• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

मोबाइल की मोहब्बत से युवाओं की रातों की नींद उड़ रही है

10/04/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
18
SHARES
22
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. बच्चे, युवा, महिलाएं सभी इसका खूब उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा उपयोग लोगों को मानसिक और शारीरिक बीमारियां दे रहा है. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव पड़ता है, साथ ही मानसिक थकान भी बढ़ती है. मोबाइल का अधिक उपयोग व्यक्ति की आंतरिक ऊर्जा को कमजोर करता है. बच्चों में रचनात्मकता कम हो रही है, क्योंकि वे खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों की बजाय मोबाइल पर ज्यादा समय बिता रहे हैं. इससे एकाग्रता भी घट रही है और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है. युवा देर रात तक सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती और वे तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं से घिर जाते हैं. लगातार मोबाइल उपयोग से महिलाओं में मानसिक थकान और असंतुलन बढ़ रहा है. आज घर घर में बच्चे और युवा धड़ल्ले से मोबाइल पर स्क्रीनिंग कर रहे है। उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं है की यह उनके स्वास्थ्य और पढ़ाई के लिए कितना खतरनाक है। मीडिया में युवा पीढ़ी को मोबाइल लत के खतरे से लगातार आगाह किया जा रहा है। अनेक युवा इसके दुष्परिणामों के शिकार होकर अस्पतालों में अवसाद का इलाज़ करा रहे है। सेंसर टावर की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अपने देश में गत वर्ष मोबाइल पर 1.12 ट्रिलियन घंटे स्क्रीनिंग की गई जो दुनियाभर में सर्वाधिक आंकी गई है। इससे पता चलता है 18 वर्ष की आयु सीमा के 40 करोड़ बच्चे में से हर तीसरा बच्चा मोबाइल अवसाद का शिकार है, जिनकी संख्या 13 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। इसी भांति एक अन्य नई रिसर्च के मुताबिक मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप जैसे गैजेट्स न केवल बच्चों के स्वास्थ्य अपितु उनके शैक्षिक जीवन के लिए भी खतरा बन रहे है। टेक्नोलॉजी के इस दौर में बच्चे मोबाइल फोन, टैबलेट से ही अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। खासकर कोविड में ऑनलाइन पढ़ाई के बाद उनके बीच पीन टाइम बहुत बढ़ा है। पांच हजार से ज्यादा कनाडाई बच्चों पर साल 2008 से 2023 तक चली एक रिसर्च बताती हैं कि बढ़ते पीन टाइम के कारण बच्चों में बेसिक मैथ्स और पढ़ने की समझ ठीक से विकसित नहीं हो पा रही है। यहां तक कि स्क्रीन टाइम की वजह से बच्चों के मार्क्स में 10 फीसदी तक कमी आई है। एक अन्य रिपोर्ट में यह सामने आया है कि 73 प्रतिशत स्कूली बच्चे अश्लील सामग्री देखते हैं। वहीं, 80 प्रतिशत बच्चे रोज़ाना सोशल मीडिया पर कम से कम 2 घंटे बिताते हैं। इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई, सोचने-समझने की क्षमता और व्यवहार पर पड़ रहा है। मोबाइल आपका दोस्त है या दुश्मन। बिना विलंब किए इस पर गहनता से मंथन की जरुरत है। आजकल मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों को इंटरनेट एडिक्शन की तरफ ले जा रहा है। एक स्टडी रिपोर्ट में एक बार फिर मोबाइल के खतरे से सावचेत किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है पैरेंट्स बिना सोचे-समझे सिर्फ दो-ढाई साल के बच्चों के हाथ में मोबाइल थमा देते हैं। इसके बाद बिना मोबाइल यूज किए बच्चा खाना तक नहीं खाता है। हालांकि इंफॉर्मेशन, टेक्नॉलोजी और एआई के दौर में मोबाइल का इस्तेमाल जरूरी है। लेकिन छोटे-छोटे बच्चों को मोबाइल देने की क्या जरूरत है? अगर आप भी मोबाइल एडिक्शन को सीरियसली नहीं ले रहे हैं, तो आपको बता दें कि सेलफोन आपके बच्चों का सबसे बड़ा दुश्मन बन रहा है। कच्ची उम्र में बच्चों को डिजिटल डिमेंशिया जैसी घातक बीमारी हो सकती है। ब्रिटेन में हुई स्टडी के मुताबिक दिन में 4 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम से वैस्कुलर डिमेंशिया और अल्जाइमर का जोखिम बढ़ जाता है। फोन पर घंटो पॉल करने पर ढेरों फोटोज, एप्स, वीडियोज सामने आते हैं जिससे आपके दिमाग के लिए सब कुछ याद रखना मुश्किल हो जाता है। परिणाम स्वरूप आपकी याद्दाश्त, कॉन्संट्रेशन और सीखने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। स्क्रीन टाइम ज्यादा होने का सबसे पहला असर बच्चों की आंखों की रोशनी पर पड़ रहा है। पीन को नजदीक और एकटक