• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

बायो मेडिकल वेस्ट के पहाड़ में पर्यावरण पर नजर रखने को नहीं

09/01/22 - Updated on 18/01/22
in उत्तराखंड
Reading Time: 1min read
149
SHARES
186
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला:

कभी शुद्ध हवा व कचरा रहित वातावरण के लिए जाने, जाने वाले पहाड़ों पर भी तरह-तरह का प्रदूषण बढ़ने लगा है। इसे लेकर विशेषज्ञ चिंतित हैं। इसके चलते पहली बार पांच पहाड़ी जिलों में प्रदूषण की मॉनिटरिंग और इस पर नियंत्रण का एक्शन प्लान बनने जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। चिंता की बात है कि बात अगर खतरनाक बायोमडिकल वेस्ट की करें तो पिछले करीब दो साल में पहाड़ों पर भी बायो मेडिकल वेस्ट लगभग 4 गुना हो गया है।

अब तक मैदानी इलाकों में प्रदूषण की समस्या थी, जिसके चलते देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, काशीपुर, रुद्रपुर और नैनीताल जैसे जिलों में ही प्रदूषण की निगरानी और उससे बचाव के उपाय किए जाते हैं। पर, अब पहाड़ों की ओर प्रदूषण बढ़ने लगा है, जो चिंता का विषय है। पीसीबी अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, उत्तरकाशी और चमोली के लिए विशेष प्रदूषण नियंत्रण एक्शन प्लान नहीं है।पीसीबी में इनके लिए अलग-अलग ड्राफ्ट भी तैयार कर लिए हैं।

इसमें वायु, जल व ध्वनि प्रदूषण की निगरानी के अलावा बायो मेडिकल वेस्ट को इकट्ठा करने, इसको दूसरे कचरे से अलग करने और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करने के उपाय किए जाएंगे। पहाड़ों पर प्रदूषण की बड़ी वजह वहां पिछले कुछ दशकों से वनाग्नि और वाहनों की बढ़ती संख्या है। इसके अलावा पहाड़ों पर भी छोटे-छोटे उद्योग पनपने लगे हैं, जो कहीं ना कहीं, वहां के पानी और वायु को दूषित कर रहे हैं।  पहाड़ों पर ऑलवेदर रोड सहित कई सड़कें, रेल लाइन व अन्य परियोजनाएं भी प्रदूषण बढ़ा रही हैं।

इनसे निकलने वाले कचरे का सही तरह से निस्तारण नहीं हो रहा है। इनसे निकलने वाले धूल मिट्टी आदि प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। खतरनाक बायोमडिकल वेस्ट की करें तो पिछले करीब दो साल में पहाड़ों पर भी बायो मेडिकल वेस्ट लगभग 4 गुना हो गया है। लेकिन वहां अभी तक इसके सही निस्तारण की पूरी व्यवस्थाएं नहीं है।

पिछले कुछ साल से पहाड़ों पर भी प्रदूषण में वृद्धि देखने को मिल रही है, जो चिंताजनक है। वहां बायोमेडिकल वेस्ट भी तीन से चार गुना बढ़ गया है। ऐसे में एनजीटी के निर्देश पर पांच पहाड़ी जिलों के लिए प्रदूषण रोकने का विशेष एक्शन प्लान बनाया जा रहा है। इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। उत्तराखंड में कोरोना के बढ़ते केसों के बीच उत्तराखंड सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। थूकने और कूड़ा इधर-उधर फेंकने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

घर से बिना मास्क घूमने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने कोविड को लेकर नोडल अधिकारियों के साथ बैठक में सभी नोडल अफसरों को एक्टिव रहने के निर्देश दिए। उत्तराखंड में सात दिन में सात गुना केस बढ़ चुके हैं लेकिन टेस्टिंग में तेजी नहीं आई है। एक जनवरी को एक दिन में जहां 118 केस आए थे वहीं आठ जनवरी को 814 केस आए। टेस्ट अब भी 15 हजार के आस पास है। एक जनवरी को 118 केस आए, टेस्ट 15090 हुए।

दो जनवरी को केस 259 सामने आए, टेस्ट सिर्फ 13529 हुए। तीन जनवरी को 189 केस सामने आए, टेस्ट 15528 हुए। चार जनवरी को 310 केस सामने आए, टेस्ट 15915 हुए।पांच जनवरी को 505 केस आए, टेस्ट 18447 हुए। छह जनवरी को 630 केस आए, टेस्ट 16844 हुए। सात जनवरी को 814 केस आए, टेस्ट 14566 हुए। सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के संस्थापक ने बताया कि जब तक टेस्टिंग नहीं बढ़ेगी, कोविड की सही तस्वीर सामने नहीं आएगी।

इसके लिए केंद्र के निर्देशानुसार कोविड टेस्टिंग बढ़ाई जाए।बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में यदि किसी भी प्रकार की लापरवाही बरती जाती है तो इसका सीधा असर आमजन की सेहत पर पड़ेगा। खासकर कोरोना के दौर में खुले में पीपीई किट और मास्क फेंकने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।

ऐसे में यह सुनिश्चित कराया जाए कि कहीं भी खुले में इस्तेमाल की हुई पीपीई किट और मास्क न फेंके जाएं। यदि कोई ऐसा करता पकड़ा जाए तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। डॉ. कंसल का कहना है कि अस्पतालों और श्मशान घाटों के पास खुले में पीपीई किट मास्क पाए जाते हैं तो इसको इकट्ठा करने की जिम्मेदारी संबंधित नगर निगम व नगर पालिकाओं की है। ऐसे पीपीई किट व मास्क वैज्ञानिक विधि से निस्तारित कराए जाएं। 

Share60SendTweet37
Previous Post

आचार संहिता लगते ही शराब तस्करों पर कसने लगा पुलिस का शिकंजा, एक गिरफ्तार

Next Post

दूसरे दिन भी जारी रही बर्फबारी और घाटियों में बारिश का सिलसिला

Related Posts

उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने 37वें अखिल भारतीय खेलकूद समारोह के विजेता खिलाड़ियों को किया सम्मानित

November 4, 2026
3
उत्तराखंड

आंदोलनकारी रविन्द्र जुगरान के पिता उमाकांत जुगरान का निधन

November 4, 2026
15
उत्तराखंड

डोईवाला: द होराइजन स्कूल में धूमधाम से मनाया वार्षिक उत्सव ‘उद्भव-2026’

November 4, 2026
16
उत्तराखंड

डोईवाला डिग्री कॉलेज में नमामि गंगे कार्यक्रम का शुभारंभ

November 4, 2026
36
उत्तराखंड

तरवाड़ी महाविद्यालय बैडमिंटन प्रतियोगिता में छात्रा वर्ग में बबिता एवं छात्र वर्ग में अभिषेक विजेता

November 4, 2026
4
उत्तराखंड

यूकेडी ने लोनिवि थराली में प्रदर्शन कर बदहाल ग्रामीण सड़कों पर आक्रोश जताया

November 4, 2026
4

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67760 shares
    Share 27104 Tweet 16940
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45795 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38082 shares
    Share 15233 Tweet 9521
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37462 shares
    Share 14985 Tweet 9366
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37388 shares
    Share 14955 Tweet 9347

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

मुख्यमंत्री ने 37वें अखिल भारतीय खेलकूद समारोह के विजेता खिलाड़ियों को किया सम्मानित

November 4, 2026

आंदोलनकारी रविन्द्र जुगरान के पिता उमाकांत जुगरान का निधन

November 4, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.