डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
सावन का पावन महीना जल्द ही शुरू होने वाला है. ये महीना भगवान शिव की भक्ति का सबसे पवित्र समय माना जाता है. इसी दौरान लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और गंगा जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. उनकी सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार और प्रशासन भी बड़े स्तर पर तैयारियां करता है. साल 2026 में कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगी. 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के दिन श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे. कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और समर्पण की अनूठी मिसाल है. मान्यता है कि श्रद्धा और नियमों के साथ गंगा जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. यात्रा के दौरान कांवड़िए केसरिया वस्त्र पहनते हैं और अपने कंधों पर बांस से बनी कांवड़ उठाकर चलते हैं. कांवड़ के दोनों सिरों पर गंगाजल से भरे पात्र होते हैं. कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली सरकार हर साल विशेष तैयारियां करती हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो. गाजियाबाद में ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए 600 से अधिक ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे. इनके साथ 504 से ज्यादा ट्रैफिक वॉलंटियर और 700 से अधिक सिविल डिफेंस और डिजिटल वॉलंटियर भी अलग-अलग स्थानों पर अपनी सेवाएं देंगे.पूरे कांवड़ मार्ग पर सीसीटीवी कैमरों से 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी. सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी की तैनाती भी रहेगी. इसके अलावा जगह-जगह मेडिकल कैंप, एंबुलेंस, पीने के पानी की व्यवस्था, शुद्ध शाकाहारी भोजन, विश्राम स्थल, मोबाइल शौचालय और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान हर जरूरी सुविधा मिल सके30 जुलाई गुरुवार से शिव भक्त अपने कंधों पर जल उठाकर यात्रा शुरू करेंगे और 10 अगस्त की रात 8 बजे के बाद जल भोलेनाथ को समर्पित करना शुरू कर देंगे. पंचांग के अनुसार, श्रावण कृष्ण पक्ष की त्रिलोक से तिथि का क्षय होने के कारण 11 अगस्त को गंगाजल चढ़ाना शुरू हो जाएगा. त्रयोदशी तिथि को गंगा जल से भोलेनाथ का अभिषेक करके यात्रा पूरी होगी. हर साल हरिद्वार से लाखों शिव भक्त अपनी यात्रा गंगा स्नान पूरी करके शुरू करते हैं और सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करके भोलेनाथ को प्रसन्न करते हैं. धर्म नगरी हरिद्वार बोल-बम बम-बम, हर हर महादेव आदि भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठती है, हर कोई भोलेनाथ की भक्ति में रम जाता है. इस बार भी माहौल ऐसा ही देखने को मिलेगा. पूरे मेला क्षेत्र और रेलवे परिसरों को सुपर जोन, जोन और सेक्टरों में विभाजित कर सुरक्षा प्रबंधन मजबूत करने, प्रमुख स्थलों पर फायर सेफ्टी आडिट कराने तथा आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रखने के निर्देश दिए। इंटरनेट मीडिया पर अफवाह और भ्रामक सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई के लिए हरिद्वार में साइबर कमांडो की विशेष टीम तैनात की जाएगी, जो 24 घंटे साइबर स्पेस और इंटरनेट मीडिया पर निगरानी रखेगी। समय के साथ कांवड़ यात्रा का स्वरूप और व्यापक हुआ है। आज यह यात्रा केवल व्यक्तिगत धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि सामाजिक सहयोग, सेवा भावना और सामूहिक सहभागिता का भी बड़ा उदाहरण बन चुकी है। यात्रा मार्गों पर जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन, चिकित्सा, विश्राम और पेयजल की व्यवस्थाएं की जाती हैं, जिनमें हजारों स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय नागरिक भागीदारी निभाते हैं। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि कांवड़ यात्रा का वास्तविक उद्देश्य भगवान शिव की आराधना के साथ आत्मसंयम, सेवा, सद्भाव और लोककल्याण की भावना को जीवन में उतारना है। यही कारण है कि हर वर्ष सावन आते ही करोड़ों श्रद्धालु इस पावन परंपरा का हिस्सा बनने के लिए उत्साहपूर्वक निकल पड़ते हैं। आज धर्म परंपरा में सिमटने का साधन नहीं है, बल्कि बेलगाम वैश्विक नवउदारवाद के बीच पहचान और प्रतिरोध का एक वैकल्पिक मंच है। हर साल उमड़ने वाली यह तीर्थयात्रा सड़क हादसों, झगड़ों और कहासुनी के कारण कुछ लोगों की जान ले लेती है और कई लोग घायल हो जाते हैं। फिर भी, करोड़ों तीर्थयात्रियों की यह यात्रा आमतौर पर शांतिपूर्ण रहती है। धार्मिक नजरिए से सावन सोमवार का खास महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन पंचामृत से अभिषेक, रुद्राभिषेक और शिव मंत्रों को जाप करने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अगर आप की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, उन लोगों के लिए सावन में की गई पूजा-अर्चना बेहद फलदायी साबित हो सकती है।सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का भी विशेष महत्व है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों से गंगाजल लाकर पैदल यात्रा करते हैं और गंगाजल से शिव मंदिरों जलाभिषेक करते हैं। असल में यह यात्रा न सिर्फ आस्था प्रतीक है, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और विश्वास की एक अनोखी मिसाल भी प्रस्तुत करती है। समय के साथ कांवड़ यात्रा का स्वरूप और व्यापक हुआ है। आज यह यात्रा केवल व्यक्तिगत धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि सामाजिक सहयोग, सेवा भावना और सामूहिक सहभागिता का भी बड़ा उदाहरण बन चुकी है। यात्रा मार्गों पर जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन, चिकित्सा, विश्राम और पेयजल की व्यवस्थाएं की जाती हैं, जिनमें हजारों स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय नागरिक भागीदारी निभाते हैं। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि कांवड़ यात्रा का वास्तविक उद्देश्य भगवान शिव की आराधना के साथ आत्मसंयम, सेवा, सद्भाव और लोककल्याण की भावना को जीवन में उतारना है। यही कारण है कि हर वर्ष सावन आते ही करोड़ों श्रद्धालु इस पावन परंपरा का हिस्सा बनने के लिए उत्साहपूर्वक निकल पड़ते हैं। समय के साथ कांवड़ यात्रा का स्वरूप और व्यापक हुआ है। आज यह यात्रा केवल व्यक्तिगत धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि सामाजिक सहयोग, सेवा भावना और सामूहिक सहभागिता का भी बड़ा उदाहरण बन चुकी है। यात्रा मार्गों पर जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन, चिकित्सा, विश्राम और पेयजल की व्यवस्थाएं की जाती हैं, जिनमें हजारों स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय नागरिक भागीदारी निभाते हैं। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि कांवड़ यात्रा का वास्तविक उद्देश्य भगवान शिव की आराधना के साथ आत्मसंयम, सेवा, सद्भाव और लोककल्याण की भावना को जीवन में उतारना है। यही कारण है कि हर वर्ष सावन आते ही करोड़ों श्रद्धालु इस पावन परंपरा का हिस्सा बनने के लिए उत्साहपूर्वक निकल पड़ते हैं। ।’लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











