डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
देवभूमि उत्तराखंड अतीत से ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती रही है. यहां की शांत वादियां और हिमाच्छादित पर्वत मालाएं लोगों के मन को सुकून से भर देती हैं. उत्तराखंड में कई ऐसे पर्यटक स्थल हैं, जहां साल भर सैलानियों का तांता लगा रहता है.उत्तराखंड के सीमांत इलाकों में स्थित आईटीबीपी की कई पोस्टें आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं. अब इन दुर्गम क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने सीमावर्ती इलाकों में स्थित आईटीबीपी पोस्टों तक ग्रिड से बिजली पहुंचाने की योजना तैयार की है. इसके तहत उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के कई बॉर्डर क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की जाएगीदरअसल, उत्तराखंड के सीमांत और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में तैनात भारत तिब्बत सीमा पुलिस की कई पोस्टें आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से पूरी तरह वंचित हैं. कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के कारण इन चौकियों पर जवानों को अब तक जनरेटर, सोलर पैनल या अन्य अस्थायी साधनों के सहारे काम चलाना पड़ता था. हालांकि अब इन दुर्गम सीमावर्ती इलाकों तक स्थायी बिजली पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. यूपीसीएल ने सीमांत क्षेत्रों में स्थित आईटीबीपी पोस्टों को सीधे ग्रिड से जोड़ने की विस्तृत योजना तैयार की है. इस योजना के तहत राज्य के उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिले के कई सीमावर्ती इलाकों में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था विकसित की जाएगी. योजना के पहले चरण में उत्तरकाशी जिले में स्थित आईटीबीपी की उत्तरकाशी-1 और उत्तरकाशी-2 पोस्टों तक ग्रिड से बिजली पहुंचाने की तैयारी की जा रही है. इसके अलावा माना वैली और निति वैली जैसे दूरस्थ इलाकों को भी इस योजना में शामिल किया गया है, जहां सीमा सुरक्षा के लिहाज से आईटीबीपी की अहम तैनाती रहती है. इन क्षेत्रों में अब तक बिजली की स्थायी व्यवस्था नहीं होने से जवानों और वहां तैनात अन्य कर्मियों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था. अब ग्रिड से कनेक्शन मिलने के बाद न सिर्फ चौकियों पर ऊर्जा की स्थिर आपूर्ति संभव होगी, बल्कि संचार और सुरक्षा से जुड़े उपकरणों को भी बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकेगा. इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अलग-अलग स्थानों पर नए सब-स्टेशन स्थापित किए जाएंगे और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में लंबी दूरी तक बिजली की लाइनें बिछाई जाएंगी. पहाड़ों की भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए यह काम तकनीकी और लॉजिस्टिक दृष्टि से काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना पूरी होने के बाद सीमांत इलाकों में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था काफी मजबूत हो जाएगी और सीमा पर तैनात जवानों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी. साथ ही इन इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











