पिथौरागढ, 21 जून।
शैक्षिक दख़ल समिति की स्थापना दिवस के अवसर पर शिक्षा तथा स्त्री पर केन्द्रित शैक्षिक दख़ल के अंक का विमोचन समारोह पूर्वक संपन्न हो गया है।
डीडाहाट स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य भास्करानंद पाण्डे ने कहा कि ए० आई० के युग में अब लिखना और स्वतंत्र चिंतन सिमट रहा है। ऐसे में पत्रिकाओं का प्रकाशन बेहद ज़रूरी है। पढ़ना और अपने स्तर से कहीं भी पढ़ना के लिए पत्रिका का कोई विकल्प नहीं है। पूर्व प्राचार्य दुष्यन्त पांगती ने कहा कि आज भी कक्षा – कक्ष में संवाद ही चिंतन – मनन को बढ़ाएगा। समाज को संवेदनशील बनाना पढ़ना – पढ़ाने से ही हो सकेगा। पत्रिकाएं और छपी सामग्री शिक्षाविद् गोविन्द भण्डारी ने कहा कि लगातार शिक्षा में प्रयोगों ने शिक्षण को प्रभावित किया है। शिक्षक को पढ़ाने के लिए भरपूर समय और स्वतंत्र कार्य करने के लिए नहीं दिया जा रहा है।
पत्रिका के नवीनतम अंक की भूमिका पर बोलते हुए शैक्षिक दख़ल के संपादक दिनेश कर्नाटक ने कहा कि पिछले 14 सालों से पत्रिका का प्रकाशन करना शिक्षा को समझना है। यह हमारी ज़िम्मेदारी है। शिक्षा के सरोकारों पर प्रायः चर्चा लेखन और साहित्य मिलता नहीं है। सार्वजनिक शिक्षा में बहस की नजरूरत है। शैक्षिक दख़ल पत्रिका विषय केन्द्रित अंकों का प्रकाशन कर शिक्षक – अभिभावकों के मध्य समाज की पड़ताल करना और समाज में बदलाव की ओर प्रयास करना है। शिक्षक एवं साहित्यकार मनोहर चमोली ने कहा कि इस अंक में पचास से अधिक रचनाकारों के आलेख , कविताएँ और कहानियाँ हैं! यह अंक समाज में स्त्री शिक्षा को केन्द्र में रखते हुए कई दृष्टिकोणों – अनुभवों से पाठकों को समृद्ध करेगी । शिक्षक राजेन्द्री कन्याल ने कहा कि ऐसे प्रयास हर तरफ हों। स्त्री शिक्षा के इस अंक से कई मुद्दे उभरेंगे।
विमोचन अवसर पर शिक्षक विनोद बसेड़ा , महेश बवाड़ी , महेश पुनेठा , रितु ठाकुर, नवल, ममता चौहान, लोकेश डसीला, मोहन सिंह नेगी, कुसुम लता पाण्डे , रमेश जोशी, कुन्दन सिंह कऱ्याल सहित प्रशिक्षु शिक्षक भी उपस्थित रहे । इससे पूर्व दीप प्रज्वलन किया गया। प्रशिक्षु शिक्षकों की उपस्थिति में शैक्षिक दखल समिति के सचिव राजीव जोशी ने कहा कि नई शिक्षा नीति भी रचनात्मकता को बढ़ावा देने की बात करती है। शैक्षिक दख़ल इसी क्रम में एक प्रयास है। दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन – स्थापना दिवस पर दूसरे सत्र में स्त्री शिक्षा पर गोष्ठी आयोजित की जाएगी ।











