• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

देहरादून की हरियाली सिमटी

25/08/25
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
15
SHARES
19
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 71.05 फीसद वन भूभाग और इसमें 45.44 फीसद वनावरण। प्रति व्यक्ति वन क्षेत्र भी 0.375 हेक्टेयर। जैव विविधता के लिए मशहूर उत्तराखंड में हरियाली के लिहाज से यह तस्वीर कुछ सुकून देने वाली है। बावजूद इसके तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। राज्य गठन के बाद से अब तक की अवधि को देखें तो प्रतिवर्ष जिस हिसाब से जंगलों में पौधरोपण हो रहा, उसके अनुरूप वनावरण नहीं बढ़ पाया है। यह चिंता हर किसी को साल रही है।  देहरादून, जो कभी अपनी हरियाली और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जानी जाती थी, आज कंक्रीट के जंगल में तब्दील होती जा रही है। बेतरतीब शहरीकरण और अनियोजित निर्माण ने शहर का संतुलन बिगाड़ दिया है। मानक के अनुसार, यहां कुल विकसित क्षेत्र में 18% हरित क्षेत्र होना चाहिए, लेकिन मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की मास्टर प्लान रिपोर्ट में सिर्फ 5.98% हरित क्षेत्र ही दर्ज है। यही नहीं, पार्क, खुले मैदान और बाग-बगीचे अब एक से दो प्रतिशत तक सीमित रह गए हैं। देहरादून शहर, जो कभी गन्ने और धान की खेती और आम, लीची के बागानों से महकता था. आज अनियोजित विकास और बेतरतीब निर्माण की मार झेल रहा है। यहां लगातार बढ़ती इमारतों और कंक्रीट के जंगल ने शहर की हरियाली को निगल लिया है।शहरी नियोजन के मानकों के मुताबिक, किसी भी शहर के कुल विकसित क्षेत्र का कम से कम 18 प्रतिशत हिस्सा हरित क्षेत्र होना चाहिए। लेकिन मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण के मास्टर प्लान में यह आंकड़ा केवल 5.98 प्रतिशत तक सीमित रह गया है। वहीं, पार्क, बाग-बगीचे और खुले मैदान महज़ 1 से 2 प्रतिशत तक सिमट गए हैं। बदलते समय में दून घाटी में गन्ना और धान की खेती और आम-लीची के बाग-बगीचों की जगह आवासीय और वाणिज्यिक इमारतों ने ले ली है। पुराने मास्टर प्लान में 40 प्रतिशत भूमि कृषि के लिए सुरक्षित थी, जो अब घटकर केवल 10 प्रतिशत रह गई है।एमडीडीए की प्रस्तावित महायोजना-2041 के अनुसार, 16,774.75 हेक्टेयर विकसित इलाके में से केवल 1,071.25 हेक्टेयर भूमि को हरित क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है। इसमें भी अधिकांश हिस्सा केंद्रीय संस्थानों की परिसंपत्तियों में शामिल है। इस कारण आम लोगों के लिए उपलब्ध हरित क्षेत्र बेहद सीमित रह जाता है। इसके साथ ही नर्सरी, पार्क और बाग-बगीचों का दायरा भी लगातार सिकुड़ रहा है।नए मास्टर प्लान के अनुसार वर्तमान में देहरादून में आवासीय क्षेत्र के लिए 58.43%, मिश्रित उपयोग (आवासीय + वाणिज्यिक) के लिए 9.33%, वाणिज्यिक के लिए 4.28%, औद्योगिक के लिए 1.07%, सार्वजनिक/सेमी-पब्लिक के लिए 9.42%, परिवहन के लिए 11.15%, पर्यटन के लिए 0.34% और ग्रीन एरिया के लिए मात्र 5.98% भूमी का उपयोग किया जा रहा है।देहरादून नगर निगम शहर की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अब हरियाली बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने जा रहा है। नगर आयुक्त का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में नगर निगम ने 20 हेक्टेयर से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। अब इन जमीनों को पार्क और ग्रीन एरिया में बदलने की योजना बनाई गई है। उनका मानना है कि यह कदम शहर की घटती हरियाली को बचाने और पर्यावरण को संतुलित करने में मदद करेगा। देहरादून जिस तेज़ी से अपनी हरियाली खो रहा है, वह अभूतपूर्व है। शहर के फेफड़े कहे जाने वाले पेड़ों को अंधाधुंध काटा जा रहा है, जिससे उन बुनियादी ढाँचे वाली परियोजनाओं के लिए रास्ता बन रहा है जो ज़रूरी नहीं कि उनकी ज़रूरतों के अनुरूप हों। जंगलों की जगह चौड़ी होती सड़कें, ऊँची इमारतें और व्यावसायिक परिसर उभर रहे हैं, और पर्यावरणीय परिणामों की ज़रा भी परवाह नहीं की जा रही। हर कुल्हाड़ी जो चलती है, हर पेड़ जो गिरता है, वह अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय क्षरण की ओर एक और कदम बढ़ाता है। इसके परिणाम विनाशकारी हैं: बढ़ता तापमान, बिगड़ता वायु प्रदूषण, लुप्त होती जैव विविधता, और उन निवासियों में बढ़ती लाचारी की भावना, जिन्हें कभी अपने शहर की प्राकृतिक विरासत पर गर्व था।इस बदलाव का सबसे दुखद पहलू शहरी नियोजन में जनता के परामर्श की घोर उपेक्षा है। देहरादून के हृदय और आत्मा, निवासी, उन संवादों से वंचित हैं जो उनके अपने शहर को आकार देते हैं। निर्णय बंद दरवाजों के पीछे, नौकरशाही की उदासीनता, राजनीतिक गठजोड़ और शक्तिशाली भू-माफिया द्वारा निर्देशित होते हैं, जिनके निहित स्वार्थ पर्यावरणीय चिंताओं पर भारी पड़ते हैं। बार-बार, चिंतित नागरिक अपने शहर के हरित क्षेत्र के विनाश के विरोध में सड़कों पर उतरे हैं। उन्होंने याचिकाएँ लिखी हैं, अपनी आवाज़ उठाई है, जवाबदेही की अपील की है—लेकिन सत्ता में बैठे लोगों द्वारा उन्हें नज़रअंदाज़, खारिज और दरकिनार कर दिया गया है।हालाँकि, नुकसान की भरपाई असंभव नहीं है। आगे बढ़ने के लिए शासन में एक बुनियादी बदलाव की आवश्यकता है—ऐसा बदलाव जो स्थिरता, पारदर्शिता और नागरिक भागीदारी को बेतहाशा विस्तार से ज़्यादा महत्व दे। देहरादून के निवासियों को एक ऐसी योजना व्यवस्था की माँग करनी चाहिए जहाँ पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन कठोर हो, निर्णय लेने की प्रक्रियाएँ जनता की जाँच के लिए खुली हों, और शहर के भविष्य को आकार देने में सामुदायिक आवाज़ें एक अभिन्न भूमिका निभाएँ। नागरिक समाज समूहों और पर्यावरण समर्थकों को शेष हरित क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए अपना निरंतर दबाव बनाए रखना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि देहरादून अनियंत्रित शहरी फैलाव का एक और शिकार न बने।देहरादून अब एक दोराहे पर खड़ा है। एक रास्ता अपरिवर्तनीय पारिस्थितिक विनाश की ओर ले जाता है, जहाँ अनियंत्रित शहरीकरण शहर की पहचान को ही मिटा देता है। दूसरा रास्ता, हालाँकि कठिन है, आशा की किरण दिखाता है—एक ऐसा भविष्य जहाँ विकास और स्थिरता का संतुलन हो, जहाँ नागरिकों को अपने पर्यावरण की रक्षा करने का अधिकार हो, और जहाँ शासन शोषण के बजाय संरक्षण को प्राथमिकता दे। महत्वपूर्ण प्रश्न यह है: क्या सत्ता में बैठे लोग सुनेंगे? क्या वे सहभागी शासन की उचित माँग को स्वीकार करेंगे?समय निकलता जा रहा है। अगर नागरिक आज देहरादून के भविष्य को आकार देने में अपनी भूमिका नहीं निभाते, तो कल को आकार देने के लिए शायद कोई भविष्य ही नहीं बचेगा। कार्रवाई की पुकार और भी ज़ोरदार और मज़बूत होनी चाहिएआखिरी पेड़ गिरने से पहले, ताज़ी हवा की आखिरी साँस छिन जाने से पहले, और देहरादून बेतहाशा शहरीकरण की एक और चेतावनी भरी कहानी बनकर रह जाने से पहले। *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*

