• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

सिंधु जल समझौता स्थगित होने के क्या हैं मायने?

27/05/25
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
21
SHARES
26
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

 

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

1960 में भारत के प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति के बीच ये
समझौता हुआ था। समझौते में सिंधु बेसिन से बहने वाली 6 नदियों को
पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में बांटा गया था।सिंधु समेत अन्य सहायक नदियों
को लेकर पानी का बंटवारा अक्सर दोनों देशों के बीच विवाद का कारण रहा
है।सिंधु जल समझौते को लेकर सुर्खियां बनी हुई हैं। हालांकि भारत और
पाकिस्तान युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं लेकिन सिंधु जल समझौता सस्पेंड
रहेगा। 22 अप्रैल को पहलगाम में 26 पर्यटकों की पाकिस्तान समर्थित
आतंकवादियों की ओर से हत्या के बाद भारत ने पड़ोसी देश के खिलाफ कई
कदम उठाए थे। इन्हीं में से एक कदम के तहत सिंधु जल समझौते को सस्पेंड
किया गया था।आजादी के बाद सिंधु जल के बंटवारे को लेकर दोनों देशों के
बीच लंबे समय तक विवाद चला। आखिरकार, 1960 में वर्ल्ड बैंक की
मध्यस्थता में सिंधु जल समझौता हुआ। उसके बाद से अब तक दोनों देशों के
बीच जो भी युद्ध हुए, उसमें भी इस संधि पर आंच नहीं आई थी लेकिन यह
भी सच है कि इस दौरान भारत ने कई बार पाकिस्तान को इस समझौते को
रद्द करने की चेतावनी दी थी।1960 में हुए सिंधु जल समझौते की अहमियत,
इसे लेकर दोनों देशों के बीच चले विवाद, इस विवाद की जड़ और राजनीतिक-
कानूनी पहलुओं को समझने में डॉक्टर एजाज हुसैन की लिखी किताब  काफी
मददगार है। हिमालय से निकलने वाली यह नदी भारत में जम्मू-कश्मीर और
पाकिस्तान में प्रवाहित होते हुए अरब सागर में मिल जाती है। 65 साल पहले
हुए सिंधु जल समझौते को दुनिया की सबसे कामयाब ऐसी संधियों में शामिल
किया जाता है। पाकिस्तान में करीब 80% खेती और एक तिहाई पनबिजली
उत्पादन में सिंधु नदी का योगदान है। ऐसे में उसकी इकॉनमी के लिए इस नदी
की काफी अहमियत है। भारत और पाकिस्तान युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं
लेकिन सिंधु जल समझौता सस्पेंड रहेगा। 22 अप्रैल को पहलगाम में 26 पर्यटकों
की पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों की ओर से हत्या के बाद भारत ने पड़ोसी
देश के खिलाफ कई कदम उठाए थे। इन्हीं में से एक कदम के तहत सिंधु जल
समझौते को सस्पेंड किया गया था।आजादी के बाद सिंधु जल के बंटवारे को
लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक विवाद चला। आखिरकार, 1960 में
वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल समझौता हुआ। उसके बाद से अब तक
दोनों देशों के बीच जो भी युद्ध हुए, उसमें भी इस संधि पर आंच नहीं आई थी
लेकिन यह भी सच है कि इस दौरान भारत ने कई बार पाकिस्तान को इस
समझौते को रद्द करने की चेतावनी दी थी।हिमालय से निकलने वाली यह नदी
भारत में जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान में प्रवाहित होते हुए अरब सागर में मिल
जाती है। 65 साल पहले हुए सिंधु जल समझौते को दुनिया की सबसे कामयाब
ऐसी संधियों में शामिल किया जाता है। पाकिस्तान में करीब 80% खेती और
एक तिहाई पनबिजली उत्पादन में सिंधु नदी का योगदान है। ऐसे में उसकी
इकॉनमी के लिए इस नदी की काफी अहमियत है। खैर, डॉक्टर हुसैन की किताब
में 8 चैप्टर हैं। इसकी शुरुआत में सिंधु बेसिन सिस्टम के बारे में बताया गया है
और यह भी कि क्यों इसे लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद था। इसे
खत्म कराने के लिए जब सिंधु जल समझौता हुआ तो उसमें वर्ल्ड बैंक की क्या
भूमिका रही। किताब में यह भी बताया गया है कि समझौते की शर्तें क्या हैं और
