• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन रहा पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन

16/03/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
10
SHARES
12
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड अपनी नैसर्गिक सौंदर्यता के लिए के लिए जाना जाता है। जिसमें एक ओर ऊंचे-ऊंचे पहाड़ और दूसरी ओर कल-कल बहती नदियां इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। यह राज्य हमेशा से आपदाओं की चपेट में रहा है और कई सुंदर आंदोलनों का भी।जल, जंगल, ज़मीन के लिए लड़ने वाली महिलाओं ने चिपको आंदोलन दिया, तो वहीं कई आंदोलनकारियों की वजह से उत्तराखंड को एक राज्य का दर्जा भी प्राप्त हुआ। सन 2000 में आज ही के दिन उत्तराखंड को राज्य का दर्जा मिला था।पहाड़ों के बारे में एक कहावत मशहूर है कि पहाड़ का पानी और जवानी कभी वहां के काम नहीं आती, आलम ये है कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में आज गांव के गांव खाली होते जा रहे हैं, समुचित व्यवस्था का अभाव में आने वाली मुश्किलों ने हमेशा से यहां के लोगों को अपनी जड़ों को छोडऩे के लिए मजबूर किया है, नेता और अधिकारी राजधानी में बैठकर पलायन रोकने के खोखले दावे कर रहे हैं।भारत गांवों में बसता, हर तीन में से दो लोग गांव में रहते हैं, मगर शहर को जाती भीड़ ने सब बदल रही है. गांव खाली और खेत बंजर हो गये. गांव के गली मोहल्ले विरान हो गये हैं. गांव में हर तरफ अलग तरह की चुप्पी छाई है. ये चुप्पी चुपके से पहाड़ी गांवों की असलियत बयां करती हैं. उत्तराखंड गठन के दो दशक बाद लगातार पलायन के कारण पहाड़ी गांव खाली हो रहे हैं. सरकारों की लाख कोशिशें, करोड़ों के बजट के बाद भी पलायन पर रोक नहीं लग पा रही है. जिससे पहाड़ों में भूतहा गांवों की संख्या बढ़ती जा रही है. बागेश्वर का भयेड़ी भी ऐसा ही एक गांव है. भयेड़ी गांव बागेश्वर जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर स्थित है. इसके बाद भी ये गांव पलायन का दंश झेल रहा है. 110 घरों की आबादी वाला यह गांव अब धीरे-धीरे खाली हो रहा है. आज के समय में भयेड़ी गांव में केवल 52 परिवार ही शेष बचे हैं. गांव में जगह-जगह बंद पड़े मकानों पर लगे जंग लगे ताले और उग आई झाड़ियां इस बात का प्रमाण हैं कि लोग बेहतर भविष्य की तलाश में गांव छोड़ चुके हैं. यहां कच्चा पक्का घर अब बस बीते दिनों की बातों में है. अब गांवों में झाड़ झंकार, जंगली बेलें उग आई हैं. रास्तों पर जमी घास इसके निर्जन होने का प्रमाण है. कभी ग्रामीणों की आवाजाही से तारी रहने वाला भयेड़ी गांव धीरे धीरे खाली हो रहा है. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार पिछले चार-पांच दशकों में गांव से पलायन की गति तेज हुई है. शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण युवा पीढ़ी शहरों की ओर रुख कर रही है. ग्रामीणों ने कहा जो लोग पहले काम की तलाश में बाहर गए थे, उनमें से कई अब वहीं स्थायी रूप से बस गए हैं. उनके गांव लौटने की उम्मीद कम ही है. ग्रामीण ने बताया 1980 के दशक की शुरुआत में गांव में बिजली और पानी जैसी सुविधाएं तो पहुंच गई थीं, लेकिन उसके बाद विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई. उनके मुताबिक, अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार के अवसर न मिलने से लोगों ने शहरों का रुख किया. अब कई परिवार वहीं स्थायी रूप से बस गए हैं. यदि गांव में पढ़ाई और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हों तो पलायन को काफी हद तक रोका जा सकता है. उनका मानना है कि सरकार को पहाड़ी इलाकों में युवाओं के लिए रोजगार और सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए. गांव की ही दुर्गा देवी ने बताया पहले गांव के लोग खेती-किसानी से ही अपना जीवन यापन करते थे. खेतों में धान, गेहूं, मंडुवा, झंगोरा, मसूर और गहत जैसी फसलें उगाई जाती थीं. अब खेती पर जंगली जानवरों का खतरा बढ़ गया है. जंगली जानवर मेहनत की खेती को चौपट कर देते हैं. जिसके कारण लोगों का रुझान इस ओर कम हुआ है. काम करने वाले लोगों की कमी के कारण खेती करना मुश्किल होता जा रहा है. ग्राम प्रधान ने बताया अगर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की सुविधाएं गांवों तक पहुंचें तो पलायन की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है. वरना आने वाले वर्षों में कई पहाड़ी गांवों की तरह भयेड़ी भी पूरी तरह खाली हो सकता है. उन्होंने कहा यदि समय रहते ही गांव का विकास नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब पूरा गांव खाली हो जाएगा. खाली होते पहाड़ों का सबसे बड़ा कारण पलायन है. पहाड़ों से पलायन कई वजहों से हो रहा है. इसमें रोजगार, शिक्षा , स्वास्थ्य सेवाएं, जंगली जानवरों का आतंक महत्वपूर्ण कारण है. इन सब परेशानियों के कारण पहाड़ खाली होते जा रहे हैं.  पहाड़ों में पलायन को रोकेने के लिए ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत है. इसके लिए गांव में खेती को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. पशुपालन को आगे बढ़ाना चाहिए. इससे पहले गांवों में सुख सुविधाएं पहुंचाने की जरुरत हैं. जिससे गांव से लोगों को बाहर जाने से रोका जाए. अच्छे स्कूल, अस्पताल, सड़क जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए. 25 सालों में सरकारें आई और गई पर उनकी पलायन की रोकथाम को लेकर बातें आज भी केवल हवा हवाई साबित हो रही है। बात अगर अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ की करें तो पहाड़ पर पहाड़ सी जिंदगी जीने वाले लोगों की किन किन समस्याओं से गुजरना पड़ता है वो तो केवल पहाड़ पर रहने वाले लोगे ही बता सकते है।  इस कहावत की सच्चाई पर सवाल भी ज़रूरी नही है क्योंकि ये कहावत उत्तराखंड के पहाड़ों की हालातों की हकीकत है।अब समय आ गया है जब नेताओं को ,सरकारों को और युवा वर्ग को मिलकर एक सफल प्रयास करना ही होगा । वरना वह दिन दूर नहीं जब उत्तराखंड के पहाड़ों में सिर्फ जंगल ,जानवर और बंजर पड़े मकान ही नज़र आएंगे और पहाड़ी अपने ही पहाड़ में अल्पसंख्यक कहलाएंगे। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों से मैदान की ओर पलायन की समस्या अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से चली आ रही है। अलग राज्य बनाने की मांग के साथ उत्तराखंड के खाली हो रहे गावों को भी मजबूत आधार के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा। सभी राजनीतिक दल खाली हो रहे पहाड़ी गांवों को आबाद एवं खुशहाल बनाने की कुंजी अलग पर्वतीय राज्य (उत्तराखंड) में देखते-दिखाते रहे। इसे सामाजिक विडंबना कहें या राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव कि जिसे प्रमुख आधार मान कर पर राज्य आंदोलन चलाया गया, राज्य बनने के 25 वर्ष बाद भी पलायन प्रदेश की सबसे बड़ी चुनौती के रूप में खड़ा है। राज्य बनने के 17 साल बाद पलायन आयोग का गठन होना ही राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता की घोर उपेक्षा का प्रमाण है। इतना ही नहीं, आयोग की संस्तुतियों पर हुई प्रगति का कोई आकलन न होना भी तंत्र की लापरवाही को ही इंगित करता है। जबकि आयोग के अध्यक्ष मुख्यमंत्री स्वयं होते हैं।केंद्र सरकार की चिंता तथा किए जा रहे प्रामाणिक कार्य प्रदेश की सरकारों पर सवालिया निशान भी रखते हैं। नि:संदेह प्रदेश सरकार पर्वतीय क्षेत्रों के लिए आर्थिक रूप से उतना नहीं कर सकती जितना कि केंद्र, लेकिन जन जागरूकता, उचित वातावरण, स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार एवं नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना तो प्रदेश सरकार का ही दायित्व बनता है। इन बिंदुओं पर अगर अब तक आई सरकारों का आकलन किया जाए तो तस्वीर निराशाजनक ही दिखती है। हर काम के लिए केंद्र की ओर ताकना भी तो अपनी नाकामी ही मानी जाएगी। लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share4SendTweet3
Previous Post

