• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

स्वतंत्रता सेनानी फर्जी सर्टिफिकेट केस में बड़ा खुलासा

19/09/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
13
SHARES
16
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

 

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में फर्जी दस्तावेजों से स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में एडमिशन लेने के मामले में नया खुलासा हुआ है. ये मामला अब और बड़ा होता दिखाई दे रहा है. क्योंकि इस मामले का खुलासा करने वाले एक्टिविस्ट प्रदीप बहुगुणा ने 370 संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंचाई हैं. साथ ही उन्होंने इस नई सूची के आधार पर जांच की मांग भी की हैं.दीप बहुगुणा का दावा है कि सूची में शामिल अभ्यर्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड, निवास और अन्य दस्तावेजों की जांच किए जाने की जरूरत है. आरोप है कि इनमें कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा और NEET की परीक्षा दूसरे राज्यों से की, लेकिन एमबीबीएस दाखिले के लिए उत्तराखंड के स्थायी निवास और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित से जुड़े प्रमाण-पत्र हासिल किए. दरअसल, यह पूरा मामला तब सामने आया जब स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्रों की जांच में गंभीर विसंगतियां मिलीं. देहरादून जिला प्रशासन की जांच के बाद चार अभ्यर्थियों के स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्र निरस्त किए गए और उनके एमबीबीएस दाखिले भी रद्द कर दिए गए. जांच में दिए गए पतों का सत्यापन नहीं होने और दस्तावेजों में विसंगतियां सामने आने की बात कही गई.मामला यहीं नहीं रुका. फर्जी प्रमाण-पत्र हासिल करने के आरोप में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ देहरादून के दो थानों में मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए दस्तावेज कहां से तैयार हुए और इसमें अन्य लोगों की भूमिका है या नहीं. यह अभी साबित नहीं हुआ है. इसलिए इन नामों को फिलहाल संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची के तौर पर देखा जा रहा है. अब प्रशासनिक जांच के बाद ही यह साफ होगा कि इनमें कितने मामलों में वास्तव में दस्तावेजों में गड़बड़ी है. चिकित्सा शिक्षा विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि काउंसलिंग के दौरान किसी अभ्यर्थी के दस्तावेज संदिग्ध पाए जाते हैं या कोई शिकायत मिलती है तो तत्काल संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जाए. उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से भी पहले कहा गया है कि काउंसलिंग के दौरान संदिग्ध प्रमाण-पत्र मिलने पर संबंधित जिला अधिकारियों को जानकारी भेजी गई और प्रमाण-पत्र निरस्त किए गए. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 370 अभ्यर्थियों की इस सूची में शामिल नामों की जांच किस स्तर पर होती है और क्या जांच पूरी होने से पहले इन अभ्यर्थियों को आरक्षण या अन्य सरकारी लाभ का फायदा मिलता है. सूची सौंपने वाले प्रदीप बहुगुणा ने मांग की है कि सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए और यदि किसी मामले में फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.इस मामले में प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ पहले सामने आए चार दाखिलों तक सीमित नहीं रह गई है. अब 370 संदिग्ध नामों की सूची सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाने की मांग उठ रही है. ऐसे में आने वाली एमबीबीएस काउंसलिंग से पहले इन दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी. वहीं पुलिस और प्रशासन की मौजूदा जांच से यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि पहले सामने आए फर्जी प्रमाण-पत्रों के पीछे केवल व्यक्तिगत स्तर पर गड़बड़ी थी या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे. उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से फर्जी प्रमाण पत्रों का मामला बेहद ज्यादा सुर्खियों में है. स्वतंत्रता सेनानियों के प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया. इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया. जिसके बाद इस मामले में एक के बाद एक कार्रवाई हो रही है.मामले का खुलासा होने के तीसरे दिन अब जिला प्रशासन में एक तरफ स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े प्रमाण पत्रों को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया है. तहसीलदार को भी इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी हो गए हैं. खास बात यह है कि प्रशासन की टीम लगातार दिए गए पतो पर भी पहुंच रही है, लेकिन संबंधित अभ्यर्थी जिला प्रशासन के अधिकारियों को यहां नहीं मिल रहे हैं. हालांकि पहले ही जिला प्रशासन ने इन अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों के संदिग्ध होने की बात कहते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र भेज दिया था, लेकिन अब इनके प्रमाण पत्र को भी निरस्त कर दिया गया है. उधर यह माना जा रहा है कि मुकदमा दर्ज होते ही और स्थाई निवास प्रमाण पत्र के निरस्त होने के साथ ही जिला प्रशासन के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही भी संभव है. बड़ी बात यह है कि इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह अभ्यर्थी MBBS की सीटों पर प्रवेश लेने में कामयाब रहे, हालांकि स्वतंत्रता सेनानी परिवार से ताल्लुक़ रखने वाले प्रदीप बहुगुणा ने इनकी पहचान कर इनके खिलाफ शिकायत की, जिसके बाद इस पूरे प्रकरण का खुलासा हो सका.क्या था मामला: उत्तराखंड में MBBS एडमिशन फर्जी प्रमाण पत्र मामले का खुलासा पद्मविभूषण पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा के बेटे प्रदीप बहुगुणा ने किया. प्रदीप बहुगुणा ने इस मामले में शुरुआती तफ्तीश अपने स्तर पर की. इसके बाद मामले में गड़बड़ी होने पर उन्होंने जिलाधिकारी, चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखा. जिसमें MBBS एडमिशन में फर्जी प्रमाण पत्र की बात कही गई.