*अल्मोड़ा।* अमर शहीद श्रीदेव सुमन के 82वें शहादत दिवस पर शनिवार को नगर निगम सभागार में *”समसामयिक संदर्भों में श्रीदेव सुमन”* विषय पर एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) के संयोजक पीसी तिवारी के संयोजन में आयोजित इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने अमर शहीद के जीवन संघर्ष, व्यक्तित्व और ऐतिहासिक बलिदान को याद करते हुए वर्तमान परिस्थितियों में उनके विचारों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि शहीद श्रीदेव सुमन का जीवन वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष की प्रेरणा देता रहेगा। संयोजक पीसी तिवारी ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। बताया कि 25 मई 1916 को जन्मे श्रीदेव सुमन ने मात्र 28 वर्ष की अल्पायु में जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए जो बलिदान दिया, वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे महान गाथाओं में से एक रहे हैं।
तिवारी ने बताया कि *श्रीदेव सुमन टिहरी की निरंकुश राजशाही से लड़ रहे थे*। उन्होंने 3 मई 1944 को जेल में ऐतिहासिक आमरण अनशन शुरू किया था। लगातार 84 दिनों के अभूतपूर्व अनशन के बाद 25 जुलाई 1944 को जेल में ही उनका निधन हो गया। तत्कालीन सत्ताधारियों ने उनके पार्थिव शरीर का सम्मान करने के बजाय रात के अंधेरे में भिलंगना नदी में बहा दिया। लेकिन उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं गया; इसने निरंकुश राजशाही के अंत और टिहरी के भारत गणराज्य में विलय का मार्ग प्रशस्त किया।
वक्ताओं ने कहा कि *आज भी सरकारें निरंकुश और तानाशाह हैं, जिनके खिलाफ लड़ना होगा*। प्रजातंत्र के दौर में भी सत्ता का रवैया पूरी तरह नहीं बदला है। ऐसे में जंतर-मंतर और देशभर में अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे युवाओं के आंदोलन को श्रीदेव सुमन के संघर्ष से जोड़कर देखा जा सकता है।
इस दौरान वक्ताओं ने शहीद श्रीदेव सुमन के अभूतपूर्व बलिदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत उनके कद के अनुरूप सर्वोच्च सम्मान/पद्म पुरस्कार दिए जाने की मांग भी उठाई।
संगोष्ठी में पूर्व प्रधानाचार्य व कवि नीरज पंत, वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र रावत, चंद्रशेखर द्विवेदी, जगदीश जोशी, डॉ. जेसी दुर्गापाल, चंद्रमणि भट्ट, आनंदी वर्मा, बलवंत नगरकोटी, भारती पांडे, हर सिंह बिष्ट, मो. वसीम, हीरा देवी, अमिता बजाज, लीला देवी, ममता, पूजा आर्या, देवकी देवी, दीपा देवी, जया साह, चंपा सुयाल, आशा, दीपांशु पांडे, शशांक राज, गिरधारी, कौस्तुभानंद भट्ट, जगदीश राम, *उपपा के महासचिव एडवोकेट नारायण राम* आदि शामिल रहे











