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लीची पर पड़ी मौसम की मार, छोटा किसान परेशान

14/05/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
लीची देखने में जितनी सुंदर, खाने में उतनी ही मीठी। आम के साथ इस फल का भी बेसब्री से इंतजार होता है। इंतजार की घड़ियां खत्म हो गई हैं। दिल्ली के बाजारों में लीची पहुंचने लगी है।हालांकि, इस बार लीची की फसल पर गर्मी ने बुरा प्रभाव डाला है। गर्मी के कारण फूल झड़ गए। इसका असर दिल्ली की आजादपुर मंडी में भी दिख रहा है।भीषण गर्मी और कम बारिश की वजह से इस बार लीची की फसल को खासा नुकसान हुआ है. मौसम में नमी नहीं होने से लीची के फलों में मिठास नहीं है. इस वजह से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं. साथ ही इस बार लीची का आकार छोटा रह गया, जिससे लीची के उत्पादन में असर देखने को मिल रहा है. ऐसे में लीची कारोबारियों को इस बार लीची का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है.गर्मी के मौसम में काम बारिश की वजह से इस बार लीची के स्वाद में खट्टापन आया है, जबकि लीची की मिठास सभी को भाती है. इस बार लीची की फसल कमजोर होने से कारोबारियों के माथे पर चिंता साफ दिखाई दे रही है. किसान राजेंद्र सिंह मेहरा ने बताया इस बार लीची की फसल कमजोर हुई है. आकार में छोटी होने की वजह से कम वजन से ज्यादा लीची चढ़ रही है. बारिश समय पर होती तो लीची के आकार में बढ़ोत्तरी होती. इस बार लीची में मिठास भी नहीं है. बारिश नहीं होने के कारण व ज्यादा गर्मी होने के कारण इस बार लीची में पल्प नहीं बन पाया है.
लीची के दाम की बात करें तो बगीचों से अच्छी लीची 150 रुपये किलो तक बिक रही है, जबकि औसत लीची 100 से 120 किलो बिक रही है. वहीं बाजार की बात करें तो बाजार में अच्छी लीची 180 रुपये किलो मिल रही है. औसत लीची 140 से 150 किलो बिक रही है. मौसम में आए बदलाव के चलते इस बार लीची 10 दिन लेट बाजार में आई है. भीषण गर्मी और बारिश न होने लीची की फसल पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाया है. इस कारण लीची का गुदा (पल्प) नहीं बना और आकार में छोटी हो गई है. लीची नगरी’ के नाम से मशहूर अब देहरादून में लीची के एक-दो बाग ही नजर आते हैं. पुराने वक्त में यहां लीची के पेड़ों के बाग हुआ करते थे, लेकिन धीरे-धीरे अब जनसंख्या बढ़ने के चलते वहां घर बन गए हैं. आज देहरादून की लीची में भी वह मिठास नहीं रही जो पहले हुआ करती थी. बढ़ते प्रदूषण ने मानो के लीची का रूप और स्वाद खराब कर दिया हो.देहरादून के स्थानीय ने बताया कि हम बचपन से देखते बड़े हुए हैं कि दून में बहुत लीची के बाग हुआ करते थे और लोग भी अपने घरों में लीची के पेड़ लगाया करते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है.उनका कहना है कि देहरादून में भीड़ बहुत बढ़ गई है. यहां का मौसम भी बदल गया है. जलवायु परिवर्तन के कारण अब यहां सेब की खेती भी ढंग से नहीं होती है और न लीची की पैदावार अच्छी होती है. वह बताते है कि बेमौसम बरसात और ओले पड़ने के कारण किसानों की फसलें खराब हो जाती है और इसका असर फल और सब्जियों की फसलों पर भी बुरा पड़ रहा है. दून में बहुत लीची के बाग हुआ करते थे और लोग भी अपने घरों में लीची के पेड़ लगाया करते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है.उनका कहना है कि देहरादून में भीड़ बहुत बढ़ गई है. यहां का मौसम भी बदल गया है. जलवायु परिवर्तन के कारण अब यहां सेब की खेती भी ढंग से नहीं होती है और न लीची की पैदावार अच्छी होती है. वह बताते है कि बेमौसम बरसात और ओले पड़ने के कारण किसानों की फसलें खराब हो जाती है और इसका असर फल और सब्जियों की फसलों पर भी बुरा पड़ रहा है.  मुआवजे को लेकर किसान आशीष बताते हैं कि पॉली हाउस इत्यादि के मेंटेनेंस के लिए तो सरकार मदद करती है, लेकिन पारंपरिक किसानों को मुआवजे को लेकर किसानों को धरातल पर उतनी तत्परता से लाभ नहीं मिल पाता है. इस फल में पानी की मात्रा काफी होती है। यह विटामिन सी, पोटैशियम और नेचरल शुगर का अच्छा सोर्स है। इससे शरीर को ठंडक मिलती है। लीची में मौजूद विटामिन लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और पाचन क्रिया के लिए आवश्यक है। लीची में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन-सी, विटामिन-ए और बी कॉम्प्लेक्स, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, आयरन जैसे खनिज लवण पाए जाते