• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

हर्बल कलर से सावधानीपूर्वक होली भी खेलिए और स्वस्थ भी रहिए

27/03/21
in उत्तराखंड, संस्कृति
Reading Time: 1min read
235
SHARES
294
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
होली का त्योहार एक भाईचारे से जुड़ा पर्व है। जिसमें हर कोई भेदभाव भूलकर रंगों के साथ इस पर्व को मनाता है। रंगों के इस त्योहार में का हर्बल रंग व गुलाल बाजार में और भी खिल रहा है। साथ ही कोरोना के संक्रमण पर भी यह भारी पड़ रहा है। पानी वाले रंग की अपेक्षा सूखे व हर्बल गुलाल की मांग इस होली के त्योहार पर खासी बढ़ी है। रासायनिक रंगों का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होता है। होली पर ज्यादातर ऐसे ही रंगों का प्रयोग किया जाता है। जबकि बाजार में हर्बल रंगों का विकल्प मौजूद है। लेकिन हर्बल रंगों की कास्ट कुछ अधिक होने के कारण इसे खरीदना नहीं चाहते हैं। इसे दखते हुए नैनीताल की चेली संस्था ने अच्छी पहल की है। संस्था ने चुकुन्दर, गुलाब के फूल, गेंदा के फूल व पालक से हर्बल रंग तैयार किया है। बंगलुरू, पुड्डुचेरी, शिमला से उनकी डिमांड भी आ चुकी है। रंगों का पर्व होली नजदीक है। होली पर बाजारों में मिलावटी रंगों की आवक तेजी से बढ़ रही है। इन रंगों का प्रयोग करने से भयंकर साइड इफेक्ट भी नजर आते हैं। ऐसे में अब हर्बल रंगों का प्रचलन साल दर साल बढ़ रहा है। महिला समूह व स्वयंसवीं संस्थाएं इसमें आगे आ रही है।

नैनीताल की संस्था ने भी हर्बल रंग तैयार किये हैं। संस्था ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से बिक्री आरंभ कर दी है। संस्था की संचालिका के अनुसार फूलों से रंग बनाए जा रहे हैं। रंग सुखाने का काम बेहद सावधानीपूर्वक करना होता है। संस्था की ओर से रंग के साथ अबीर भी तैयार किया है। रंग का सौ ग्राम का पैकेट सौ जबकि 50 ग्राम का पैकेट 30 रुपये में उपलब्ध है। अब तक पांडुचेरी, शिमला, पुणे समेत अन्य शहरों से ऑर्डर मिल चुके हैं। होली में प्राकृतिक रंगों का उपयोग होना चाहिए ताकि स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण की भी रक्षा हो सके। हर्बल गुलाल का स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है, बल्कि यह ठण्डक प्रदान करता है। इसके आंखों में चले जाने से कोई जलन नहीं होता है। इसके अलावा त्वचा तथा बालों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।

हल्दी, गेंदा, गुलाब, चुकन्दर, पालक, अनार जैसे प्राकृतिक पुष्प तथा फलों से बने जैविक अथवा हर्बल गुलाल स्वास्थ्य के लाभकारी है।प्रयुक्त फूलों का उपयोग हर्बल गुलाल बनाने के लिए किया जाता है। बचे हुए हिस्से का उपयोग जैविक खाद बनाने के लिए किया जाता है। गुलदस्ते में कपड़े और प्लास्टिक का उपयोग वहां की साबुन इकाई में पैकिंग सामग्री के रूप में किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसी तरह पिछले साल दिपावाली में बनचरौदा की महिलाओं द्वारा बनाए मिट्टी और गोबर के दीये, सजावटी सामान दिल्ली व देश के अन्य राज्यों में खूब लोकप्रिय हुए। कोरोना के चलते लोग अब पुरानी परंपरा पर लौट रहे हैं, इस कारण अब बाजार में हर्बल गुलाल और रंगों की मांग काफी बढ़ी है। सायनयुक्त और गीले रंगों के विकल्प के तौर पर प्राकृतिक रंगों ने जगह बनाई है। हर्बल गुलाल, चंदन और विभिन्न फूलों से बने प्राकृतिक रंगों की बाजार में बहार है। नैनीताल में एक स्वयं सहायता समूह इस समस्या से बचाने में बड़ी भूमिका अदा करता है। इस समूह की महिलाएं गेंदे, गुलाब, पालक, हल्दी को मैदे और मक्की के आटे में मिलाकर हर्बल कलर तैयार करती हैं। हल्द्वानी के हरियानपुर गांव में ये स्वयं सहायता समूह चलता है। जिसमें गांव की महिलाएं होली के एक महीने पहले से तैयारी में जुट जाती हैं। होली आते ही हर्बल रंगों की डिमांड बढ़ जाती है। उत्तराखंड के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश से लेकर बेंगलुरु तक के दुकानदारों के ऑर्डर आते हैं। हर्बल कलर बनाने वालों का कहना है कि यह स्किन पर कोई बुरा असर नहीं डालता, शरीर के अंदर जाने पर भी इसका कोई नुकसान नहीं है। हर्बल कलर की विश्वसनीयता स्वाभाविक रूप से बनी रहती है।

Share94SendTweet59
Previous Post

आगामी मानसून सीजन के दृष्टिगत सभी तैयारियां जल्द पूर्ण कर ली जाय.मुख्यमंत्री

Next Post

ग्वालदम के पास ट्रक दुर्घटना में चालक की मौत

Related Posts

उत्तराखंड

84 प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों ने किया एसडीआरएफ मुख्यालय का दौरा

April 26, 2026
5
उत्तराखंड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ का 133वां संस्करण सुना

April 26, 2026
2
उत्तराखंड

लोहाजंग क्षेत्र में अविरल नंदा रन फॉर चैरिटी दौड़ का आयोजन होगा

April 26, 2026
3
उत्तराखंड

मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने देहरादून पहुंचे और पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल बी.सी. खण्डूडी की कुशलक्षेम जानी

April 26, 2026
4
उत्तराखंड

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बागवानीऔर फलों को हुआ नुकसान

April 26, 2026
7
उत्तराखंड

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा आस्था के जनसैलाब में पवित्रता!

April 26, 2026
4

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67678 shares
    Share 27071 Tweet 16920
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45776 shares
    Share 18310 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38051 shares
    Share 15220 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37438 shares
    Share 14975 Tweet 9360
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37330 shares
    Share 14932 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

84 प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों ने किया एसडीआरएफ मुख्यालय का दौरा

April 26, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ का 133वां संस्करण सुना

April 26, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.