• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड में ग्लेशियर तबाही ला सकते हैं !

11/08/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
13
SHARES
16
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड से लगते हिमालय के ग्लेशियरों में 13 बेहद संवेदनशील झीलें चिन्हित की गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह झीलें उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में कभी भी बड़ी तबाही का कारण बन सकती है। हिमालय में हिमनदों के पीछे हटने के साथ केवल बर्फ ही नहीं घट रही, बल्कि उसके पीछे और आसपास बनने वाली झीलों का स्वरूप भी बदल रहा है। इस बदले आकार को समझने के लिए जब विज्ञानियों ने अध्ययन किया तो हिमालय में 24 हजार, 440 ग्लेशियर झीलों की उपस्थिति पाई गई। इनमें से 221 झीलें बेहद खतरनाक स्थिति में है। शोधकर्ताओं ने अलग-अलग वर्षों में किए गए पांच बड़े हिमनदीय झील अध्ययनों के आंकड़ों को एक साथ रखा। इनके आधार पर हिमालय में 24,440 हिमनदीय झीलों की पहचान की गई।नमें लगभग 12,100 सुप्राग्लेशियल झीलें हैं, यानी ऐसी झीलें जो ग्लेशियर की सतह पर बनती हैं। बाकी झीलों में ग्लेशियर के आगे बनी प्रोग्लेशियल झीलें, अपरदन से बनी झीलें, चट्टानी बांध वाली और घाटी अवरुद्ध झीलें आदि शामिल हैं। अध्ययन में हिमालय के दक्षिणी हिस्से में जलविद्युत परियोजनाओं का भी विस्तृत डेटाबेस बनाया गया। शोधकर्ताओं ने कुल 1,242 जलविद्युत परियोजनाओं की पहचान की। इनमें सबसे ज्यादा परियोजनाएं ब्यास बेसिन में 384, रवि में 183, टौंस में 106, चेनाब में 58, तीस्ता में 55, काली में 40, सतलुज में 39, अलकनंदा में 32, भागीरथी में 31 और झेलम में 28 दर्ज हुईं।इस लिहाज से उत्तराखंड को अध्ययन ने अलग से सर्वाधिक जोखिम वाला राज्य घोषित नहीं किया है, लेकिन यहां आबादी और जलविद्युत ढांचे की मौजूदगी के कारण जीएलओएफ जोखिम आकलन महत्वपूर्ण है। अध्ययन में आबादी घनत्व के मामले में नेपाल के बाद हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और भूटान को उच्च घनत्व वाले क्षेत्रों में रखा गया है। विज्ञानियों ने अपने खतरा आकलन की विश्वसनीयता जांचने के लिए वर्ष 1533 से 2024 के बीच दर्ज हिमालयी जीएलओएफ घटनाओं का डेटाबेस इस्तेमाल किया। इसमें 254 घटनाएं शामिल थीं। इनमें से लगभग 72.4 प्रतिशत यानी 184 घटनाएं उन बेसिनों में हुईं, जिन्हें इस अध्ययन के मॉडल ने अत्यधिक उच्च या उच्च खतरे वाली श्रेणी में रखा था।इसके विपरीत केवल 0.39 प्रतिशत घटनाएं कम खतरे वाली श्रेणी में आने वाले बेसिनों में दर्ज हुईं। शोधकर्ताओं ने इसे अपने खतरा आकलन की मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत माना है। हिमालय की ऊंची चोटियों पर कुदरत एक ऐसा ‘टाइम बम’ तैयार कर रही है, जो कभी भी बड़ी तबाही ला सकता है. नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर और इसरो) की ताजा रिपोर्ट ने नींद उड़ा देने वाला खुलासा किया है. सैटेलाइट से मिली तस्वीरों और डेटा के विश्लेषण के मुताबिक, हिमालयी राज्यों में 190 ग्लेशियर झीलें अब ‘अति संवेदनशील’ यानी डेंजर ज़ोन में हैं. ये झीलें तेजी से अपना आकार बढ़ा रही हैं, और अगर ये फटीं, तो निचले इलाकों में रहने वाली लाखों की आबादी के लिए 2013 की केदारनाथ त्रासदी से भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता है.  जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. इससे झीलों में पानी की मात्रा बढ़ रही है. सैटेलाइट डेटा के अनुसार, अकेले उत्तराखंड में ही 345 ग्लेशियर झीलें मौजूद हैं. लेकिन चिंता की बात यह है कि पूरे हिमालयी क्षेत्र की 190 झीलें ऐसी हैं, जो फटने की स्थिति में हैं. वैज्ञानिकों ने इन्हें ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ के लिहाज से बेहद खतरनाक माना है. रिपोर्ट में दो झीलों का जिक्र विशेष रूप से किया गया है, जो किसी भी वक्त आपदा का सबब बन सकती हैं:गेफांग घाट झील (हिमाचल प्रदेश): इस झील का आकार पिछले 30 सालों में 3 गुना बढ़ चुका है. आंकड़ों के मुताबिक, इसका विस्तार 178% तक हुआ है और अब यह 101.3 हेक्टेयर में फैल चुकीहै.