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पहले 2026, फिर 2027 में आयोजित होगी नंदा राजजात

06/07/26
in उत्तराखंड, चमोली
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*हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।*
थराली।
तों क्या 2026 में श्री नंदा देवी बड़ी जात के आयोजन के बाद 2027 में श्री नंदा देवी राजजात यात्रा का आयोजन होगा?! यह बड़ा प्रश्न नंदा देवी के भक्तों के बीच तैर रहा है। जहां एक ओर नंदा देवी सिद्धपीठ कुरूड़ के श्री नंदादेवी बड़ी जात आयोजन समिति ने 5 से 30 सितंबर तक बड़ी जात करने पर अड़ा हुआ हैं, वही लगातार श्री नंदादेवी राजजात समिति 2027 में राजजात यात्रा आयोजित करने की बातें कह रही हैं।इस सब के बीच यात्रा को लेकर नंदा भक्तों के बीच पूरी तरह से असमंजस की स्थिति बनी हुई हैं।
2000 में उत्तराखंड राज्य बनने से पूर्व श्री नंदादेवी राजजात यात्रा का भव्य आयोजन हुआ था, जिससे में भारी संख्या में देश,विदेश के नंदा भक्तों ने बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी की थी, 12 अगस्त से 3 सितंबर तक आयोजित राजजात यात्रा संपन्न होने के 36 वें दिन 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग कर उत्तराखंड अलग राज्य की दर्जा दें दिया गया, इसे नंदादेवी का उत्तराखंडियों आशीर्वाद माना,अलग राज्य बनने के बाद 12 वर्षों के हिसाब से यात्रा का 2012 में आयोजन होना था,किन्तु भादों मास मलमास जाने के कारण उस वर्ष यात्रा के आयोजन को 2013 तक के लिए टाल दिया गया था। 2013 में यात्रा की तैयारियों को युद्ध स्तर शुरू किया गया,16-17 जून को पूरा राज्य भीषण देवी आपदा की चपेट में आ गया इस दौरान भारी मात्रा में जान-माल का नुकसान हुआ राज्य सरकार की अपील एवं मानवीय दृष्टिकोण को देखते हुए राजजात समिति ने यात्रा को स्थगित कर दिया। उसके बाद 2014 में राजजात के आयोजन की तिथियां घोषित की गई,इस दौरान राज्य भी आपदा से उभरने लगा तों आयोजन में केंद्र व राज्य सरकारों ने अपनी भूमिकाएं तय करते हुए आयोजन को अपेक्षित धनराशि के साथ ही देश,विदेश में इस यात्रा का जमकर प्रचार किया, फलस्वरूप 18 अगस्त से 6 सितंबर 2014 के बीच आयोजित यात्रा में अपेक्षा से कई अधिक नंदा भक्तों ने यात्रा में हिस्सेदारी की जिससे आयोजन कमेटी व सरकार भी बेहद उत्साहित हो गई थी,उसी समय राज्य सरकार ने गणना के हिसाब से 2026 में इस यात्रा को हिमालई सचल महाकुंभ की तर्ज पर और भी बड़े स्तर पर आयोजित करने की घोषणा तत्काल सरकार ने कर दी थी। तय वर्ष में आयोजन को लेकर वर्तमान सरकार ने भी 2025 के प्रारंभ महिनों में आयोजन को लेकर बेहद उत्साह दिखाया।इस दौरान मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव सहित बड़े अधिकारियों के द्वारा एक के बाद एक हाईलेवल मीटिंगों का आयोजन का दौरा शुरू किया, सरकार की ओर से आयोजन को लेकर किए जा रहे गंभीर प्रयासों को देखते हुए आयोजन समिति ने भी मैराथन बैठकों का दौरा शुरू कर दिया तब ऐसा लगने लगा था कि 2026 में आयोजित होने वाली राजजात यात्रा 2014 की राजजात से भी भव्य रूप से आयोजित होगी, किंतु अंत में तैयारियां बैठकों तक ही सिमट कर रह गई और जैसे, जैसे 2025 के अंतिम महिनें आतें रहें सरकार व आयोजन समिति सुस्त पड़ने लगी अक्टूबर जाते-जाते 2026 में राजजात के आयोजन होने पर तमाम तरह के प्रश्न उठने लगे, नवंबर से ही आयोजन कमेटी 2026 में प्रस्तावित राजजात यात्रा को स्थगित करनें के बहाने पर बहाने ढूंढने लगी कभी कहां गया कि 17 मई से 15 जून मलमास का महिना जा रहा है ऐसे में पूरी यात्रा सितंबर में होगी तब उच्च हिमालई क्षेत्रों में बर्फबारी का खतरा है,कभी कहा गया कि सरकार की ओर से आयोजन को लेकर पूरी तैयारी नही की गई हैं आदि-आदि बहानेबाजी की जाती रही। 23 जनवरी को बसंत पंचमी के पर्व पर नौटी में राजजात को लेकर मौडिवी अर्थात मनौती मांगी गई जिसमें राजकुंवर डॉ राकेश कुंवर ने विपरीत प्रस्थितियों को देखते हुए 2027 में राजजात आयोजन की घोषणा की उधर श्री नंदादेवी सिद्धपीठ कुरूड़ में भी आयोजन हुआ जिसमें भगवती के पश्वाह ने 2026 में ही कैलाश जाने की इच्छा जताई अर्थात 2026 में ही राजजात आयोजित करने की बात कही, दोनों धुवों से अलग-अलग घोषणाएं होने के बाद देव यात्रा में राजनीति होने लगी जो अब भी जारी है।
