• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

नैनीताल के अस्तित्व पर खतरा भूस्खलन ले लेगा शहर की जान

07/09/26
in उत्तराखंड, देहरादून, नैनीताल
Reading Time: 1min read
10
SHARES
12
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
पर्यटन के लिए विश्वविख्यात सरोवर नगरी नैनीताल के सामने खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. बारिश शुरू होते ही नैनीताल में लगातार भूस्खलन होने लग रहा है. जिससे नैनीताल के अस्तित्व पर प्रश्न उठने शुरू हो चुके हैं. शहर के अंदर और शहर की बुनियाद में लगातार तेजी से भूस्खलन हो रहा है. इससे प्रशासन समेत राज्य सरकार के सामने नैनीताल को बचाने के लिए चिंताएं बढ़ने लगी हैं. नैनीताल की खोज सन 1841 में एक अंग्रेज चीनी (शुगर) व्यापारी ने की. बाद में अंग्रेजों ने इसे अपनी आरामगाह और स्वास्थ्य लाभ लेने की जगह के रूप में विकसित कर लिया. नैनीताल तीन ओर से घने पेड़ों की छाया में ऊंचे-ऊंचे पर्वतों के बीच समुद्रतल से 1938 मीटर की ऊंचाई पर बसा है. यहां के ताल की लंबाई करीब 1358 मीटर और चौड़ाई करीब 458 मी‍टर है. ताल की गहराई 15 से 156 मीटर तक आंकी गई है. हालांकि इसकी सही-सही जानकारी अब तक किसी को नहीं है कि ताल कितना गहरा है. ताल का पानी बेहद साफ है और इसमें तीनों ओर के पहाड़ों और पेड़ों की परछाई साफ दिखती है. आसमान में छाए बादलों को भी ताल के पानी में साफ देखा जा सकता है. रात में नैनीताल के पहाड़ों पर बने मकानों की रोशनी ताल को भी ऐसे रोशन कर देती है, जैसे ताल के अंदर हजारों बल्ब जल रहे हों स्कंद पुराण के मानस खंड में इसे ‘त्रि-ऋषि-सरोवर’ कहा गया है. ये तीन ऋषि अत्रि, पुलस्थ्य और पुलाहा ऋषि थे. इस इलाके में जब उन्हें कहीं पानी नहीं मिला तो उन्होंने यहां एक बड़ा सा गड्ढा किया और उसमें मनसरोवर का पवित्र जल भर दिया. उसी सरोवर को आज नैनीताल के रूप में जाना जाता है. इसके अलावा नैनीताल को 64 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है. माना जाता है कि जब भगवान शिव माता सती के शव को लेकर पूरे ब्रह्मांड में भटक रहे थे, तो यहां माता की आंखें (नैन) गिर गए थे. माता की आंखें यहां गिरी थीं, इसलिए इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा. माता को यहां नैना या नयना देवी के रूप में पूजा जाता है.नैनीताल शहर के लिए 96 करोड़ रुपये की लागत से सीवर ट्रीटमेंट परियोजना के तहत रूसी में बन रहे प्लांट की तलहटी में एक बार फिर भूकटाव शुरू हो चुका है। जिसके चलते बरसात में एसटीपी के साथ रूसी गांव को खतरा होने की आशंका बनी हुई है। हांलाकि बचाव के लिए भूकटाव प्रभावित क्षेत्र को तिरपाल से ढंक दिया है। लेकिन ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट एजेंसी की ओर से नैनीताल के सीवर ट्रीटमेंट के लिए 96.15 करोड़ की लागत से कार्य किया जा रहा है। जिसके तहत नगर में नई सीवर लाईन बिछा दी गई है। साथ ही रूसी गांव में एसटीएपी प्लांट का कार्य जारी था। लेकिन बीते वर्ष भूस्खलन के चलते प्लांट खतरे की जद में आ गया। ग्रामीणों के विरोध के बाद कार्यदायी संस्था को एसटीपी का काम भी बंद करना पड़ा। जिसके बाद कार्यदायी संस्था ने एसटीपी के लिए पटवाडांगर में जमीन खोजकर प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया। लेकिन मंगलवार रात भारी बारिश के चलते एक बार फिर प्लांट की तहहटी में भूकटाव शुरू हो चुका है। जो भारी बरसात के दौरान बड़ी समस्या बन सकता है और प्लांट के साथ रूसी गांव को भी नुकशान पहुंचा सकता है। वहीं ग्रामीणों की ओर से क्षेत्र की सुरक्षा की मांग की गई है। एडीबी परियोजना प्रबंधक ने बताया कि प्लांट के बचाव के लिए स्टाफ क्वाटर की तलहटी में सुरक्षा दीवारें लगाई गई थीं। बारिश को देखते हुए भूकटाव संभावित क्षेत्र को तिरपाल से ढंक दिया है। शासन को एसटीपी के बचाव कार्य के लिए  40 करोड़ का स्टीमेट बनाकर भी भेजा गया है जो शासन स्तर पर लंबित है। भूस्खलन के चलते क्षेत्र में एक बार फिर लैंडस्लाइड का खतरा मंडराने लगा है. प्रशासन ने 18 परिवारों को घर खाली करने के नोटिस जारी कर दिए हैं. जिसके बाद कई लोगों ने अपने घर खाली कर दिए हैं. चार्टन लॉज क्षेत्र में बीते साल हुए भूस्खलन के बाद इस बार मानसून सीजन की शुरुआत में ही क्षेत्र में एक बार फिर से भूस्खलन का खतरा बढ़ने लगा है. धंसाव को रोकने के लिए अस्थाई रूप से लगाई गई कट्टों की दीवार नीचे खिसकने से ऊपर स्थित आवासीय भवन खतरे की जद में आ गए हैं, जिससे क्षेत्रवासियों में दहशत का माहौल है. वहीं एक साल पहले हुए भूस्खलन के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं खुली और भूस्खलन वाले इलाके को सिर्फ तिरपाल से ढक दिया. जिसके बाद एक बार फिर से मानसून की शुरुआत में ही आसपास के घरों में खतरा मंडराने लगा.हर साल सरकार द्वारा आपदा से निपटने के तमाम दावे किए जाते हैं, मगर धरातल में कोई प्रयास नजर नहीं आते. इसका उदाहरण नैनीताल का चार्टन लॉज का भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र है. बीते साल सितंबर में चार्टन लॉज इलाके में भारी भूस्खलन हुआ था, जिसमें एक दो मंजिला मकान पूरी तरीके से ध्वस्त हो चुका था. तीन अन्य भवन भी क्षतिग्रस्त हो गए थे. साथ ही आसपास के अन्य घरों में भी बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी थीं. जिसके बाद दर्जनों परिवारों को अन्यत्र विस्थापित किया गया था. लोक निर्माण विभाग द्वारा भूस्खलन वाले इलाके में अस्थाई जियो बैग की दीवार लगा दी गई थी, जिससे भूस्खलन तो रुक गया लेकिन कोई स्थाई समाधान नहीं हो पाया. वहीं 10 माह बाद दोबारा मानसून की शुरुआत होने के साथ ही अस्थाई जियो बैग की दीवार भी नीचे गिरने लगी, जिससे आसपास के घरों में अब खतरा मंडराने लगा है. हिमालयी पहाड़ एक बच्चे की तरह है और यह बहुत कमजोर है. यही कारण है कि उत्तराखंड में जरा सी बारिश के चलते भूस्खलन की घटनाएं बढ़ जाती हैं और सड़कें बाधित हो जाती हैं. भूस्खलन अब इतना बढ़ गया है कि इस बार नैनीताल नगर के अंदर भी दो जगह भूस्खलन होने लगा है. डीएसबी पहाड़ी और स्नो व्यू की पहाड़ी की तरफ शुरू हुए भूस्खलन ने नैनीताल के अस्तित्व को खतरा पैदा कर दिया है. उन्होंने कहा कि इसका स्थाई समाधान नहीं ढूंढा गया, जिस कारण हालात और बिगड़ते जा रहे हैं.,(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं।)

