• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड में 50% घटी मोटे अनाज की खेती, विलुप्ति की कगार पर 13 प्रजातियां

09/05/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
4
SHARES
5
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला

उत्तराखंड देश विदेश में अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है. यहां अनेक प्रकार की जड़ी बूटी से लेकर अनेक प्रकार के अनाजों का उत्पादन किया जाता है. इस उत्पादन की सबसे बड़ी खूबी ये होती है कि ये सभी चीजें प्राकृतिक और ऑर्गेनिक रूप से उगाई जाती हैं. बदलते वक्त के साथ अब उत्तराखंड के ऑर्गेनिक उत्पादन पर मानों किसी की नजर सी लग गई है 2000 में जहां उत्तराखंड में मोटे अनाज की 23 फसलों की खेती होती थी, वह 25 साल बाद कम होकर मात्र 10 फसलें ही रह गई हैं जिनकी खेती वर्तमान समय में की जा रही है. यह उत्तराखंड की खेती के लिए कोई शुभ संकेत नहीं है. चीणा, कोणी, फाफर, जौ आदि ऐसी फसल है, जो विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी है.भले ही देश (मोटे अनाज) के प्रति लोगों को जागरूक कर रहा हो, लेकिन मोटे अनाज की पैदावार में कमी देखने को मिल रही है. उत्तराखंड में सदियों से मोटे अनाज की पारंपरिक खेती होती आ रही है. यहां इन्हें बारह नाजा (12 अनाज) के नाम से भी जाना जाता है. वर्तमान में उत्तराखंड से मोटे अनाज की खेती करने से किसान बच रहे हैं. किसान पारंपरिक खेती छोड़ अब अन्य रोजगार के साधनों की ओर जा रहे हैं. जिसका सीधा असर मोटे अनाज (मडुवा, चोलाई, दाल, कोणी, झंगोरा आदि) की खेती पर पड़ रहा है. किसान भी अब मोटे अनाजों की खेती से दूरी बना रहे हैं. इसे लेकर किसानों के भी अपने तर्क है. विभाग द्वारा चमोली व चंपावत जिले के 3000 किसानों का सर्वेक्षण किया, जिसमें यह पाया गया कि 2011 में जो 2.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल मोटे अनाजों के लिए था, वह घटकर 2023 में 1.20 लाख हेक्टेयर मात्र ही रह गया है. अगर ऐसा ही चलता रहा तो 2030 तक मंडुवा, झंगोरा व चौलाई का क्षेत्रफल 73 हजार हेक्टेयर ही रह जायेगा. वह कहते हैं कि पर्वतीय क्षेत्र के किसान पारंपरिक तरीके से जैविक खेती करते हैं, बहुत कम किसानों को मालूम है कि जैविक अनाजों के दाम महंगे होते है, लेकिन बिचौलिये इनसे ओने-पौने दामों पर खरीद लेते हैं. ग्रामीण बताती है कि उनके यहां मंडुवा, कोदा, झंगोरा उगाया जाता है, लेकिन जंगली जानवरों के डर से अब उन्होंने खेती कम कर दी है. कहती हैं कि बंदर, जंगली सुअर पूरी फसल को बर्बाद कर देते हैं. कहती हैं कि मेहनत के अनुसार लाभ न मिलने के कारण गांव में भी कोई खेती नहीं करना चाहता है. केवल अपने उपयोग के लिए ही फसलें उगाई जाती है. प्रोफेसर सती का कहना है कि वर्तमान में जंगली जानवरों के कारण खेती पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. साथ ही किसानों को उनके अनाज का अच्छा दाम न मिल पाना, मौसम परिवर्तन के चलते फसलों का खराब होना भी किसानों के खेती से मुंह मोड़ने के कारण हैं. कहा कि इस विषय पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है. हालांकि मिलेट वर्ष घोषित करने के बाद