• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड की कौणी विलुप्त होती फसल

12/12/25
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
29
SHARES
36
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में काश्तकारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार ने ‘मिलेट पॉलिसी’ के तहत मोटे अनाजों (मिलेट्स) की खेती को बढ़ावा देने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इस नीति का उद्देश्य न केवल किसानों की आय में वृद्धि करना है, बल्कि उत्तराखंड के मोटे अनाजों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना भी है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र के काश्तकारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार मिलेट पॉलिसी के तहत मोटा अनाज को बढ़ावा दे रही है. इसके लिए किसानों को मोटे अनाज उत्पादन के बीज और उर्वरक में 80 फीसदी अनुदान दे रही है. वहीं इसकी बुवाई को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को 4000 रुपये से 1500 प्रति हेक्टेयर धनराशि भी दे रही है जिससे कि किसान अधिक से अधिक मोटा अनाज उत्पादन कर सके.मोटे अनाजों को खाने के अपने फायदे हैं. सरकार भी मिलेट की खेती को लेकर किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. ऐसा ही एक दुलर्भ अनाज है फॉक्सटेल. फॉक्सटेल मिलेट को कौणी या फिर बाजरा के नाम से भी जाना जाता है. वैसे तो कर्नाटक में फॉक्सटेल मिलेट की पैदावार सबसे अधिक होती है. लेकिन उत्तराखंड में की जाने वाली कौणी यानी फॉक्सटेल मिलेट में अधिक पोषक तत्वों की मात्रा पाई जाती है. हालांकि पलायन व खेती से दूर होते किसानों की वजह से इसके उत्पादन में गिरावट आई है.फॉक्सटेल मिलेट (कौणी/बाजरा) दुनिया का सबसे पुराना मिलेट है. फॉक्सटेल मिलेट का रंग हरा होता है पकने पर यह पीला होता है. साथ ही यह स्वाद में हल्का मीठा होता है. इसे गेहूं, चावल के साथ खाया जा सकता है. इसके अलावा कौणी का भात व खीर भी उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में प्रचलित है. कौंणी में  विटामीन बी 12 सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है. उन्होंने बताया  कि अन्य किसी अनाज में विटामिन बी 12 इतनी मात्रा में नहीं मिलता है, इसके साथ कैल्शियम, प्रोटीन कंटेंट भी उच्च मात्रा में पाया जाता है. कौणी में पाये जाने वाले पोषक तत्वों के कारण यह हार्ट की हेल्थ के साथ मेमोरी ग्रोथ में भी कारगर है. कौणी में फाइबर की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, ऐसे में अगर कौणी का भात खाया जाए तो शरीर से सारे विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं. मई-जून में अगर कौणी की फसल को लगाया जाता है तो अगस्त-सितंबर माह तक यह तैयार हो जाती है. उन्होंने बताया  कि उत्तराखंड में बारिश आधारित खेती होती है, लेकिन फॉक्सटेल मिलेट के लिए न अधिक पानी की आवश्यकता होती है, न ही अधिक तापमान की आवश्यकता होती है.ऐसे में कौणी की खेती उत्तराखंड के किसानों के लिए उपयुक्त है. साथ ही बाजार में महंगे दामों पर यह बिकती भी है. कौणी या फॉक्सटेल मिलेट देखने में बिल्कुल लोमड़ी की पूंछ की तरह लगती है. यही कारण है कि इसे फॉक्सटेल के रूप में जाना जाता हैं.उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में फॉक्सटेल की खेती विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी है. ऐसे में अगर किसान फिर से शुरुआत कर फॉक्सटेल मिलेट की खेती करें तो यह फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि उत्तराखंड होने वाले कौणी की पैदावार में हाई वैल्यू पोषक तत्व  पाये जाते हैं.  उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र के काश्तकारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार मिलेट पॉलिसी के तहत मोटा अनाज को बढ़ावा दे रही है. इसके लिए किसानों को मोटे अनाज उत्पादन के बीज और उर्वरक में 80 फीसदी अनुदान दे रही है. वहीं इसकी बुवाई को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को 4000 रुपये से 1500 प्रति हेक्टेयर धनराशि भी दे रही है जिससे कि किसान अधिक से अधिक मोटा अनाज उत्पादन कर सके.  यहां उगाए जाने वाले पारंपरिक फसलों में पोषक तत्वों की भरमार है. यही कारण है कि पहाड़ के लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है. इन पारंपरिक अनाजों को स्थानीय लोक बोली में बारह नाजा अर्थात 12 प्रकार के अनाज के नाम से जाना जाता है. लेकिन बदलते वक्त के साथ पहाड़ के बारह नाजा की फसलें विलुप्त होती नजर आ रही है.पहाड़ के खेत खलिहानों में दम तोड़ते पहाड़ की पारंपरिक फसलों को संरक्षित करने की कवायद भले ही तेज हो गई हो. कौंणी के सेवन से यह खून में ग्लूकोज की मात्रा 70 प्रतिशत तक कम कर देता है। संभवतः इसीलिये पारम्परिक घरेलू नुस्खों में इसको तमाम व्याधियों में सेवन की बात कीजातीहै।कौणी में 9 प्रतिशत तक तेल की मात्रा भी पाई जाती है। विश्व के बहुत से देश इसी वजह से कौंणी को तिलहन के तौर पर भी उपयोग करते हैं। जिसकी वजह से विश्व के कई देशो में कौंणी से तेल का उत्पादन भी किया जाताहै।कौणी की पौष्टिकता और औषधीय उपयोगिता की वजह से विश्वभर में बेकरी उद्योग की पहली पसंद बनता जा रहा है। कौंणी से तैयार किये ब्रेड में अन्य अनाजों से तैयार किये ब्रेड से प्रोटीन की मात्रा 11.49 की अपेक्षा 12.67, वसा 6.53 की अपेक्षाकृत कम 4.70 तथा कुल मिनरल्स 1.06 की अपेक्षाकृत अधिक 1.43 तक पाये जाते हैं।
संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन ने सन 2023 को मिलेट इयर मनाने की घोषणा की है। भारत सरकार के सुझाव पर यह कदम उठाया गया है। यूएन ने इसकी उपयोगिता, औषधीय गुणों और पौष्टिकता को देखते यह कदम उठायाहै।कितनी अजीब बात है कि पौष्टिकता और औषधीय गुणों के बावजूद कौंणी आज उत्तराखण्ड में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुका है। विश्व और भारत के स्तर पर इसको लेकर किये जा रहे प्रयास कितने कारगर होंगे यह तो भविष्य के गर्भ में है।पूरा विश्व मोटे अनाज वर्ष (मिलेट्स ईयर) के रूप में मना हो, लेकिन काश्तकार खासतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों मे रहने वाले किसान इनकी खेती करने से कतरा रहे हैं. इसकी पीछे आधुनिक जीवन शैली की ओर आर्कषण व जंगली जानवरों का फसलों को नुकसान पहुंचाना माना जा रहा है.नई पीढी शहरी जनजीवन मे ढल रही है और खेत बंजर होते जा रहे है इससे प्रदेश मे न केवल खेती सिमट रही है. बल्कि इससे यहां की खास पहचान रही बारह नाजा यानि 12 प्रकार के अनाजों की पारंपरिक फसलों पर भी संकट गहरा रहा है. पर्वतीय क्षेत्रों में परंपरा के रूप मे खेती होती थी जिसमे 12 प्रकार के ऐसे अनाज जिन्हें भारत ही नहीं बल्कि बाहरी देश पोषक तत्वों के लिए बहुतायत मात्रा मे आयात करता है, ये अनाज अब खत्म होने की कगार पर है. आज भी ग्रामीण क्षेत्रों मे इन फसलों को उगाने वाले ग्रामीण इन फसलों के महत्व को भलीभातिं जानते हैं लेकिन नयी पीढ़ी के इन अनाजों का उपयोग न करने से अब ग्रामीण परिवेश में रह रहे लोग इनका उपभोग नहीं करते है. इन फसलों मे मंडवे की रोटी व झंगोरा की खीर से कई संस्थान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं विदेश मे भी इसे लोग उत्तराखंड का गौरव मानने लगे हैं, लेकिन “कोदा-झंगोरा खाएंगे-उत्तराखंड बनाएंगे” जैसे नारों से बने पृथक राज्य उत्तराखंड मे अब यही फसलें अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है. कौणी पहाड़ी परंपरा तथा पूर्वजों से जुड़ा मोटा अनाज है, जो पौष्टिकता से भरपूर है. विलुप्त होते अनाजों का संरक्षण कर हरियाली वैली को मिलेट वैली के रूप में विकसित कर युवा बागवानों को जोड़कर स्वरोजगार की दिशा में भी कार्य योजना तैयार की जा रही है. कौणी सबसे पुरानी मिलेट है, जो अपनी पौष्टिकता के कारण हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा था. बढ़ते पलायन और जलवायु परिवर्तन तथा नवीन बीजों के बढ़ते चलन ने लोगों को कौणी से दूर कर दिया था, जिस कारण कौणी विलुप्त हो गयी. ऐसे मे सरकार इस ओर ध्यान देते हुए तमाम योजनाएं चला रही है.. *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं*