Share4SendTweet3
Previous Post

आदिबदरी मंदिर समूह को बीकेटीसी में शामिल करने को लेकर बीकेटीसी की भूसम्पत्ति की उच्चस्तरीय टीम आदि बदरी पहुंची

Next Post

लालढांग-चिलरखाल वन मोटर मार्ग!

Related Posts

उत्तराखंड

Physical and Analytical Chemistry लेखक: डॉ हरीश चन्द्र अंडोला एवं डॉ रीना पुरोहित प्रकाशक: कुणाल बुक्स नई दिल्ली

October 12, 2026
20
उत्तराखंड

यूजेवीएन लिमिटेड ने पंप्ड स्टोरेज परियोजना की दिशा में बढ़ाया कदम

October 12, 2026
7
उत्तराखंड

ऑनलाइन हाजिरी बनी परेशानी का सबब मेहनताने को भटक रहे श्रमिक

October 12, 2026
8
उत्तराखंड

उत्तराखण्ड सिद्धपीठ कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले का आगाज

October 12, 2026
7
उत्तराखंड

उत्तराखण्ड की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी थी बिशनी देवी शाह

October 12, 2026
7
उत्तराखंड

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने श्री बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरीविशाल के दर्शन किये

October 12, 2026
5

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67751 shares
    Share 27100 Tweet 16938
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38079 shares
    Share 15232 Tweet 9520
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37460 shares
    Share 14984 Tweet 9365
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37383 shares
    Share 14953 Tweet 9346

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

Physical and Analytical Chemistry लेखक: डॉ हरीश चन्द्र अंडोला एवं डॉ रीना पुरोहित प्रकाशक: कुणाल बुक्स नई दिल्ली

October 12, 2026

यूजेवीएन लिमिटेड ने पंप्ड स्टोरेज परियोजना की दिशा में बढ़ाया कदम

October 12, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.