• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

औषधीय गुणों से भरपूर किलमोड़ा

25/01/21
in उत्तराखंड, हेल्थ
Reading Time: 1min read
702
SHARES
877
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल के पारंपरिक खानपान में जितनी विविधता एवं विशिष्टता है, उतनी ही यहां के फल.फूलों में भी। खासकर जंगली फलों का तो यहां समृद्ध संसार है। यह फल कभी मुसाफिरों और चरवाहों की क्षुधा शांत किया करते थे, बेरवेरीज एरिस्टाटा को पहाड़ में किलमोड़ा के नाम से जाना जाता है। इसकी करीब 450 प्रजातियां दुनियाभर में पाई जाती हैं। भारत, नेपाल, भूटान और दक्षिण.पश्चिम चीन सहित अमेरिका में भी इसकी प्रजातियां हैं। किलमोड़ा का पूरा पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है। इसकी जड़, तना, पत्ती, फूल और फलों से विभिन्न बीमारियों में उपयोग आने वाली दवाएं बनाई जाती हैं। भारत, नेपाल और भूटान में किलमोड़ा की अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं। किलमोड़ा का पूरा पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है।

किल्मोड़ा उत्तराखंड के 1400 से 2000 मीटर की ऊंचाई पर मिलने वाला एक औषधीय प्रजाति है। इसका बॉटनिकल नाम बरबरिस अरिस्टाटा है। यह प्रजाति दारुहल्दी या दारु हरिद्रा के नाम से भी जानी जाती है। इसका पौधा दो से तीन मीटर ऊंचा होता है। मार्च.अप्रैल के समय इसमें फूल खिलने शुरू होते हैं। इसके फलों का स्वाद खट्टा.मीठा होता है। किल्मोड़ा की जड़, तना, पत्ती से लेकर फल तक का इस्तेमाल होता है। मधुमेह में किल्मोड़ा की जड़ बेहद कारगर होती है। इसके अलावा बुखार, पीलिया, शुगर, नेत्र आदि रोगों के इलाज में भी ये फायदेमंद है। होम्योपैथी में बरबरिस नाम से दवा बनाई जाती है। दारू हल्दी की जड़ से अल्कोहल ड्रिंक बनता है।किल्मोड़ा के पौधे में एन्टी डायबिटिक, एन्टी इंफ्लेमेटरी, एन्टी ट्यूमर, एन्टी वायरल और एन्टी बैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं। डायबिटीज के इलाज में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा खास बात ये है कि किल्मोड़ा के फल और पत्तियां एन्टीऑक्सिडेंट कही जाती हैं। एन्टीऑक्सीडेंट यानी कैंसर की मारक दवा। किल्मोड़ा के फलों के रस और पत्तियों के रस का इस्तेमाल कैंसर की दवाएं तैयार करने के लिए किया जा सकता है। पोषक एवं खनिज तत्वों की बात करें तो इसमें प्रोटीन 3.3 प्रतिशत, फाइबर 3.12 प्रतिशत, कॉर्बोहाइडे्रट्स 17.39 मिग्रा प्रति सौ ग्राम, विटामिन.सी 6.9 मिग्रा प्रति सौ ग्राम व मैग्नीशयम 8.4 मिग्रा प्रति सौ ग्राम पाया जाता है। किल्मोड़ा से एक प्राकृतिक रंग भी तैयार किया जाता था, जिसका इस्तेमाल कपड़ों के रंगने में होता था। इसकी जड़, तना, पत्ती, फूल और फलों से विभिन्न बीमारियों में उपयोग आने वाली दवाएं बनाई जाती हैं।

