डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
मोरी विकासखंड के सूदूरवर्ती पांच पट्टियों के 42 गांव के लोग पिछले 71 वर्षों से गोंविद वन्य जीव विहार के सख्त वन कानूनों के कारण अपने हक-हकूकों का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आज भी उन्हें फ्री ग्रांट और पीडी की लकड़ियों सहित विकास कार्यों के लिए परेशान होना पड़ा है। वन्य जीव अधिनियम के तहत वहां पर अभी तक जल जीवन मिशन सहित संचार और सड़क आदि सुविधाओं के लिए भूमि हस्तांतरित नहीं हो पा रही है।वर्ष 2014 में मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था। लेकिन उसके बाद भी लोगों को किसी प्रकार की राहत नहीं मिल पाई। कहा कि कई बार शासन-प्रशासन से इस संबंध में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर लोगों के हक-हकूक दिलवाने की मांग रखी गई। लेकिन वह आज भी पूरी नहीं हो पाई है।स्थिति यह है कि आज भी कई जल जीवन मिशन की योजनाएं पूर्ण नहीं हो पाई हैं। साथ ही सड़कों सहित पुलों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। राजपाल रावत ने बताया कि इन क्षेत्रों में संचार सुविधाएं दुरूस्त करने के लिए अभी तक बीएसएनएल को केबिल बिछाने की अनुमति नहीं मिल पाई है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि राज्य सरकार को इस पर गंभीरता से विचार कर केंद्र सरकार से पत्राचार करना चाहिए। गोविंद वन्य जीव विहार की उपनिदेशक का कहना है कि ग्रामीणों के हक-हकूकों के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। वहां से लोगों की सुविधा के लिए टौंस वन प्रभाग से यह सुविधा देने की बात कही गई है। उसके बाद भी एक दूसरा प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है कि ग्रामीणों उनके हक-हकूक उनके क्षेत्र से ही मिले।अभ्यारण्य के भीतर हर-की-दून घाटी है, जो ट्रेकिंग के लिए एक लोकप्रिय स्थान है। रुइंसियारा उच्च ऊंचाई वाली झील भी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। हर-की-दून वन विश्राम गृह जंगली फूलों की घाटी के बीच स्थित होने के कारण प्रसिद्ध है। हरि-की-दून के रास्ते में नैतवार, तालुका और ओसला के वन विश्राम गृह पड़ते हैं, जो बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। दुनिया भर से पर्यटक ट्रेकिंग या अभ्यारण्य घूमने के लिए यहाँ आते हैं।सरकार की विभिन्न योजनाओं को धरातल पर सफल बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सड़क, बिजली, पंचायत भवन, विद्यालय सहित विकास की तमाम योजनाएं पंचायतों के माध्यम से लोगों तक पहुंचती हैं। पंचायतों में जनप्रतिनिधित्व और सक्रियता बढ़ने से गांवों में बड़ा बदलाव आएगा। मोरी ब्लॉक स्थित गोविन्द वन्य जीव बिहार पार्क क्षेत्र को जोड़ने वाला नैटवाड़-सांकरी मोटर मार्ग फपराला खड्ड के पास भूधंसाव होने के कारण सोमवार शाम को बंद हो गया। जिससे मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई है 44 पर्यटक तो गुरुवार की शाम तक बेस कैंप गांव मोंडा पहुंच गए थे, लेकिन दो पर्यटक बुग्याली क्षेत्र में ही बीमार होने के कारण फंसे थे।.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.