देखने से आंखें ड्राई होने लगती हैं यही हालात रहने पर आंखों की रोशनी कम होने लगती है। मोबाइल बच्चों का दोस्त है या दुश्मन। बिना विलंब किए अभिभावकों को इस पर गहनता से मंथन की जरुरत है। आजकल मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों को इंटरनेट एडिक्शन की तरफ ले जा रहा है। इस तरह के एडिक्शन से मानसिक बीमारियां पैदा होती हैं और ऐसे में बच्चे कोई न कोई गलत कदम उठा लेते हैं। आजकल के बच्चे इंटरनेट लवर हो गए हैं। इनका बचपन रचनात्मक कार्यों की जगह डेटा के जंगल में गुम हो रहा है। पिछले कई सालों में सूचना तकनीक ने जिस तरह से तरक्की की है, इसने मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है बल्कि एक तरह से इसने जीवनशैली को ही बदल डाला है।आज के समय में घंटों मोबाइल का उपयोग, जंक फूड का बढ़ता शौक और शारीरिक सक्रियता में कमी युवाओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन गई है। देहरादून के अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले 20 से 35 वर्ष के युवाओं में से लगभग 10 से 15 प्रतिशत मरीज फैटी लीवर, बढ़ते कोलेस्ट्रॉल और माइग्रेन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, डिजिटल स्क्रीन के सामने ज्यादा वक्त बिताने और गलत तरीके से बैठने के कारण युवाओं में गर्दन और कमर दर्द (सर्वाइकल) की समस्या तेजी से बढ़ रही है।देर रात तक जागना, मोबाइल देखते हुए खाना खाना और बाहर के जंक फूड पर निर्भरता ने युवाओं के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ दिया है। घंटों सोशल मीडिया रील्स और वीडियो देखने की लत ने शारीरिक व्यायाम को लगभग खत्म कर दिया है, जिससे मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। यही कारण है कि युवाओं में अब वो बीमारियां देखी जा रही हैं जो पहले केवल अधिक उम्र के लोगों में होती थीं, जैसे कि लीवर की समस्याएं और हाई कोलेस्ट्रॉल।वे एक ऐसी काल्पनिक दुनिया में जीने लगे हैं जहां असली रिश्तों और धैर्य की कोई जगह नहीं बची है. आज की दुनिया में मोबाइल हर किसी को अपना गुलाम बना रहा है. मोबाइल की रोशनी सीधे तौर पर आंखों को नुकसान पहुंचाती है. इसका सबसे बुरा असर छोटे बच्चों पर हो रहा है क्योंकि वे इसके आदि हो चुके हैं. उन्हें खाना खाने से लेकर पढ़ाई तक, हर काम में बस मोबाइल चाहिए.डॉक्टर ने सलाह दी है कि बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए सबसे पहले माता-पिता को उनके सामने मोबाइल का इस्तेमाल कम करना होगा. छोटे बच्चों को कम से कम 2 से 3 साल की उम्र तक टीवी या मोबाइल की स्क्रीन बिल्कुल न दिखाएं. बच्चों के हाथ में मोबाइल देने के बजाय उनके साथ समय बिताएं, उनके साथ खेलें और उन्हें पढ़ाई में मदद करें. अगर घर के बड़े ही बच्चों को मोबाइल चलाना सिखाएंगे, तो उसका सीधा असर उनकी आंखों और दिमाग पर पड़ेगा. इससे बच्चा जिद्दी हो जाता है, सबसे दूरियां बनाने लगता है और वह शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है.  इकोनॉमिक सर्वे 2025–26 में कहा गया है कि तेज़ी से ऑनलाइन होती दुनिया में रहने वाले भारत के युवाओं के लिए डिजिटल लत एक बड़ी और बढ़ती समस्या बन रही है. सर्वे में कहा गया है कि भारत को सिर्फ डिजिटल सुविधा देने पर ही नहीं, बल्कि व्यवहार से जुड़ी सेहत की समस्याओं जैसे डिजिटल लत, कंटेंट की क्वालिटी, लोगों की भलाई पर पड़ने वाले असर और डिजिटल साफ-सफाई पर भी ध्यान देना चाहिए. इस समस्या से निपटने के लिए, युवाओं को मोबाइल फोन के उपयोग को सीमित करने के लिए जागरूकता और स्व-नियंत्रण की आवश्यकता है। अभिभावकों और शिक्षकों को भी इस दिशा में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए, ताकि युवा अपने समय का सदुपयोग कर सकें और एक स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकें। सर्वे में कहा गया है, “जहां मोटापा और सही पोषण की कमी युवाओं के शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है, वहीं डिजिटल लत उनके मानसिक और सामाजिक विकास को कमजोर करती है. ये सभी एक-दूसरे से जुड़ी समस्याएं हैं और अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य और मानव संसाधन को बचाने के लिए पॉलिसी की ज़रूरत को दिखाती हैं.” भारत की चुनौती यह है कि युवाओं की भागीदारी को दोबारा संतुलित किया जाए, जहां सुरक्षा से जुड़े नियम भी हों और ऑफलाइन सकारात्मक मौके भी मिलें, न कि तकनीक को पूरी तरह गलत बताया जाए.”लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share7SendTweet5
Previous Post