मुख्य रूप से इस पौधे में एंटी डायबिटिक, एंटी ट्यूमर, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी बैक्टीरियल, एंटी वायरल तत्व पाए जाते हैं। मधुमेह के इलाज में इसका सबसे अधिक उपयोग होता है। मुख्य रूप से इस पौधे में एंटी डायबिटिक, एंटी ट्यूमर, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी बैक्टीरियल, एंटी वायरल तत्व पाए जाते हैं। मधुमेह के इलाज में इसका सबसे अधिक उपयोग होता है। डेढ़ दशक से हिमालयी जड़ी.बूटियों के संरक्षण में जुटे हैं। भागीचंद्र टाकुली ने हाल ही में किलमोड़ा की खेती कर पौधे से तेल तैयार किया है। उन्होंने बताया कि करीब सात किलो किलमोड़ा की लकड़ियों से दो सौ ग्राम तेल तैयार हुआ।जड़ी.बूटी के उत्पादन व संरक्षण में जुटे बागेश्वर के एक ग्रामीण ने किलमोड़ा की झाड़ियों से तेल तैयार किया है। खास बात यह है कि शुद्धता के कारण यह तेल लखनऊ की दवा बनाने वाली एक कंपनी को बेहद पसंद आया है। दवाओं के लिए तैयार होने वाला इसका कच्चा तेल सबसे ज्यादा हिमाचल से भेजा जाता है। सदियों से उपेक्षा का शिकार हो रहा ये पौधा बड़े कमाल का है। किलमोड़े के फल में पाए जाने वाले एंटी बैक्टीरियल तत्व शरीर को कई बींमारियों से लड़ने में मदद देते हैं। दाद, खाज, फोड़े, फुंसी का इलाज तो इसकी पत्तियों में ही है। डॉक्टर्स कहते हैं कि अगर आप दिनभर में करीब 5 से 10 किलमोड़े के फल खाते रहें, तो शुगर के लेवल को बहुत ही जल्दी कंट्रोल किया जा सकता है। इसके अलावा खास बात ये है कि किलमोड़ा के फल और पत्तियां एंटी ऑक्सिडेंट कही जाती हैं। एंटी ऑक्सीडेंट यानी कैंसर की मारक दवा। छोटा सा फल बड़े काम का है। वैसे आपको जानकर हैरानी कि अब किलमोड़ा से विदोशों में कैंसर जैसी बीमारी के लिए दवा तैयार की जा रही है किलमोडा के फलों के रस और पत्तियों के रस का इस्तेमाल कैंसर की दवाएं तैयार करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों और पर्यवरण प्रेमियों ने इसके खत्म होते अस्तित्व को लेकर चिंता जताई है। इसके साथ किलमोड़े के तेल से जो दवाएं तैयार हो रही हैं, उनका इस्तेमाल शुगर, बीपी, वजन कम करने, अवसाद, दिल की बीमारियों की रोक.थाम करने में किया जा रहा है।

इसके पौधे कंटीली झाड़ियों वाले होते हैं और एक खास मौसम में इस पर बैंगनी फल आते हैं। पहाड़ के क्षेत्रों में बच्चे इसे बड़े चाव से खाते हैं।शोध के अनुसार प्रति 10 ग्राम किलमोड़ा रस में प्रोटीन 6.2 प्रतिशतए कार्बोहाइड्रेट 32.91 प्रतिशत, पॉलीफेनोल 30.47 मिलीग्राम, संघनित टैनिन 7.93 मिलीग्रामए एस्कॉर्बिक एसिड 31.96 मिलीग्रामए बीटा.कैरोटीन 4.53 माइक्रोग्राम तथा लाइकोपीन 10.62 माइक्रोग्राम जैसे तत्व पाये जाते हैं। यह सभी तत्व हमारे शरीर को स्वस्थ्य रखने तथा कयी प्रकार के घातक रोगों शरीर की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए लोगों को इसकी उत्पादकता को बढ़ाए रखने पर विचार करना चाहिए। यह जूस इतना लोकप्रिय हो रहा है कि इसकी माँग बाहरी राज्यों से भी आ रही है।

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षित सदुपयोग, आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से कृषि आधारित व्यवसायिक व ओद्योगिक समृद्धिकरण के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्र के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि पर्वतीय क्षेत्र से ग्रामीण युवाओं के पलायन को रोका जा सके और पर्वतीय जनों की जीवन शैली में आवश्यक बदलाव लाया जा सके पहाड़ का काश्तकार किलमोड़ा की झाडिय़ों को नष्ट करता है। जबकि इसके इस्तेमाल से दो फायदे होंगे। खेत के चारों तरफ बाउंड्री वॉल के तौर पर लगाकर जंगली जानवरों के नुकसान से बचा जा सकता है। साथ ही फल बेचकर पैसे मिलेंगे। सदियों से उपेक्षा का शिकार हो रहा ये पौधा बड़े कमाल का है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षित सदुपयोग, आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से कृषि आधारित व्यवसायिक व ओद्योगिक समृद्धिकरण के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्र के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि पर्वतीय क्षेत्र से ग्रामीण युवाओं के पलायन को रोका जा सके और पर्वतीय जनों की जीवन शैली में आवश्यक बदलाव लाया जा सकेण् इसलिए लोगों को इसकी उत्पादकता को बढ़ाए रखने पर विचार करना चाहिए।

