हरेंद्र बिष्ट।
थराली।
जहां एक ओर सरकार अस्पतालों में प्रयाप्त मात्रा में दवाओं की आपूर्ति करने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही हैं, वही दूसरी ओर करीब एक लाख से अधिक की जनसंख्या वाले थराली परगना की जनता की स्वास्थ्य के उपचार के लिए अस्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली ने एक्सपायरी बता कर हजारों,लाखों की दवाओं को आग में फूंक डाला,
अस्पताल प्रबंधन के इस रवैए के कारण स्वयं प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली के समीप गत दिनों बड़ी मात्रा में दवाओं के पैकेट जली हुई दिखाई पड़ी मिली इन पैकेटों पर सरकारी मुहर लगी हुई दिखाई पड़ी है। सवाल उठने लगे हैं कि यदि ये दवाइयां सरकारी स्टॉक की हैं, तो दूसरा बड़ा सवाल यह है कि इन्हें किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में जलाया गया, यह एक बड़े जांच का विषय है कि क्या दवाइयों की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी या उपयोग योग्य दवाओं का अनुचित तरीके से निस्तारण किया गया।प्रदेश सरकार सरकारी अस्पतालों में मरीजों और प्रसूताओं को निशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराने का दावा करती है। ऐसे में इस तरह का मामला सामने आने से अस्पताल प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।प्रश्न यह भी है कि जों दवाईयां नष्ट की गई क्या उनके उपयोग करने के लिए कोई भी मरीज अस्पताल नही आए अगर नही आए तो एक्सपायरी होने से कुछ माह पूर्व ऐसे सरकार अस्पतालों को यें दवाईयां नहीं भेजी गई जहां पर इनका उपयोग हों सकता था, दवाओं को जलाने से किसे लाभ मिला हैं। हजारों,लाखों रूपयों की दवाईयां कों जला देने से निश्चित ही सरकार को हजारो,लाखों रूपयों का चूना जरू लगा हैं।एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या दवाओं को खुले में जलाना क्या वैज्ञानिक तरीका है, दवाओं के जलने से आसपास के वातावरण में इस का दुष्प्रभाव नहीं पड़ा होगा।स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। ताकि भविष्य में इस तरह मूल्यवान दवाओं के ना जला कर जरूरतमंदों को दवाओं का वितरण किया जा सके।
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दवाओं के डब्बों में आग लगाने के संबंध में जब सीएचसी के प्रभारी चीफ फार्मासिस्ट जबाब मांगा गया हैं, फार्मासिस्ट का कहना है चिकित्सालय के डस्टबिन में खाली दवाओं डिब्बें अधिक हों गये थे जिसे जलाया गया हैं, पूछे जाने पर कहा कि वास्तव में कुछ डब्बों में दवाई के स्टिक दिखाई पड़ रहे हैं यें जांच का मामला है।
डॉ.सजय गुप्ता
सीएचसी प्रभारी थराली
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दवाइयों के खाली डिब्बे पिछले रविवार को जलाएं गयें थें दवा स्टोर के डस्टबिन में खाली डिब्बे काफी अधिक हो गयें थें और कुड़ा क्लकस वाहन भी नही आया व और यहां पर एक ही सफाई नायिका हैं जो बिमर पड़ी है।इस लिए खाली रेपर मजबूरन खाली रेपर जलाएं गये, कहा कि किसी ने साजिशन खाली डब्बों जिन्हें जलाया जा रहा था उसके ऊपर कुछ दवाओं के भरें डब्बों को डाल दिया ताकि सीएचसी को बदनाम किया जा सके।
गिरीश टम्टा
प्रभारी चीफ फार्मासिस्ट
थराली
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दवाओं के भरें डब्बों को खुले में जलाना नियम विरुद्ध हैं, खुलें में दवाओं को नही जलाया जा सकता हैं,फोटो में के डब्बों में दवाइयां साफ दिखाई पड़ रही हैं, सीएचसी थराली दवाओं के डब्बों को जलाने के मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम का गठन किया गया है, मामले की जांच उप जिला चिकित्सालय कर्णप्रयाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं इसी चिकित्सालय के चीफ फार्मासिस्ट कर जांच आख्या देंगे उसी के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डा.अभीषेक गुप्ता
सीएमओ चमोली










