• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्‍तराखंड में जैविक खेती से संवारेंगे काश्तकारों के भाग

06/07/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
11
SHARES
14
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

 

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
पहाड़ों में खेती-बाड़ी का काम करना कोई आसान काम नहीं है. यहां की भौगोलिक परिस्थितियों में ढलकर फसलों का उत्पादन करने के लिए कठिन परिश्रम की जरूरत होती है और जंगली जानवरों के आतंक से फसलों को बचाना भी एक कठिन कार्य हो जाता है. इन सभी परेशानियों के बीच पहाड़ में ऐसे कई किसान हैं, जो पारंपरिक खेती कर रहे हैं और सालभर में विभिन्न प्रकार की सब्जियां अन्नदाता की आय भी बढ़नी है, इलाके के पर्यावरण पारिस्थितिकी को बनाए बचाए भी रखना है अन्नदाता की आय भी बढ़नी है, इलाके के पर्यावरण पारिस्थितिकी को बनाए बचाए भी रखना है हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड ऑर्गेनिक खेती के लिए मुफीद साबित हो रहा है. यही वजह है कि उत्तराखंड के ऑर्गेनिक प्रोडक्ट आज देशभर में पहले पायदान पर देखे जा रहे हैं. इनमें उछाल की बड़ी वजह कोरोनाकाल माना जा रहा है. हालांकि, ऑर्गेनिक सेक्टर में काम उत्तराखंड में काफी पहले से शुरू हो गया था, लेकिन कोरोनाकाल में इस पर जोर दिया गया है. बागेश्वर जैसे कई पहाड़ी इलाकों में अब किसान जैविक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. पहाड़ों में अधिकांश परिवार पशुपालन करते हैं, इसलिए खेतों के लिए गोबर की भरपूर उपलब्धता रहती है. लीती गांव निवासी लक्ष्मण कोरंगा बताते हैं कि किसान गोबर से तैयार जैविक खाद का उपयोग करते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है. जैविक खाद मिट्टी में नमी बनाए रखने में भी मदद करती है, जिससे सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है. किसान नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करते हैं, रोगग्रस्त पत्तियों को तुरंत हटा देते हैं. जैविक खेती अपनाने से उत्पादन भले कुछ कम हो, लेकिन गुणवत्ता बेहतर रहती है. कई किसान सीधे उपभोक्ताओं तक भी अपनी जैविक गोभी पहुंचा रहे हैं. उत्तराखंड के बागेश्वर समेत कई पहाड़ी इलाकों में किसान अब जैविक खेती को तेजी से अपना रहे हैं. बंद गोभी भी उन्हीं फसलों में शामिल है, जिसकी खेती बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के की जा रही है. पहाड़ों में अधिकांश परिवार पशुपालन करते हैं, इसलिए खेतों के लिए गोबर की भरपूर उपलब्धता रहती है. किसान गोबर से तैयार जैविक खाद का उपयोग करते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है. पहाड़ों की साफ जलवायु, शुद्ध पानी और उपजाऊ मिट्टी बंद गोभी की अच्छी बढ़वार में मदद करती है. यहां तैयार होने वाली गोभी स्वाद, गुणवत्ता और पौष्टिकता के मामले में अलग पहचान रखती है. स्थानीय किसान इसे प्राकृतिक तरीके से उगाकर बाजार तक पहुंचा रहे हैं. लीती गांव निवासी लक्ष्मण कोरंगा बताते हैं कि पहाड़ के किसान बंद गोभी की खेती में गोबर से तैयार की गई सड़ी हुई काली खाद का इस्तेमाल करते हैं. यह खाद कई महीनों तक गोबर और जैविक अवशेषों को सड़ाकर बनाई जाती है. इसमें किसी भी प्रकार का रासायनिक तत्व नहीं होता, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है. खेत तैयार करते समय किसान सबसे पहले इस खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलाते हैं. इससे पौधों की जड़ों को पर्याप्त पोषण मिलता है, गोभी का विकास बेहतर होता है. जैविक खाद मिट्टी में नमी बनाए रखने में भी मदद करती है, जिससे सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है. पहाड़ों की बंद गोभी मजबूत, हरी और अधिक वजन वाली तैयार होती है. किसान इसे पूरी तरह प्राकृतिक खेती का हिस्सा मानते हैं बंद गोभी की अच्छी खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी और साफ पानी बेहद जरूरी होता है. बागेश्वर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में खेतों की मिट्टी जैविक तत्वों से भरपूर होती है. यहां प्राकृतिक झरनों और गदेरों का पानी सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें किसी तरह का प्रदूषण नहीं होता है. यही पानी फसल की गुणवत्ता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है. पहाड़ों का ठंडा मौसम भी बंद गोभी के लिए अनुकूल माना जाता है. तापमान संतुलित रहने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है, गोभी