हैं। लीची एक अच्छा एंटीऑक्सिडेंट है। लीची में घुलनशील फाइबर भी होता है, जो मोटापा कम करने का अच्छा उपाय है। यहां की लीची का स्वाद अलग ही मिठास से भरा होता है. इसीलिए इस लीची को जीआई टैग भी मिला वैसे तो लीची की फसल साल दर साल बेहद कम हो रही है, लेकिन इस साल लीची पिछले साल के मुकाबले और भी खराब स्थिति में है. ऐसा मौसम की बेरुखी के कारण हुआ है. एक तरफ जहां गर्मी के फल को पर्याप्त गर्मी का मौसम नहीं मिल पाया है तो वहीं बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के कारण यह फसल बर्बाद हो रही है. एक आकलन के अनुसार इस साल अब तक करीब 10 प्रतिशत लीची तो तेज हवाओं के कारण समय से पहले ही गिर गई है. किसी समय में रसीली और स्वादिष्ट लीचियों के लिए प्रसिद्ध देहरादून की लीचियों का वो स्वाद कहीं खो गया है और दून की प्रसिद्ध लीचियों की डिमांड अब कम होती जा रही है। किसी समय में देश और दुनिया में देहरादून की लीचियां बेहद प्रसिद्ध हुआ करती थीं और मार्केट में उनकी भारी डिमांड थी। मगर बदलते मौसम के साथ देहरादून की लीची भी बेरंग हो गई है और सालों से बरकरार अपनी पहचान कहीं खोती जा रही है। देहरादून अपने मौसम के साथ यहां की लीची के लिए भी जाना जाता था मगर बदलते मौसम के साथ लीची की पैदावार और स्वाद दोनों में गिरावट देखने को मिली है। ऐसा हम नहीं आंकड़े बता रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार देहरादून में लीची की पैदावार साल दर साल कम होती जा रही है और लीची की डिमांड भी बाजार में कम होती जा रही है। किसी जमाने में लाल-लाल रसभरी लीचियों के लिए मशहूर देहरादून के लीचियों में अब वह बात नहीं रही जो पहले हुआ करती थी। राजधानी देहरादून में आधुनिकता बढ़ रही है। हर चीज में विकास हो रहा है मगर देहरादून की यह धरोहर उससे छूट रही है। छोटे मोटे किसान तो दो साल पहले ही इस फसल से संतोष कर चुके हैं लेकिन जो बडे किसान हैं वो इस बार पूरी तरह से बर्बाद हो रहे हैं.उनके पेड़ों पर 20 फीसदी ही लीची लगी है खर्चे ज्यादा हो गया. स्वाद और फल भी सही नहीं है.देहरादून में बदलते वातावरण के बीच उसकी असली पहचान कहीं ना कहीं अंधेरे में जा रही है लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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*ज्वैलरी शॉप चोरी कांड में महाराष्ट्र की ‘बुजुर्ग टोली’ के छह सदस्य गिरफ्तार* डोईवाला, (प्रियांशु सक्सेना)। नगर चौक स्थित एक ज्वैलरी शॉप में हुई चोरी की घटना में शामिल महाराष्ट्र की बुजुर्ग टोली के छह सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी किए गए शत-प्रतिशत जेवर भी बरामद कर लिए हैं। बताया गया कि बीती 08 मई को कंचन ज्वैलर्स में कुछ अज्ञात पुरुष और महिला खरीदारी के बहाने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने दुकानदार को बातों में उलझाकर दुकान में रखी सोने की छह चैन चोरी कर लीं और फरार हो गए। कोतवाली पुलिस के अनुसार, दुकान स्वामी सुरेंद्र कक्कड़ की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। प्रभारी निरीक्षक कमल कुमार लूंठी ने बताया कि घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच के दौरान घटना में शामिल संदिग्धों की फुटेज प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि रेलवे स्टेशन हर्रावाला, डोईवाला से घटना में शामिल पांडुरंग (76), वासुदेव (57), सतीश नामदेव शिंदे (39), मनीष मनोहर मोरे (46), मंगेश सुर्वे (34) और विमल (80) निवासी महाराष्ट्र को गिरफ्तार किया गया, जिनके कब्जे से घटना में चोरी की गई शत प्रतिशत ज्वैलरी (अनुमानित कीमत करीब 07 लाख रू) बरामद हुई। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह सभी लोग मूल रूप से महाराष्ट्र के निवासी है और टोली बनाकर विभिन्न ज्वैलरी दुकानों को चिन्हित करते हैं। इसके बाद सभी सदस्य ग्राहक बनकर दुकान में प्रवेश करते हैं, जहां कुछ लोग दुकानदार को बातचीत में उलझा लेते हैं, जबकि अन्य सदस्य मौका पाकर आभूषण चोरी कर लेते हैं। घटना को अंजाम देकर तुरन्त ही अपने मूल निवास महाराष्ट्र के लिए निकल जाते है। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी घटना के बाद ट्रेन से महाराष्ट्र भागने की फिराक में हर्रावाला रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, तभी उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

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