Share6SendTweet4
Previous Post

लापता चल रहें गंगा दत्त जोशी की खोज के लिए तीसरे दिन युद्धस्तर पर कार्य जारी

Next Post

डोईवाला: डरा धमकाकर जमीन कब्जाने वाले गिरोह को किया गिरफ्तार

Related Posts

उत्तराखंड

लोक गीतों की धुनों के बीच सीएम आवास में निखरे होली के रंग

March 2, 2026
6
उत्तराखंड

चुनौतियां: रोबोट तथा बॉट्स के संचालन का दायित्व संभाल लेंगी!

March 2, 2026
5
उत्तराखंड

खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर

March 2, 2026
4
उत्तराखंड

वीरभद्र पशुलोक बैराज, ऋषिकेश में हितधारकों एवं नागरिकों के साथ सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

March 2, 2026
84
उत्तराखंड

श्री दरबार साहिब में पैदल संगत का पुष्पवर्षा व श्री गुरु राम राय जी महाराज के जयकारों के साथ हुआ भव्य स्वागत

March 2, 2026
7
उत्तराखंड

डॉ. हरीश चंद्र अंडोला को उत्कृष्ट लेखन के लिए दृष्टि संस्था ने सम्मानित किया

March 2, 2026
44

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67659 shares
    Share 27064 Tweet 16915
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45773 shares
    Share 18309 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38046 shares
    Share 15218 Tweet 9512
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37435 shares
    Share 14974 Tweet 9359
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37323 shares
    Share 14929 Tweet 9331

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

लोक गीतों की धुनों के बीच सीएम आवास में निखरे होली के रंग

March 2, 2026

चुनौतियां: रोबोट तथा बॉट्स के संचालन का दायित्व संभाल लेंगी!

March 2, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.