पहाड़ी क्षेत्र के किसान जो जंगली जानकरों तथा आवारा पशुओं से खेती में हो रहे नुकसान से त्रस्त हैं, वह अपने खेतों में बाढ़ के रूप में किलमोड़ा के कटीले पेड़ लगाकर अपनी फसल को बचा सकते हैं। किसान अपने खेतों की बाढ़ में लगायें गये किलमोड़ा से प्राप्त होने वाली जड़ों को बेचकर भी अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं, बसर्तें इसके लिए सरकार से अनुमति ली होनी चाहिए। उत्तराखण्ड में लोग किल्मोड़ा के जड़ों और तनों का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं के रूप में प्राचीनकाल से करते आये हैं। किल्मोड़ा के औषधीय गुणों को देखते हुए कुमाऊं विश्वविद्यालय के बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग ने इस पर शोध किये और उन्होंने एक मधुमेह निवारक ;एन्टीडायबिटिकद्ध दवा तैयार की। सफल परीक्षण के बाद अमेरिका के इंटरनेशनल पेटेंट सेण्टर से पेटेंट भी हासिल किया। कुमाऊं विश्वविद्यालय का ये पहला इंटरनेशनल पेटेंट है।कुछ समय पहले तक उत्तराखण्ड के पहाड़ी इलाकों में काफी मात्रा में उपलब्ध होता था। लोग इसे सिर्फ एक कंटीली झड़ी के रूप में पहचानते थे। घर पर सामान्य इलाजए जलाने और जंगली जानवरों के बाढ़ हेतु इसका उपयोग होता था। अत्यधिक दोहन और संरक्षण के अभाव में आज किल्मोड़ा की प्रजाति विलुप्ति के कगार पर है। स्थानीय प्रयास और सरकार के सहयोग से लोगों को किल्मोड़ा के संरक्षण और संवर्द्धन काम करना चाहिए। इसके औषधीय गुण रोजगार का जरिया बन सकते हैं।

Share281SendTweet176
Previous Post

मतदाता दिवस पर अधिकारियों-कर्मचारियों ने शपथ ली

Next Post

सात पीसीएस अधिकारी कुंभ मेलाधिकारी से संबद्ध किए गए

Related Posts

उत्तराखंड

मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना-2026 का जल्द होगा शुभारंभ, युवाओं को मिलेगी प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग

August 11, 2026
7
उत्तराखंड

उत्तराखंड में ग्लेशियर तबाही ला सकते हैं !

August 11, 2026
4
उत्तराखंड

*पहाड़ की नियति आज भी कंधों पर ‘जिंदगी’

August 11, 2026
4
उत्तराखंड

तमक गधेरे में वैली ब्रिज बहने के बाद बाधित हुई वाहनों की आवाजाही को जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के त्वरित प्रयासों से सुचारु कर दिया

August 11, 2026
6
उत्तराखंड

डोईवाला : सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान, 12 चालान काटे

August 11, 2026
21
उत्तराखंड

डोईवाला: नगर कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त पदाधिकारियों को बांटे नियुक्ति पत्र

August 11, 2026
21

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67719 shares
    Share 27088 Tweet 16930
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45789 shares
    Share 18316 Tweet 11447
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38074 shares
    Share 15230 Tweet 9519
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37455 shares
    Share 14982 Tweet 9364
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37374 shares
    Share 14950 Tweet 9344

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना-2026 का जल्द होगा शुभारंभ, युवाओं को मिलेगी प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग

August 11, 2026

उत्तराखंड में ग्लेशियर तबाही ला सकते हैं !

August 11, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.