उन्होंने स्टेट कोटा फ्रीडम फाइटर के तहत एमबीबीएस में सीट पाने के लिए 5 अभ्यर्थियों के स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र और स्थायी निवास प्रमाण पत्र की जांच करवाने की मांग की. उन्होंने . पत्र में पांचों अभ्यर्थियों के नाम और उनके प्रमाण पत्रों से जुड़ी जानकारियां भी साझा की. जिसके बाद जिला प्रशासन को फर्जीवाड़ा होने की जानकारी मिली थी. अब स मामले में एक के बाद एक एक्शन हो रहे हैं. इस मामले में प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ पहले सामने आए चार दाखिलों तक सीमित नहीं रह गई है. अब 370 संदिग्ध नामों की सूची सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाने की मांग उठ रही है. ऐसे में आने वाली एमबीबीएस काउंसलिंग से पहले इन दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी. वहीं पुलिस और प्रशासन की मौजूदा जांच से यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि पहले सामने आए फर्जी प्रमाण-पत्रों के पीछे केवल व्यक्तिगत स्तर पर गड़बड़ी थी या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 370 अभ्यर्थियों की इस सूची में शामिल नामों की जांच किस स्तर पर होती है और क्या जांच पूरी होने से पहले इन अभ्यर्थियों को आरक्षण या अन्य सरकारी लाभ का फायदा मिलता है. सूची सौंपने वाले प्रदीप बहुगुणा ने मांग की है कि सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए और यदि किसी मामले में फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.इस मामले में प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ पहले सामने आए चार दाखिलों तक सीमित नहीं रह गई है. अब 370 संदिग्ध नामों की सूची सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाने की मांग उठ रही है. ऐसे में आने वाली एमबीबीएस काउंसलिंग से पहले इन दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी. वहीं पुलिस और प्रशासन की मौजूदा जांच से यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि पहले सामने आए फर्जी प्रमाण-पत्रों के पीछे केवल व्यक्तिगत स्तर पर गड़बड़ी थी या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे. उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से फर्जी प्रमाण पत्रों का मामला बेहद ज्यादा सुर्खियों में है. स्वतंत्रता सेनानियों के प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया. इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया. जिसके बाद इस मामले में एक के बाद एक कार्रवाई हो रही है.मामले का खुलासा होने के तीसरे दिन अब जिला प्रशासन में एक तरफ स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े प्रमाण पत्रों को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया है. तहसीलदार को भी इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी हो गए हैं. खास बात यह है कि प्रशासन की टीम लगातार दिए गए पतो पर भी पहुंच रही है, लेकिन संबंधित अभ्यर्थी जिला प्रशासन के अधिकारियों को यहां नहीं मिल रहे हैं. हालांकि पहले ही जिला प्रशासन ने इन अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों के संदिग्ध होने की बात कहते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र भेज दिया था, लेकिन अब इनके प्रमाण पत्र को भी निरस्त कर दिया गया है. उधर यह माना जा रहा है कि मुकदमा दर्ज होते ही और स्थाई निवास प्रमाण पत्र के निरस्त होने के साथ ही जिला प्रशासन के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही भी संभव है. बड़ी बात यह है कि इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह अभ्यर्थी MBBS की सीटों पर प्रवेश लेने में कामयाब रहे, हालांकि स्वतंत्रता सेनानी परिवार से ताल्लुक़ रखने वाले प्रदीप बहुगुणा ने इनकी पहचान कर इनके खिलाफ शिकायत की, जिसके बाद इस पूरे प्रकरण का खुलासा हो सका.क्या था मामला: उत्तराखंड में MBBS एडमिशन फर्जी प्रमाण पत्र मामले का खुलासा पद्मविभूषण पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा के बेटे प्रदीप बहुगुणा ने किया. प्रदीप बहुगुणा ने इस मामले में शुरुआती तफ्तीश अपने स्तर पर की. इसके बाद मामले में गड़बड़ी होने पर उन्होंने जिलाधिकारी, चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखा. जिसमें MBBS एडमिशन में फर्जी प्रमाण पत्र की बात कही गई.उन्होंने स्टेट कोटा फ्रीडम फाइटर के तहत एमबीबीएस में सीट पाने के लिए 5 अभ्यर्थियों के स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र और स्थायी निवास प्रमाण पत्र की जांच करवाने की मांग की. उन्होंने . पत्र में पांचों अभ्यर्थियों के नाम और उनके प्रमाण पत्रों से जुड़ी जानकारियां भी साझा की. जिसके बाद जिला प्रशासन को फर्जीवाड़ा होने की जानकारी मिली थी. अब स मामले में एक के बाद एक एक्शन हो रहे हैं. इस मामले में प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ पहले सामने आए चार दाखिलों तक सीमित नहीं रह गई है. अब 370 संदिग्ध नामों की सूची सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाने की मांग उठ रही है. ऐसे में आने वाली एमबीबीएस काउंसलिंग से पहले इन दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी. वहीं पुलिस और प्रशासन की मौजूदा जांच से यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि पहले सामने आए फर्जी प्रमाण-पत्रों के पीछे केवल व्यक्तिगत स्तर पर गड़बड़ी थी या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 370 अभ्यर्थियों की इस सूची में शामिल नामों की जांच किस स्तर पर होती है और क्या जांच पूरी होने से पहले इन अभ्यर्थियों को आरक्षण या अन्य सरकारी लाभ का फायदा मिलता है. सूची सौंपने ने मांग की है कि सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए और यदि किसी मामले में फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.इस मामले में प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ पहले सामने आए चार दाखिलों तक सीमित नहीं रह गई है. अब 370 संदिग्ध नामों की सूची सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाने की मांग उठ रही है. ऐसे में आने वाली एमबीबीएस काउंसलिंग से पहले इन दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी. वहीं पुलिस और प्रशासन की मौजूदा जांच से यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि पहले सामने आए फर्जी प्रमाण-पत्रों के पीछे केवल व्यक्तिगत स्तर पर गड़बड़ी थी या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे.।.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share5SendTweet3
Previous Post

