*नीट यूजी पेपर रद्द अभ्यर्थी बोले ईमानदारी से मेहनत करने वालों पर आया संकट* डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-2026 रद्द होने की खबर ने लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। परीक्षा में पेपर लीक की आशंका के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की ओर से परीक्षा निरस्त करने से उन विद्यार्थियों में भारी निराशा है, जिन्होंने पूरे वर्ष मेहनत कर परीक्षा दी थी। कई विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अचानक आए इस फैसले ने उनके सपनों को झटका दे दिया।हालांकि इस कठिन परिस्थिति में कई कोचिंग संस्थानों और शिक्षकों ने विद्यार्थियों का मनोबल बनाए रखने का प्रयास किया । विद्यार्थियों का कहना है कि वे फिर से परीक्षा की तैयारी में जुट गए हैं और पहले से अधिक मजबूती के साथ वापसी करना चाहते हैं। शिक्षकों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त व्यवस्था बनाने की मांग की नीट 2026 परीक्षा के संपन्न होने के ठीक बाद जैसे ही राजस्थान और उत्तराखंड से पेपर लीक के तार जुड़ने की खबरें आईं, ‘एजुकेशन हब’ कहे जाने वाले देहरादून के नीट अभ्यर्थियों का धैर्य जवाब दे गया. 11 और 12 मई 2026 को जब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने परीक्षा रद्द करने की घोषणा की तो शहर के कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरी में दिन-रात एक करने वाले छात्रों में हलचल मच गई. परीक्षा रद्द होने और दोबारा आयोजित होने की खबर ने छात्रों को मानसिक रूप से परेशान दिया है. कई छात्र पहाड़ से दूर आकर देहरादून के महंगे कोचिंग संस्थानो से कोचिंग ले रहे हैं. देहरादून के छात्र ने कहा कि ऐसे तनाव में उसी सिलेबस को दोबारा उसी तीव्रता के साथ पढ़ना आसान नहीं. यह न सिर्फ आर्थिक बोझ बढ़ाता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है. ऐसा नहीं होना चाहिए. सरकार से कार्रवाई करने की मांग कर रहे छात्र ने कहा कि यह पहली बार नहीं है कि नीट का पेपर लीक हुआ. इससे पहले साल 2024 में भी इसी तरह स्टूडेंट्स की उम्मीदें टूट गई थीं. उससे पहले साल 2021 में भी सॉल्वर गैंग का खुलासा था. उन्होंने कहा कि एनटीए हमेशा स्टूडेंट्स को भरोसा में लेता है, लेकिन हर बार पेपर लीक होते रहते हैं. ऐसे में भरोसा मुश्किल है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने बहुत मेहनत की होती है और फेयर डिसीजन नहीं लेते हैं तो उनका दिल टूट जाता है. मेहनत करके 700 से ज्यादा नम्बर लाने वाले लोगों के दिल पर क्या बीतती है, यह वही समझ सकता है, जो उस हालात से गुजरता है. लेकिन यह पेपर लीक का कल्चर सा बनता दिख रहा है. हमने रात-रात जागकर पढ़ाई की, मेहनत की तो लगा था कि हमारी मेहनत रंग लाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हमें मायूस होना पड़ा है. पिछले कई सालों से देहरादून के निजी कोचिंग सेंटर में नीट की तैयारी कर रहे अनुज राणा ने बताया कि वे उत्तरकाशी के बड़कोट से देहरादून में कोचिंग ले रहे हैं. साल भर का खर्च किराया और कोचिंग इंस्टिट्यूट की महंगी फीस वह इस उम्मीद से दे रहे थे कि उनका सपना पूरा होगा, लेकिन इस तरह की घटनाएं हम जैसे स्टूडेंट का हौसला तोड़ देती हैं. परीक्षा रद्द होने व पेपर लीक के कारण परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं, मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया । करीब 23 लाख अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों की निराशाजनक स्थिति है। परीक्षा आयोजन सुरक्षित नहीं होने से व्यवस्था पर कैसे भरोसा करें। मेरा इस बार 664 अंक का स्कोर बन रहा था और अच्छी मेडिकल कॉलेज मिलने की उम्मीद थी। परीक्षा रद्द होने से सपनों को आघात पहुंचा है। नीट जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षा