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े प्रमाण पत्रों को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया है. तहसीलदार को भी इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी हो गए हैं. खास बात यह है कि प्रशासन की टीम लगातार दिए गए पतो पर भी पहुंच रही है, लेकिन संबंधित अभ्यर्थी जिला प्रशासन के अधिकारियों को यहां नहीं मिल रहे हैं. हालांकि पहले ही जिला प्रशासन ने इन अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों के संदिग्ध होने की बात कहते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र भेज दिया था, लेकिन अब इनके प्रमाण पत्र को भी निरस्त कर दिया गया है. उधर यह माना जा रहा है कि मुकदमा दर्ज होते ही और स्थाई निवास प्रमाण पत्र के निरस्त होने के साथ ही जिला प्रशासन के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही भी संभव है. बड़ी बात यह है कि इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह अभ्यर्थी MBBS की सीटों पर प्रवेश लेने में कामयाब रहे, हालांकि स्वतंत्रता सेनानी परिवार से ताल्लुक़ रखने वाले प्रदीप बहुगुणा ने इनकी पहचान कर इनके खिलाफ शिकायत की, जिसके बाद इस पूरे प्रकरण का खुलासा हो सका.क्या था मामला: उत्तराखंड में MBBS एडमिशन फर्जी प्रमाण पत्र मामले का खुलासा पद्मविभूषण पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा के बेटे प्रदीप बहुगुणा ने किया. प्रदीप बहुगुणा ने इस मामले में शुरुआती तफ्तीश अपने स्तर पर की. इसके बाद मामले में गड़बड़ी होने पर उन्होंने जिलाधिकारी, चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखा. जिसमें MBBS एडमिशन में फर्जी प्रमाण पत्र की बात कही गई.उन्होंने स्टेट कोटा फ्रीडम फाइटर के तहत एमबीबीएस में सीट पाने के लिए 5 अभ्यर्थियों के स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र और स्थायी निवास प्रमाण पत्र की जांच करवाने की मांग की. उन्होंने . पत्र में पांचों अभ्यर्थियों के नाम और उनके प्रमाण पत्रों से जुड़ी जानकारियां भी साझा की. जिसके बाद जिला प्रशासन को फर्जीवाड़ा होने की जानकारी मिली थी. अब स मामले में एक के बाद एक एक्शन हो रहे हैं. इस मामले में प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ पहले सामने आए चार दाखिलों तक सीमित नहीं रह गई है. अब 370 संदिग्ध नामों की सूची सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाने की मांग उठ रही है. ऐसे में आने वाली एमबीबीएस काउंसलिंग से पहले इन दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी. वहीं पुलिस और प्रशासन की मौजूदा जांच से यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि पहले सामने आए फर्जी प्रमाण-पत्रों के पीछे केवल व्यक्तिगत स्तर पर गड़बड़ी थी या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 370 अभ्यर्थियों की इस सूची में शामिल नामों की जांच किस स्तर पर होती है और क्या जांच पूरी होने से पहले इन अभ्यर्थियों को आरक्षण या अन्य सरकारी लाभ का फायदा मिलता है. सूची सौंपने ने मांग की है कि सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए और यदि किसी मामले में फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.इस मामले में प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ पहले सामने आए चार दाखिलों तक सीमित नहीं रह गई है. अब 370 संदिग्ध नामों की सूची सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाने की मांग उठ रही है. ऐसे में आने वाली एमबीबीएस काउंसलिंग से पहले इन दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी. वहीं पुलिस और प्रशासन की मौजूदा जांच से यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि पहले सामने आए फर्जी प्रमाण-पत्रों के पीछे केवल व्यक्तिगत स्तर पर गड़बड़ी थी या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे.।.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