का सिर मजबूत बनता है. प्राकृतिक वातावरण के कारण यहां रोग और कीटों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम रहता है. इससे किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन लेने में सफल होते हैं. यदि पहाड़ और शहर में उगाई जाने वाली बंद गोभी की तुलना करें तो दोनों में कई अंतर दिखाई देते हैं. पहाड़ों में उगने वाली गोभी का आकार सामान्य तौर पर बड़ा होता है, उसका वजन भी अधिक होता है. इसकी पत्तियां मोटी, हरी और सघन होती हैं. वहीं शहरों के आसपास व्यावसायिक खेती में अक्सर जल्दी उत्पादन के लिए रासायनिक उर्वरकों का उपयोग किया जाता है, जिससे गोभी का आकार छोटा और उत्पादन चक्र तेज हो सकता है. पहाड़ की गोभी का स्वाद अधिक प्राकृतिक माना जाता है. जैविक तरीके से तैयार होने के कारण इसकी गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है, पकने के बाद इसका स्वाद भी अलग महसूस होता है. पहाड़ के किसान सबसे पहले अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का चयन करते हैं. इसके बाद खेत से अलग स्थान पर नर्सरी तैयार की जाती है, जहां जैविक खाद मिलाकर बीज बोए जाते हैं. लगभग एक महीने में पौधे रोपाई योग्य हो जाते हैं. खेत की अच्छी तरह जुताई करने के बाद उसमें गोबर की सड़ी हुई खाद मिलाई जाती है. इसके बाद उचित दूरी पर पौधों की रोपाई की जाती है, ताकि हर पौधे को पर्याप्त जगह और पोषण मिल सके. समय-समय पर निराई-गुड़ाई और हल्की सिंचाई की जाती है. किसान पौधों की नियमित निगरानी भी करते हैं, जिससे किसी भी बीमारी या कीट का समय रहते समाधान किया जा सके. यह पारंपरिक तरीका अच्छी उपज देने में मदद करता है. पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकांश किसान बंद गोभी की फसल को सुरक्षित रखने के लिए प्राकृतिक और घरेलू उपायों का उपयोग करते हैं. कीट नियंत्रण के लिए गोमूत्र, नीम की पत्तियों का घोल और अन्य जैविक मिश्रण तैयार किए जाते हैं. इससे फसल पर रासायनिक दवाओं का प्रभाव नहीं पड़ता और मिट्टी भी सुरक्षित रहती है. किसान नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करते हैं, रोगग्रस्त पत्तियों को तुरंत हटा देते हैं. जैविक खेती अपनाने से उत्पादन भले कुछ कम हो, लेकिन गुणवत्ता बेहतर रहती है. बाजार में भी जैविक सब्जियों की मांग लगातार बढ़ रही है. कई किसान अब पूरी तरह प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकांश किसान बंद गोभी की फसल को सुरक्षित रखने के लिए प्राकृतिक और घरेलू उपायों का उपयोग करते हैं. कीट नियंत्रण के लिए गोमूत्र, नीम की पत्तियों का घोल और अन्य जैविक मिश्रण तैयार किए जाते हैं. इससे फसल पर रासायनिक दवाओं का प्रभाव नहीं पड़ता और मिट्टी भी सुरक्षित रहती है. किसान नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करते हैं, रोगग्रस्त पत्तियों को तुरंत हटा देते हैं. जैविक खेती अपनाने से उत्पादन भले कुछ कम हो, लेकिन गुणवत्ता बेहतर रहती है. बाजार में भी जैविक सब्जियों की मांग लगातार बढ़ रही है. कई किसान अब पूरी तरह प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. जब बंद गोभी का सिर पूरी तरह सख्त और आकार में बड़ा हो जाता है, तब उसकी कटाई की जाती है. किसान तेज धार वाले औजार से गोभी को सावधानीपूर्वक काटते हैं ताकि उसकी बाहरी पत्तियां सुरक्षित रहें. कटाई के बाद गोभी को छायादार स्थान पर रखा जाता है, और फिर स्थानीय बाजारों या मंडियों में भेजा जाता है. पहाड़ की ठंडी जलवायु के कारण गोभी अधिक समय तक ताजा बनी रहती है. स्थानीय बाजारों में इसकी अच्छी मांग रहती है. कई किसान सीधे उपभोक्ताओं तक भी अपनी जैविक गोभी पहुंचा रहे हैं. इससे उन्हें बेहतर कीमत मिलने के साथ उपभोक्ताओं को भी ताजी और सुरक्षित सब्जी उपलब्ध हो रही है.बागेश्वर सहित कई पहाड़ी क्षेत्रों में बंद गोभी की जैविक खेती किसानों की आय बढ़ाने का अच्छा जरिया बन रही है. कम लागत, स्थानीय संसाधनों का उपयोग और जैविक उत्पादन इस खेती की सबसे बड़ी विशेषता है. सरकार भी समय-समय पर किसानों को जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सलाह उपलब्ध करा रही है. यदि किसान आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक ज्ञान का संतुलित उपयोग करें तो उत्पादन और आमदनी दोनों बढ़ सकती हैं. पहाड़ की जलवायु और प्राकृतिक संसाधन जैविक सब्जियों के लिए बेहद अनुकूल हैं. ऐसे में बंद गोभी जैसी फसलों की खेती भविष्य में पहाड़ी किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं

Share4SendTweet3
Previous Post

उत्‍तराखंड में लैंडस्‍लाइड नदियों में उफान आफत की बारिश

Next Post

दून घाटी और साइकिल: चुनौतियां एवं सम्भावनाएं विषय पर दून पुस्तकालय में मंथन

Related Posts

उत्तराखंड

डोईवाला: पेयजल संस्थान में चोरी का छह घंटे में खुलासा, दो गिरफ्तार

October 9, 2026
23
उत्तराखंड

उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित करना समाज की जिम्मेदारी’

October 9, 2026
24
उत्तराखंड

डोईवाला: गढ़भोज दिवस पर खीर बनाकर अनामिका ने हासिल किया प्रथम स्थान

October 9, 2026
53
उत्तराखंड

उत्तराखंड में दस्तावेजों की हेराफेरी पर पारदर्शी ऐडमिशन की चुनौतियां

October 9, 2026
4
उत्तराखंड

मंडल मुख्यालय पौड़ी में कब रौनक लौटेगी सरकार!

October 9, 2026
6
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री धामी ने रेशमा बिष्ट की तलाश के प्रकरण में आवश्यक सहायता का दिया आश्वासन

October 9, 2026
5

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67751 shares
    Share 27100 Tweet 16938
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38079 shares
    Share 15232 Tweet 9520
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37459 shares
    Share 14984 Tweet 9365
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37382 shares
    Share 14953 Tweet 9346

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

डोईवाला: पेयजल संस्थान में चोरी का छह घंटे में खुलासा, दो गिरफ्तार

October 9, 2026

उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित करना समाज की जिम्मेदारी’

October 9, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.