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2026 या 2027 श्री नंदादेवी की राजजात को लेकर नौटी चंदपुर वर्सेज कुरूड़ परगना बधाण,दशोली,बण्ड व नंदाक हों गया हैं, जहां एक बधाण का धड़ा चंदपुर का समर्थन कर रहा है तो वही चंदपुर का एक धड़ा बधाण का खुला समर्थन कर रहा है, जिससे आयोजन को लेकर असमंजस और भी अधिक बढ़ रहा है, दोनों पक्ष अपने,अपनी बातों पर अड़े हुए हैं।
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नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ के द्वारा राजजात शब्द को हटा कर पूर्व में प्रचलित “श्री नंदादेवी बड़ी जात” के नाम से सिद्धपीठ कुरूड़ से होम कुंड और वहां से वापस नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा तक का पूर्व में ही कार्यक्रम जारी कर दिया है जारी कार्यक्रम के अनुसार 5 सितंबर को यात्रा कुरूड़ से प्रस्थान करेगी 16 सितंबर को यात्रा होम कुंड पहुंचेगी वहां पर जात के बाद यात्रा वापस लौट कर 30 सितंबर को नंदा उत्सव डोली 6 माह के प्रवास के लिए देवराड़ा मंदिर में विराजमान हो जाएगी।इसी के साथ परगना दशोली,बण्ड व नंदाक ने भी श्री नंदादेवी बड़ी जात आयोजन समिति की ओर से अपने यात्रा रूप का कार्यक्रम जारी कर दिया है। इससे साफ जाहिर हैं कि बड़ी जात होगी ही।
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नंदादेवी बड़ी जात को लेकर राज्य सरकार, प्रशासन अभी तक पूरी तरह से खामोशी अख्तियार किए हुए हैं हालांकि शुक्रवार को मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी की अध्यक्षता में राजजात को लेकर एक बैठक आयोजित की गई जिसमें आयोजन को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए गए किंतु बैठक से ऐसा कोई मैसेज बहार नही आया कि आयोजन की तैयारी बड़ी 2026 के लिए की जानी हैं या कि 2027 की बहरहाल इस बैठक में श्री नंदादेवी राजजात आयोजन समिति के भुवन नौटियाल व श्री नंदादेवी बड़ी जात आयोजन समिति के कर्नल हरेंद्र सिंह रावत भी मौजूद थे।अब जबकि बड़ी जात के लिए करीब 60 दिन ही अवशेष रह गए हैं, बावजूद इसके सरकार व राजजात समिति की खामोशी किसी के पल्ले नही पड़ रही हैं,अगर बड़ी जात यात्रा होम कुंड तक जाती हैं तों सरकार की इसके प्रति कोई जवाबदेही नही है?! हैं तों फिर अपने स्तर पर क्या कर रही हैं, उसे सार्वजनिक करने की आवश्यकता है।
——–
वर्तमान धामी सरकार ने इस इत्तफाक के डर से राजजात यात्रा 2026 के आयोजन से अपने हाथ पीछे पीछे खिंच लिए कि जों भी सरकार राजजात के आयोजन में प्रतिभाग करती हैं, वह अगले चुनावों में सत्ता से बाहर हो जातीं हैं इसी इत्तफाक कहें या और कुछ इतिहास कुछ इसी ओर इशारा कर रहा है। अगर 1987 से 2014 तक के राजजात के आयोजन पर नजर डालें तो कुछ तस्वीर इत्तफाक की ओर ही इशारा कर रही 1987 में यूपी में कांग्रेस की सरकार के समय राजजात का आयोजन हुआ, और राज्य सरकार ने पहली बार सरकार ने यात्रा के आयोजन में अपनी भूमिका सुनिश्चित की किंतु 1989 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और यूपी में जनता दल की सरकार बनी,2000 में राजजात हुईं तब यूपी में भाजपा की सरकार थी राज्य सरकार ने यात्रा में अपनी भागीदारी बढ़ाई और यात्रा को विश्व पटल पर लाने का प्रयास किया जिसमें काफी हदतक सरकार सफल भी रही किंतु 2002-03 में हुएं चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर होना पड़ा और यूपी में बहुजन समाजवादी पार्टी की सरकार बनी,2014 में उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार थी और राजजात के आयोजन में सरकार ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई और देश विदेश में यात्रा को एक नई पहचान मिली किंतु 2017 में हुएं विधानसभा चुनाव में उसे भी सत्ता से हाथ धोना पड़ा राज्य में भाजपा की सरकार बनी जो अपना दूसरा कार्यकाल पूरा कर रही हैं। माना जा रहा है इसी इत्तफाक की जानकारी होते ही एक के बाद एक हाईलेवल मीटिंगों के आयोजनों के बाद धीरे-धीरे धामी सरकार यात्रा के आयोजन से अपने हाथ पीछे खींचने ठीकरा मलमास और उच्च हिमालई क्षेत्रों में सितंबर में बर्फबारी की संभावनाओं के ऊपर फोड़ कर फिलहाल राजजात के आयोजन पर मौन साध लिया हैं। साथ ही नंदादेवी बड़ी जात पर भी बयान बाजी से बचा जा रहा है।

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