केदारताल झील उत्तराखंड की केदारताल झील को ‘अत्यंत संवेदनशील’ श्रेणी में रखा गया है. इसका कैचमेंट एरिया सीधे गंगोत्री धाम से जुड़ा है. अगर इस झील में कोई हलचल होती है, तो इसका सीधा असर गंगा के निचले मैदानी इलाकों और धाम पर पड़ेगा. अगर गर्मियों में बर्फबारी कम होती है, तो ग्लेशियर और तेजी से पिघलते हैं. इससे झीलों की दीवारें कमजोर हो जाती हैं और उनके फटने की संभावना बढ़ जाती है. हिमालयी क्षेत्र में करीब 10 लाख लोग इन झीलों के 10 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं, जो सीधे तौर पर खतरे की जद में हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, छोटी और बड़ी झीलों को मिला लिया जाए तो हिमालय में इनकी कुल संख्या 8 हजार से भी ज्यादा है. चौंकाने वाली बात यह है कि 1990 के बाद से अब तक 1000 नई झीलें बन चुकी हैं. अब समय आ गया है कि इन झीलों का ‘रिस्क प्रोफाइल’ तैयार किया जाए. जलवायु परिवर्तन की मार अब उन ऊंचाइयों तक पहुंच गई है, जहां इंसानों की पहुंच न के बराबर है. सरकार को इन झीलों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने और उनकी 24/7 निगरानी करने की जरूरत है. अगर समय रहते प्रबंधन नहीं किया गया, तो आने वाले सालों में हिमालयी राज्यों को बड़ी प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. हिमालय में मौजूद ग्लेशियर और ग्लेशियर में बनी झीलें हमेशा से ही केंद्र और राज्य सरकारों के लिए एक बड़ी चुनौती रही हैं. साल 2013 में केदार घाटी में आई आपदा समेत अन्य आपदाएं इसका एक जीता जागता उदाहरण रही हैं. यही वजह है कि सरकार ग्लेशियर झीलों की स्थिति जानने के लिए अध्ययन पर जोर दे रही है.  विषम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से उत्तराखंड काफी संवेदनशील है. हर साल प्राकृतिक आपदा की वजह से इंसानों, पशुओं और इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान पहुंचता है. खासकर मानसून सीजन के दौरान प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों आपदा जैसी स्थिति बन जाती है, जिसके चलते ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इन्हीं प्राकृतिक आपदाओं में ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड भी शामिल है. दरअसल, पिछले कुछ सालों से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिसके चलते उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद ग्लेशियर झीलों का आकार भी बढ़ता जा रहा है. ऐसे में ग्लेशियर झीलों के टूटने और ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड की आशंका भी बढ़ गई है. उत्तराखंड के उच्च हिमालई क्षेत्रों में 426 बड़ी ग्लेशियर झील चिन्हित हैं. इनका कुल आकार 3,347,671 स्क्वायर मीटर है. अलकनंदा बेसिन में 226 ग्लेशियर झील हैं, जिनका आकार 1,614,848 स्क्वायर मीटर है. भागीरथी बेसिन में 131 ग्लेशियर झील हैं, जिनका आकार 1,034,759 स्क्वायर मीटर है. धौलीगंगा बेसिन में 19 ग्लेशियर झील हैं, जिनका आकार 55,046 स्क्वायर मीटर है. कुटियांगती बेसिन में 18 ग्लेशियर झील हैं, जिनका आकार 224,500 स्क्वायर मीटर है. मंदाकिनी बेसिन में 12 ग्लेशियर झील हैं, जिनका आकार 230,482 स्क्वायर मीटर है. कई रिसर्च संस्थाओं ने कई बार चेताया है और कई कोशिशें हुई हैं कि इन देशों के बीच इस भयानक खतरे से निपटने के प्रो एक्टिव प्रयासों को लेकर सहयोग बढ़े, लेकिन डेटा और सूचनाओं तक का अभाव बना हुआ है. हर बार सिर्फ उम्मीदें ही की जाती हैं कि अब सहयोग बढ़ेगा. कई रिसर्च संस्थाओं ने कई बार चेताया है और कई कोशिशें हुई हैं कि इन देशों के बीच इस भयानक खतरे से निपटने के प्रो एक्टिव प्रयासों को लेकर सहयोग बढ़े, लेकिन डेटा और सूचनाओं तक का अभाव बना हुआ है. हर बार सिर्फ उम्मीदें ही की जाती हैं कि अब सहयोग बढ़ेगा. कई रिसर्च संस्थाओं ने कई बार चेताया है और कई कोशिशें हुई हैं कि इन देशों के बीच इस भयानक खतरे से निपटने के प्रो एक्टिव प्रयासों को लेकर सहयोग बढ़े, लेकिन डेटा और सूचनाओं तक का अभाव बना हुआ है. हर बार सिर्फ उम्मीदें ही की जाती हैं कि अब सहयोग बढ़ेगा.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share5SendTweet3
Previous Post