Share12SendTweet7
Previous Post

गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा कड़ी, जिलाधिकारी ने बनायी समन्वित कार्ययोजना

Next Post

मुख्यमंत्री ने किया 112 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण शिलान्यास

Related Posts

उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने खटीमा भ्रमण के दौरान कैंप कार्यालय लोहियाहेड में जनप्रतिनिधियों व जनता से मुलाकात कर जनसमस्याएं सुनी

February 8, 2026
5
उत्तराखंड

बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अधीनस्थ कई स्थानों पर उपेक्षित पड़े मंदिरों का भी कायाकल्प होना जरूरी

February 8, 2026
7
उत्तराखंड

जल को बचाना है तो हमें अपनी परंपराओं की ओर लौटना होगा

February 8, 2026
4
उत्तराखंड

वेद उनियाल विचार मंच के तत्वाधान से चतुर्थ उत्कृष्ट सम्मान समारोह2026

February 8, 2026
7
उत्तराखंड

राजभवन घेराव को ऐतिहासिक बनाने में जुटी कांग्रेस

February 8, 2026
35
उत्तराखंड

अनुशासन, आत्मविश्वास व नियमित अभ्यास ही सफलता की कुंजी: अग्रवाल

February 8, 2026
11

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67641 shares
    Share 27056 Tweet 16910
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45771 shares
    Share 18308 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38042 shares
    Share 15217 Tweet 9511
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37432 shares
    Share 14973 Tweet 9358
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37316 shares
    Share 14926 Tweet 9329

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने खटीमा भ्रमण के दौरान कैंप कार्यालय लोहियाहेड में जनप्रतिनिधियों व जनता से मुलाकात कर जनसमस्याएं सुनी

February 8, 2026

बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अधीनस्थ कई स्थानों पर उपेक्षित पड़े मंदिरों का भी कायाकल्प होना जरूरी

February 8, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.