डोईवाला, (प्रियांशु सक्सेना)। ग्राम पंचायत सिमलास ग्रांट में कुमाऊं क्षेत्र का प्रमुख पारंपरिक लोकपर्व सातूं-आठूं धूमधाम से मनाया जा रहा है। पर्व के दौरान सिमलास ग्रांट, नांगल ज्वालापुर, नांगल बुलंदावाला और दूधली ग्राम पंचायत क्षेत्र के लोग पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजन में शामिल हो रहे हैं।
यह पर्व भाद्रपद मास की पंचमी यानी बिरुड़ पंचमी से शुरू होकर अष्टमी तक मनाया जाता है। इस दौरान भगवान महेश और माता गौरा की पूजा-अर्चना की जाती है। महिलाएं और पुरुष पारंपरिक कुमाऊंनी वेशभूषा में सजकर सामूहिक रूप से झोड़ा-चांचरी और लोकगीत प्रस्तुत करते हैं। इससे पूरे क्षेत्र में पर्व का उल्लास देखने को मिल रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता उमेद बोरा ने बताया कि मान्यता के अनुसार माता गौरा भगवान महेश से नाराज होकर मायके आती हैं। इसके बाद भगवान महेश उन्हें मनाने के लिए पहुंचते हैं। उनके मान जाने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है। इसी परंपरा के तहत सातूं-आठूं पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के लोग हर वर्ष इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं।
ग्राम प्रधान सुषमा बोरा ने बताया कि सातूं-आठूं पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इसमें माता गौरा को घर की बेटी और भगवान शिव को उनके पति के रूप में पूजने की परंपरा है। पर्व के समापन पर माता गौरा को नम आंखों से ससुराल विदा किया जाता है। उन्होंने बताया कि यह पर्व बेटी की विदाई की भावनाओं के साथ-साथ कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को भी जीवंत रखता है।
ग्रामीणों के अनुसार यह पर्व नारी शक्ति, प्रकृति, कृषि और शिव-शक्ति की आराधना का अनूठा संगम है। इस अवसर पर तुलसी देवी, मोहिनी देवी, किरण बोरा, बसंती देवी, गोबिंद बोरा, पृथ्वीराज कार्की, रीता देवी, माधवी देवी, गोबिदी देवी, खड़क सिंह, चतर सिंह, किशन सिंह, पुष्कर सिंह बोरा, करन पंत, पिंकी देवी आदि मौजूद रहे।