में गड़बड़ी और नकल की खबरें शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी परीक्षा में पारदर्शिता पर सवाल उठना दुर्भाग्यपूर्ण है। परीक्षा रद्द होने से विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव बढ़ा है। विद्यार्थियों से आत्मविश्वास बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। अतिरिक्त समय को तैयारी मजबूत करने और कमजोरियां सुधारने के रूप में लेना चाहिए। नीट परीक्षा रद्द होने के फैसले ने जहां एक ओर धांधली की आशंकाओं पर विराम लगाया है, वहीं दूसरी ओर लाखों उम्मीदवारों के सामने अनिश्चितता का पहाड़ खड़ा कर दिया है. साल भर की कड़ी मेहनत, रातों की नींद और डॉक्टर बनने के सपने पर फिलहाल इंतजार की मुहर लग गई है. पेपर लीक के आरोपों के बीच शुचिता बचाने का यह कदम सही तो है, लेकिन असली सवाल अब उन छात्रों का है जो मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुके हैं. आखिर अब आगे क्या? क्या यह दोबारा परीक्षा सिर्फ एक तारीख का बदलाव है या छात्रों के धैर्य की एक और कठिन अग्निपरीक्षा? बार-बार सामने आ रहे इन पेपर लीक विवादों ने छात्र समूहों और विपक्षी दलों को राष्ट्रीय परीक्षण प्रणालियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का मौका दे दिया है। वे लगातार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। नीट यूजी परीक्षा रद्द होना सरकार का फेलियर है. सरकार को पारदर्शिता बरतनी चाहिए. एक साल बच्चों का खराब हो जाता है. दोबारा परीक्षा में पहले जैसा कमिटमेंट नहीं रहता. पेपर कैंसिल होने से छात्रों एवं अभिभावकों पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है. अब कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएगा. विपक्ष की ओर से दिए जा रहे बयानों के संबंध में, जिनमें यह दावा किया जा रहा है कि सरकार इस मामले को दबाना चाहती है, तथ्य खुद अपनी कहानी बयां करते हैं. CBI जांच तुरंत शुरू की गई, बिना किसी देरी के परीक्षा रद्द कर दी गई. और दोबारा परीक्षा के संबंध में बहुत जल्द ही घोषणा होने की उम्मीद है. कड़ी सुरक्षा के बावजूद पेपर लीक से लाखों परीक्षार्थियों को परेशानी होगी. उन्हें अब दोबारा परीक्षा देनी होगी. परीक्षा के दिन तैयारी या घटनाक्रम जांच का विषय है. हालांकि एनटीए परीक्षा में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम रखता है. परीक्षा में सीसीटीवी कैमरे की एआई बेस्ड मॉनिटरिंग के बाद भी पेपर लीक हो गया. साल 2024 में भी नीट यूजी के पेपर लीक की शिकायत आई थी. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) द्वारा सोमवार को NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द किए जाने से एक बार फिर देश भर में गुस्सा फूट पड़ा है. स्टूडेंट ग्रुप और मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि कोचिंग सेंटर, बिचौलिए और पूरे भारत में पेपर लीक करने वाले संगठित नेटवर्क का गहरा गठजोड़ है. छात्र संगठन अधिकारियों से जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी धांधली रोकी जा सके.यह फैसला 3 मई को देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में 25 से 26 लाख उम्मीदवारों के शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद आया है. केंद्र द्वारा निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, लेकिन पेपर लीक और धांधली के आरोपों के कारण अधिकारियों को परीक्षा रद्द करने पर मजबूर होना पड़ा. इससे भारत की प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. इसके बाद भी हाई पावर कमेटी की सिफारिशों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया. आधी अधूरी सिफारिशें लागू की गईं.. लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