*पहाड़ की नियति आज भी कंधों पर ‘जिंदगी’

Next Post

मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना-2026 का जल्द होगा शुभारंभ, युवाओं को मिलेगी प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग

Related Posts

उत्तराखंड

भारी बारिश से गौचर में जनजीवन अस्त-व्यस्त, घरों-दुकानों में घुसा मलबा

September 11, 2026
9
उत्तराखंड

प्रदेश में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर, 2026 तक सेवा संकल्प अभियान का आयोजन किया जायेगा : मुख्यमंत्री

September 11, 2026
8
उत्तराखंड

माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत अपर सहायक अध्यापक व्यायाम (ग्रेड वेतन-4200) के 33 पद सृजित

September 11, 2026
9
उत्तराखंड

जब विदेशी धरती पर गूंजा वो ‘अमर’ भाषण, भारत की कायल हुई दुनिया

September 11, 2026
6
उत्तराखंड

नीम करौली बाबा के घर पर किसका हक?

September 11, 2026
9
उत्तराखंड

हेली कंपनियों का सफर चुनौतियों भरा

September 11, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67734 shares
    Share 27094 Tweet 16934
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38077 shares
    Share 15231 Tweet 9519
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37457 shares
    Share 14983 Tweet 9364
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37382 shares
    Share 14953 Tweet 9346

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

भारी बारिश से गौचर में जनजीवन अस्त-व्यस्त, घरों-दुकानों में घुसा मलबा

September 11, 2026

प्रदेश में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर, 2026 तक सेवा संकल्प अभियान का आयोजन किया जायेगा : मुख्यमंत्री

September 11, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.