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में नैनीताल एवं ऊधमसिंहनगर जनपद की विभिन्न विधानसभाओं से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा की

Next Post

उत्तराखंड आंधी से फल पट्टी उजड़ी

Related Posts

उत्तराखंड

अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कालेज देवाल में शिक्षक अभिभावक संघ का नरेंद्र सिंह बिष्ट को अध्यक्ष एवं प्रवक्ता केएस बिष्ट को पदेन सचिव चुना गया

July 13, 2026
2
उत्तराखंड

थराली- कुराड़- पार्था मोटरमार्ग के किलोमीटर 2 पर घांघली गधेरे में मलबा, पत्थर, बोल्डरों और पेड़ आने से सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त

July 13, 2026
3
उत्तराखंड

हरेला सप्ताह: 130 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) इकोलॉजिकल कुमाऊँ ने सुवाकोट में लगाए दस हजार पौधे

July 13, 2026
3
उत्तराखंड

उत्तराखंड के मोटे अनाज बचा सकते हैं पर्वतीय क्षेत्र की अर्थव्यवस्था

July 12, 2026
11
उत्तराखंड

राज्य आंदोलनकारी सयुंक्त परिषद के अध्यक्ष नवनीत गुसांई के आकस्मिक निधन पर शोक जताया

July 12, 2026
27
उत्तराखंड

डोईवाला : 25 हजार का इनामी अभियुक्त छह महीने बाद हरिद्वार से गिरफ्तार

July 12, 2026
56

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67712 shares
    Share 27085 Tweet 16928
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45786 shares
    Share 18314 Tweet 11447
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38066 shares
    Share 15226 Tweet 9517
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37453 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कालेज देवाल में शिक्षक अभिभावक संघ का नरेंद्र सिंह बिष्ट को अध्यक्ष एवं प्रवक्ता केएस बिष्ट को पदेन सचिव चुना गया

July 13, 2026

थराली- कुराड़- पार्था मोटरमार्ग के किलोमीटर 2 पर घांघली गधेरे में मलबा, पत्थर, बोल्डरों और पेड़ आने से सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त

July 13, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.