डॉ. हरीश चंद्र अंडोला को किताब कौतिक मेरा पहड मेरी पहचान ने सम्मानित किया

Next Post

सभी विश्वविद्यालयों में जल्द होंगी कर्मचारियों की नियुक्ति, माँगे गए स्टाफिंग पैटर्न के प्रस्ताव: सचिव स्तरीय वार्ता में सकारात्मक निर्णय

Related Posts

उत्तराखंड

बैसाख पूर्णमासी के मौके पर लाटू देवता के कपाट विधि-विधान के साथ खोलें

May 1, 2026
6
उत्तराखंड

बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा, नियमितीकरण व समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित हेतु दिए निर्देश

May 1, 2026
10
उत्तराखंड

प्रतिनिधिमंडल ने एसडीआरएफ की प्रशिक्षण शाखा का किया अवलोकन

May 1, 2026
6
उत्तराखंड

मुन्दोली राइडर्स क्लब द्वारा एक भव्य मैराथन “अविरल नंदा रन” का सफल आयोजन

May 1, 2026
8
उत्तराखंड

डोईवाला: पुलिस ने लिया वायरल वीडियो का संज्ञान, वाहन सीज

May 1, 2026
68
उत्तराखंड

लच्छीवाला वन क्षेत्र में स्वच्छता अभियान चलाया

May 1, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67681 shares
    Share 27072 Tweet 16920
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45776 shares
    Share 18310 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38051 shares
    Share 15220 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37442 shares
    Share 14977 Tweet 9361
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37330 shares
    Share 14932 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

बैसाख पूर्णमासी के मौके पर लाटू देवता के कपाट विधि-विधान के साथ खोलें

May 1, 2026

बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा, नियमितीकरण व समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित हेतु दिए निर्देश

May 1, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.