से मोटे अनाजों के प्रति पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित हुआ है. ऐसे में अगर मिलेट पॉलिसी बने, तो किसानों को भी फायदा मिल सकता है. स्टेट मिशन मिलेट के अंतर्गत मंडुवा, झंगोरा व रामदाना जैसे मोटे अनाज का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए घाटियों एवं अन्य क्षेत्रों में ऐसी बेकार पड़ी कृषि योग्य भूमि तलाशी जा रही है, जिसमें इनकी खेती हो सकती है। इसके पीछे सरकार की मंशा क्षेत्रफल बढ़ाकर उत्पादन में बढ़ोतरी करना है, ताकि श्रीअन्न की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।उत्तराखंड में पहाड़ से लेकर मैदान तक अलग-अलग भू-आकृतियां हैं। स्थान की ऊंचाई के साथ जलवायु और वनस्पतियां बदलती रहती हैं।पहाड़ में बजरी व हल्की बनावट वाली मिट्टी होती है, जो लंबे समय तक पानी नहीं रखती। इसे मंडुवा, झंगोरा, रामदाना जैसे स्माल मिलेट के लिए उपयुक्त माना जाता है। ये फसलें अपने लचीलेपन के लिए जानी जाती हैं। यानी ये विविध परिस्थितिक स्थिति में तालमेल बैठाने में सहायक होती हैं। यही कारण है कि राज्य के 10 पर्वतीय जिलों में इनकी खेती होती आई है।  ये फसलें पूरी तरह जैविक होने के कारण इनकी मांग भी अधिक है। बावजूद इसके, मोटे अनाज का क्षेत्रफल घट रहा है। कुल मिलाकर, बदलते मौसम और जल संकट के दौर में सही फसल का चयन ही किसानों के लिए एक सफलता की कुंजी है. अगर किसान बाजरा, ज्वार, अरहर, चना, सरसों के साथ-साथ भिंडी, लौकी और मिर्च जैसी सब्जियों की खेती अपनाएं, तो वे कम पानी में भी अच्छी पैदावार लेकर सालों-साल मुनाफा कमा सकते हैं. वही थोड़ी योजना और समझदारी से खेती को नुकसान से बचाकर फायदा का सौदा बनाया जा सकता है. ग्रामीण बताती है कि उनके यहां मंडुवा, कोदा, झंगोरा उगाया जाता है, लेकिन जंगली जानवरों के डर से अब उन्होंने खेती कम कर दी है. कहती हैं कि बंदर, जंगली सुअर पूरी फसल को बर्बाद कर देते हैं. कहती हैं कि मेहनत के अनुसार लाभ न मिलने के कारण गांव में भी कोई खेती नहीं करना चाहता है. केवल अपने उपयोग के लिए ही फसलें उगाई जाती है. प्रोफेसर सती का कहना है कि वर्तमान में जंगली जानवरों के कारण खेती पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. साथ ही किसानों को उनके अनाज का अच्छा दाम न मिल पाना, मौसम परिवर्तन के चलते फसलों का खराब होना भी किसानों के खेती से मुंह मोड़ने के कारण हैं. कहा कि इस विषय पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है. हालांकि मिलेट वर्ष घोषित करने के बाद से मोटे अनाजों के प्रति पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित हुआ है. ऐसे में अगर मिलेट पॉलिसी बने, तो किसानों को भी फायदा मिल सकता है.। सरकार मोटे अनाजों को वैश्विक ब्रांड बनाने की कोशिश में लगी है। देशभर में मिलेट्स महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन इन सबके बीच उत्तराखंड से एक चिंता बढ़ाने वाली खबर आई है। उत्तराखंड में मोटे अनाज की खेती 50 प्रतिशत घटी है। यहां मोटे अनाज की 13 प्रजातियां विलुप्ति की कगार पर हैं। लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share2SendTweet1
Previous Post

