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गिलोय एक चमत्कारी पौधा, औषधीय गुणों से भरपूर

07/11/19
in उत्तराखंड, हेल्थ
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
प्रचलित नाम-अमृता, गुडूंची, गीडूच
अंग्रेजी नाम-टीनोस्पोरा
पौध परिचयः गिलोय या गुडुची, पेड़ों नीम आम आदि पर चढ़ी, बेल, बहुवर्षीय लता होती है। इसकी शाखाओं से तागे की तरह लटकती जड़ें हवा मे झूलती रहती हैं। इसका तना हरा, मांसल, पत्ती हृदयाकार, फूल गुच्छकों में छोटे पीले, फल.छोटे मटर के समान, अल्पावस्था में हरित एवं पकने पर लाल रंग के तथा बीज सफेद मिर्च के दाने के समान छोटे होते हैं।
उपयोगी अंग जड़, तना, पत्ती के जिनका प्रयोग पर्वतीय क्षेत्र वैद्य पारंपरिक चिकित्सा में करते हैं। ऐसी ही एक वनस्पति जिसके बीजों का प्रयोग गढ़वाल एवं कुमाऊं में किया जाता है मुख्य रासायनिक घटक, छालयुक्त तले के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के रासायनिक घटक पाए जाते हैं जिनमें प्रमुख हैं. तिक्त ग्लूकोसाइड. जिल्वाएन एवं अतिक्त.ग्लूकोसाइड.जिलोनिन, इसके अतिरिक्त, तीन तिक्त यौगिक यथा.टिनोस्पोरोन, टिनोस्पोरिक एसिड और टिन स्पोराल भी पाए गए हैं। अल्प मात्रा में बरबेरीन नामक तत्व भी निष्कर्षित किया गया है। औषधीय गुण एवं उपयोग अमृत के समान लाभकारी अमृत या गुडुची वात, पित्त तथा कफ का शमन करती है। यह भूख बढ़ाने वाली, रक्त शोधक, ज्वर नाशक तथा हृदय के लिए लाभदायक है। यह पीलिया, मधुमेह, मलेरिया आदि रोगों में भी लाभदायक है। गिलोय को ज्वरनाशक भी कहा जाता है। अगर कोई व्यक्ति काफी दिनों से किसी भी तरह के बुखार से पीड़ित है और काफी दवाएं लेने के बाद भी बुखार में कोई आराम नहीं मिल रहा हो तो ऐसे व्यक्ति को रोजाना गिलोय का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही अगर किसी को डेंगू बुखार आ रहा हो तो उसके लिए मरीज को डेंगू की संशमनी वटी गिलोय घनवटी, दवा का सेवन कराया जाए तो बुखार में आराम मिलता है। संशमनी वटी दवा डेंगू बुखार की आयुर्वेद में सबसे अच्छी दवा मानी जाती है।
नियमित रूप से सेवन करने से आंखों की रोशनी पाचन रहे दुरुस्त डायबिटीज में फायदेमंद दूर करे मोटापा, इम्यूनिटी बढ़ाएं सर्दी.खांसी दूर भगाए की समस्या नियंत्रित हो जाती है।गए हों और कीड़े के कारण शरीर में खून की कमी हो रही हो तो पीड़ित व्यक्ति को कुछ दिनों तक नियमित रूप से गिलोय का सेवन कराना चाहिए। गिलोय में एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं, जो खतरनाक रोगों से लड़कर शरीर को सेहतमंद रखते हंै। गिलोय किडनी और लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है और खून को साफ करती है। नियमित रूप से गिलोय का जूस पीने से रोगों से लड़ने की क्षमता में बढ़ोत्तरी होती है।किसी व्यक्ति को लगातार सर्दी.खांसी.जुकाम की समस्या हो रही हो तो उन्हें गिलोय के रस का सेवन कराएं। दो चम्मच गिलोय का रस हर रोज सुबह लेने से खांसी से काफी राहत मिलती है। यह उपाय तब तक आजमाएं, जब तक खांसी पूरी तरह ठीक न हो जाए। लगभग लुप्तफप्राय जड़ी बूटी गिलोय के लिए करते हैं तो राज्य को जड़ी.बूटी के क्षेत्र में और अधिक प्रयास करने की जरूरत है। यह ऐसा क्षेत्र है जिसके जरिये हम अग्रणी राज्य के रूप में उन्नति कर सकते हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज कहा कि प्रदेश को ऑर्गनिक हर्बल स्टेट बनाने के लिए केंद्र से 1500 करोड रू की स्वीकृति मिली है। यहां पंडित दीन दयाल उपाध्याय की पुण्य तिथि के अवसर पर समर्पण दिवस कार्यक्रम में आजीवन सहयोग निधि समारोह में दिये अपने संबोधन में मुख्यमंत्री रावत ने बताया कि राज्य को आर्गेनिक हर्बल स्टेट बनाने के लिए केन्द्रीय कृषि मंत्री से 1500 करोड़ रूपये की स्वीकृति मिली है उत्तराखंड 9 नवंबर को अपनी उत्तराखंड राज्य के 20वें वर्षगांठ स्थापना दिवस के मनाने जा रहा है लेकिन राज्य आंदोलनकारियों का सपना आज भी अधूरा है। राज्य आंदोलनकारियों का मानना है कि जिस मकसद को लेकर उत्तराखंड का गठन किया गया थाए वो आज भी पूरा नहीं हो पाया है। पहाड़ों से युवा लगातार पलायन कर रहे हैं। कहीं न कहीं इस पलायन के लिए पहाड़ के नेता जिम्मेदार हैं, क्योंकि राजनेता ही पलायन कर मैदान पहुंच रहे हैं। प्रदेश सरकार राज्य के 20वें स्थापना दिवस के मौके पर सप्ताह भर कार्यक्रम का आयोजन कर रही हैण् ये कार्यक्रम मुख्य रूप से सैनिकों, महिलाओं, युवाओं पर केंद्रित हैं पर किसान के लिए गंभीर नहीं है।
सन्दर्भः एकेडेमिक जर्नल

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