हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली। विश्व की सबसे लंबी एवं कठिन धार्मिक यात्राओं में सुमार श्री नंदादेवी के नाम से आयोजित होने वाली जात को भी लेकर भ्रम की स्थिति

उत्पन्न होती जा रही हैं।जिस तरह से उत्तराखंड ही नही अपितु पूरे भारतवर्ष में अलग-अलग नाम से अराध्य नंदा, भगवती की कैलाश यात्रा को लेकर तमाम तरह के विवाद उत्पन्न हुएं और राजनीति की जा रही हैं उससे नंदा भक्तों की भावनाएं आहत हो रही हैं। आखिर श्री नंदादेवी राजजात यात्रा के 2027 में आयोजन की घोषणा के बाद नंदा की बड़ी जात एवं लोक जात यात्रा के आयोजन को लेकर भी संसय के बादल गहराते जा रहें हैं।
पिछली श्री नंदादेवी राजजात यात्रा 2014 में आयोजित हुई थी।उस समय घोषणा की गई थी कि 12 वर्षों के हिसाब से 2026 में राजजात यात्रा का आयोजन होगा इसके तहत 2025 के अंतिम दिनों तक श्री नंदादेवी राजजात यात्रा समिति नौटी के साथ ही राज्य सरकार के द्वारा यात्रा को सचल हिमालयी महाकुंभ के पैटर्न पर आयोजित करने की घोषणाएं करते हुए बकायदा हाईलेवल मीटिंगों के साथ ही रूपरेखा तक सार्वजनिक की जाती रही। परंतु 2026 के प्रारंभिक महिनों में यात्रा का आयोजन 2026 के बजाय 2027 में आयोजित करने की नंदा देवी राजजात समिति नौटी ने घोषणा कर दी।जिसके बाद इस आयोजन को लेकर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई जोकि अबतक बरकरार हैं। राजजात 2027 तक स्थगित होने से आहत नंदानगर -घाट के नंदाक क्षेत्र के साथ ही बधाण पट्टी के नंदा भक्तों ने बैठक कर राजजात स्थगित करनें की दशा में 2026 में श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा के आयोजन की घोषणा कर बकायदा यात्रा का रूट एवं कार्यक्रम भी महिनों पहले जारी कर दिया गया, जारी कार्यक्रम के अनुसार 5 सितंबर से नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से बड़ी जात यात्रा शुरू होगी
12 सितंबर को यात्रा नंदकेशरी पहुंचेगी जहां पर गढ़वाल, कुमाऊं की यात्राओं का भावपूर्ण मिलन होगा।15 को यात्रा लाटू सिद्धपीठ वांण गांव पहुंचेगी जहां पर अन्य देव डोलियों के साथ ही नंदादेवी के धर्म भाई लाटू की भेंट होगी।16 को यात्रा निर्जन पड़ाव गैरोलीपातल पहुंचेगी। 20 को यात्रा शिला समुद्र से होमकुंड पहुंचेगी, जहां बड़ीजात की पूजा अर्चना के साथ ही चौसिंग्या खाडू को कैलाश के लिए विदा किया जाएगा। इसके बाद यात्रा वापसी के पड़ाव के तहत निर्जन पड़ाव जामुन डाली पहुंचेगी।21 को सभी देवा डोलियां,निशान नंदानगर के सुतोल गांव पहुंचेगी,22 को जहां अन्य देव डोलीयां,निशान नंदानगर के लिए प्रस्थान करेगी वही बधाण की नंदादेवी की देव डोली पुनः वांण गांव पहुंचेगी, इसके 30 सितंबर को नंदादेवी की उत्सव डोली सिद्धपीठ देवराड़ा-थराली पहुंचेगी जहां पर नंदा मंदिर के गर्भगृह में 6 माह के प्रवास के लिए विराजमान हो जाएगी।
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बड़ी जात यात्रा कार्यक्रम के जारी होने के कुछ माह बाद पिछले महिने अगस्त माह में नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा-थराली से केंद्रीय समिति मां नंदादेवी राजराजेश्वरी बधाण थराली के अध्यक्ष सुशील रावत एवं सचिव पृथ्वीपाल सिंह बुटोला ने नंदा देवी राजराजेश्वरी लोकजात यात्रा कार्यक्रम 2026 परगना नंदाक,बधाण नाम से नंदा देवी लोकजात यात्रा कार्यक्रम 2026 जारी किया गया। यात्रा कार्यक्रम के अनुसार 3 से 5 सितंबर तक नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ में तीन दिवसीय मेला का आयोजन करते हुए 5 सितंबर को कुरूड़ से लोक जात यात्रा शुरू होगी जोकि सप्तमी के दिन 18 सितंबर को वेदनी बुग्याल पहुंचेगी वहां पर नंदादेवी की पूजा अर्चना के बाद नंदा की कैलाश विदाई के साथ ही यात्रा वापस लौट पड़ेगी और अनन्त चतुर्दशी के दिन 25 सितंबर को देवी की डोली अपने 6 माह के प्रवास पर नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा में विराजमान हो जाएगी।
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अब फिर से पिछले दिनों से सोशल मीडिया पर नंदादेवी राजराजेश्वरी मंदिर व मेला कमेटी कुरूड़ नंदानगर के उपाध्यक्ष किशोर गौड़, सचिव सुनील गौड़ एवं कोषाध्यक्ष दयाराम गौड़ के नाम से श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी लोकजात यात्रा कार्यक्रम 2026 जारी किया गया हैं।इस कार्यक्रम में भी बधाण समिति के ही यात्रा कार्यक्रम की कापी की गई हैं।
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अब जबकि नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से 5 सितंबर अब से कुछेक घंटों बाद नंदा की कैलाश यात्रा शुरू होनी है नंदा भक्तों के बीच यात्रा को लेकर संसय बना हुआ हैं कि कुरूण से किस रूप में यात्रा शुरू होगी, क्या यात्रा बड़ी जात जोकि होमकुंड तक जाएगी अथवा लोक जात यात्रा जोकि वेदनी बुग्याल तक जाएगी के रूप में शुरू होगी।जिस तरह से राजजात, बड़ी जात व लोकजात को लेकर राजनीति की जा रही हैं उससे नंदा, भगवती के भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं।आहत दर्जनों नंदा भक्त सोशल मीडिया पर जमकर आयोजकों को कोसनें से नही चूक रहें हैं।