युवाओं को राज्य में ही मिलेंगे रोजगार और शिक्षा के अवसर,पलायन रोकने पर सरकार का जोर

Next Post

जौलीग्रांट में मोबाइल शॉप चोरी का दो दिन में खुलासा

Related Posts

उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने 37वें अखिल भारतीय खेलकूद समारोह के विजेता खिलाड़ियों को किया सम्मानित

November 4, 2026
7
उत्तराखंड

आंदोलनकारी रविन्द्र जुगरान के पिता उमाकांत जुगरान का निधन

November 4, 2026
19
उत्तराखंड

डोईवाला: द होराइजन स्कूल में धूमधाम से मनाया वार्षिक उत्सव ‘उद्भव-2026’

November 4, 2026
42
उत्तराखंड

डोईवाला डिग्री कॉलेज में नमामि गंगे कार्यक्रम का शुभारंभ

November 4, 2026
46
उत्तराखंड

तरवाड़ी महाविद्यालय बैडमिंटन प्रतियोगिता में छात्रा वर्ग में बबिता एवं छात्र वर्ग में अभिषेक विजेता

November 4, 2026
7
उत्तराखंड

यूकेडी ने लोनिवि थराली में प्रदर्शन कर बदहाल ग्रामीण सड़कों पर आक्रोश जताया

November 4, 2026
6

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67760 shares
    Share 27104 Tweet 16940
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45795 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38082 shares
    Share 15233 Tweet 9521
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37462 shares
    Share 14985 Tweet 9366
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37388 shares
    Share 14955 Tweet 9347

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

मुख्यमंत्री ने 37वें अखिल भारतीय खेलकूद समारोह के विजेता खिलाड़ियों को किया सम्मानित

November 4, 2026

आंदोलनकारी रविन्द्र जुगरान के पिता उमाकांत जुगरान का निधन

November 4, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.