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि.) ने शनिवार को भगवान बद्रीविशाल के दर्शन कर पूजा-अर्चना की

Next Post

टूरिस्ट संदेश फाॅउण्डेशन के तत्वाधान में नशामुक्ति जागरूकता अभियान के तहत भाषण प्रतियोगिता का आयोजन

Related Posts

उत्तराखंड

मातृ दिवस पर छात्राओं की लघु नाटिका ने नम कीं आंखें’

May 9, 2026
5
उत्तराखंड

*‘मातृ दिवस पर छात्राओं की लघु नाटिका ने नम कीं आंखें’* डोईवाला, (प्रियांशु सक्सेना)। नगर के पब्लिक इंटर कॉलेज में मातृ दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्राओं ने मां की ममता और त्याग को दर्शाती प्रस्तुतियों के माध्यम से सभी को भावुक कर दिया। मई माह के दूसरे रविवार को मनाए जाने वाले मदर्स डे पर कक्षा 11 की छात्राओं ने ‘मां की ममता’ विषय पर लघु नाटिका प्रस्तुत की। नाटिका में दिखाया गया कि एक मां जीवनभर संघर्ष और कठिनाइयों का सामना कर अपने बच्चों को सफल बनाने के लिए समर्पित रहती है। प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों की आंखें नम कर दीं। लघु नाटिका की मुख्य पात्रा जिया ने एक भावपूर्ण गीत भी प्रस्तुत किया। छात्राएं जोया, सना सहित अन्य बच्चों ने भी अभिनय कर सराहना बटोरी। प्रधानाचार्य अंकित डोबरियाल ने कहा कि मातृ दिवस केवल एक सामान्य दिवस नहीं, बल्कि मां के प्रति हमारे कर्तव्यों और सम्मान को समझने का अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से माता-पिता की भावनाओं का सम्मान करने और उन्हें हमेशा प्राथमिकता देने का आह्वान किया। हिंदी विभागाध्यक्ष अश्वनी गुप्ता ने मदर्स डे के साथ-साथ महाराणा प्रताप जयंती पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में पूजा जोशी, ओमप्रकाश काला, भुवनेश वर्मा, रत्नेश द्विवेदी, विवेक बधानी, तेजवीर सिंह, सुदेश सहगल, राधा गुप्ता, चारू वर्मा, अर्चना पाल, राजीव कंडवाल, श्यामानंद और गौरव रावत आदि रहे।

May 9, 2026
3
उत्तराखंड

उत्तराखंड में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर यूकेडी का प्रदर्शन, सरकार का पुतला फूंका

May 9, 2026
5
उत्तराखंड

टूरिस्ट संदेश फाॅउण्डेशन के तत्वाधान में नशामुक्ति जागरूकता अभियान के तहत भाषण प्रतियोगिता का आयोजन

May 9, 2026
15
उत्तराखंड

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि.) ने शनिवार को भगवान बद्रीविशाल के दर्शन कर पूजा-अर्चना की

May 9, 2026
9
उत्तराखंड

एम्स ऋषिकेश में अध्यनरत नर्सिंग के छात्रों ने किया एसडीआरएफ का शैक्षणिक भ्रमण

May 8, 2026
6

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67683 shares
    Share 27073 Tweet 16921
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45776 shares
    Share 18310 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38052 shares
    Share 15221 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37443 shares
    Share 14977 Tweet 9361
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37330 shares
    Share 14932 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

मातृ दिवस पर छात्राओं की लघु नाटिका ने नम कीं आंखें’

May 9, 2026

*‘मातृ दिवस पर छात्राओं की लघु नाटिका ने नम कीं आंखें’* डोईवाला, (प्रियांशु सक्सेना)। नगर के पब्लिक इंटर कॉलेज में मातृ दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्राओं ने मां की ममता और त्याग को दर्शाती प्रस्तुतियों के माध्यम से सभी को भावुक कर दिया। मई माह के दूसरे रविवार को मनाए जाने वाले मदर्स डे पर कक्षा 11 की छात्राओं ने ‘मां की ममता’ विषय पर लघु नाटिका प्रस्तुत की। नाटिका में दिखाया गया कि एक मां जीवनभर संघर्ष और कठिनाइयों का सामना कर अपने बच्चों को सफल बनाने के लिए समर्पित रहती है। प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों की आंखें नम कर दीं। लघु नाटिका की मुख्य पात्रा जिया ने एक भावपूर्ण गीत भी प्रस्तुत किया। छात्राएं जोया, सना सहित अन्य बच्चों ने भी अभिनय कर सराहना बटोरी। प्रधानाचार्य अंकित डोबरियाल ने कहा कि मातृ दिवस केवल एक सामान्य दिवस नहीं, बल्कि मां के प्रति हमारे कर्तव्यों और सम्मान को समझने का अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से माता-पिता की भावनाओं का सम्मान करने और उन्हें हमेशा प्राथमिकता देने का आह्वान किया। हिंदी विभागाध्यक्ष अश्वनी गुप्ता ने मदर्स डे के साथ-साथ महाराणा प्रताप जयंती पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में पूजा जोशी, ओमप्रकाश काला, भुवनेश वर्मा, रत्नेश द्विवेदी, विवेक बधानी, तेजवीर सिंह, सुदेश सहगल, राधा गुप्ता, चारू वर्मा, अर्चना पाल, राजीव कंडवाल, श्यामानंद और गौरव रावत आदि रहे।

May 9, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.