इसे किस तरह से लागू किया गया।इसमें और भी कई बातों का जवाब मिलता है।
जैसे, 1960 में किस वजह से भारत ने विवाद को खत्म करने के लिए वर्ल्ड बैंक
की मध्यस्थता स्वीकार की? यह भी कि वैश्विक वित्तीय संस्थान की मदद लेने को
पाकिस्तान क्यों राजी हुआ? सवाल यह भी है कि वर्ल्ड बैंक के मध्यस्थता की
प्रक्रिया में शामिल होने का कारण क्या था? डॉक्टर हुसैन लिखते हैं, डेविड  ने
कॉलियर्स मैगजीन में लिखे एक लेख में सिंधु जल बेसिन के डिवेलपमेंट का
प्रस्ताव रखा था। इसी वजह से वर्ल्ड बैंक ने इसमें भूमिका निभाई।वह लिखते हैं
कि भारत और पाकिस्तान ने राजनीतिक वजहों से वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता मंजूर
की। डॉक्टर हुसैन का यह भी दावा है कि वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान को इस
समझौते को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। वह बताते हैं कि इस संधि के
तहत सिंधु आयोग बनाया गया जिसका इसे लागू करने में बड़ा योगदान रहा है।
संधि होने के बाद पांच विवाद हुए हैं, जिनका जिक्र किताब में किया गया है और
जिसे सुलझाने में दोनों पक्ष कामयाब रहे। सिंधु आयोग की भी विवादों को
सुलझाने में बड़ी भूमिका रही है, वहीं इन विवादों के कानूनी और राजनीतिक
पहलुओं पर भी किताब में रोशनी डाली गई है।डॉक्टर हुसैन जिस सबसे बड़ी
बात की ओर इशारा करते हैं, वह यह है कि जब समझौता हुआ था, तब दुनिया
को जलवायु परिवर्तन की वजह से होने वाली दुश्वारियों का ख्याल दूर-दूर तक
नहीं था, जबकि आज यह बड़े संकट के रूप में उभरा है। भारत और पाकिस्तान
में पिछले कुछ वर्षों में इसी वजह से एक्स्ट्रीम वेदर पैटर्न दिख रहा है, जिससे बड़े
पैमाने पर जान-माल का नुकसान भी हुआ है। ऐसे में डॉक्टर हुसैन की किताब
सिंधु नदी पर जलवायु परिवर्तन के असर को समझने में मददगार है।भारत
समय-समय पर इस जल संधि को लेकर नाराजगी का इजहार करता आया है।
उसे लगता है कि समझौते में ज्यादातर पानी पाकिस्तान को दिया गया और
उसके साथ इंसाफ नहीं हुआ। 2023 में उसने पाकिस्तान से इसमें संशोधन के
लिए कहा था, लेकिन बात नहीं बनी। अब जबकि भारत ने संधि को सस्पेंड कर
दिया है तो इस बारे में आने वाले वक्त में दोनों देशों के बीच जरूर बात होगी
और तब यहां की सरकार इसमें तब्दीली का आग्रह करेगी क्योंकि वह समझौते के
तहत मिलने वाले पानी से  असंतुष्ट है। संधि के मुताबिक़, सिंधु, झेलम और
चिनाब को पश्चिमी नदियां बताते हुए इनका पानी पाकिस्तान के लिए तय किया
गया  जबकि रावी, ब्यास और सतलुज को पूर्वी नदियां बताते हुए इनका पानी
भारत के लिए तय किया गया। इसके मुताबिक़, भारत पूर्वी नदियों के पानी का,
कुछ अपवादों को छोड़कर, बेरोकटोक इस्तेमाल कर सकता है। वहीं पश्चिमी
नदियों के पानी के इस्तेमाल का कुछ सीमित अधिकार भारत को भी दिया गया
था. जैसे बिजली बनाना, कृषि के लिए सीमित पानी। इस संधि में दोनों देशों के
बीच समझौते को लेकर बातचीत करने और साइट के मुआयना आदि का
प्रावधान भी था।इसी संधि में सिंधु आयोग भी स्थापित किया गया. इस आयोग
के तहत दोनों देशों के कमिश्नरों के मिलने का प्रस्ताव था। संधि में दोनों कमिश्नरों
के बीच किसी भी विवादित मुद्दे पर बातचीत का प्रावधान है। इसमें यह भी था
कि जब कोई एक देश किसी परियोजना पर काम करता है और दूसरे को उस पर
कोई आपत्ति है तो पहला देश उसका जवाब देगा. इसके लिए दोनों पक्षों की
बैठकें होंगी। बैठकों में भी अगर कोई हल नहीं निकल पाया तो दोनों देशों की
सरकारों को इसे मिलकर सुलझाना होगा। साथ ही ऐसे किसी भी विवादित मुद्दे
पर तटस्थ विशेषज्ञ की मदद लेने या कोर्ट ऑफ़ ऑर्बिट्रेशन में जाने का प्रावधान
भी रखा गया है।पाकिस्तान ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत
के साथ सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया। सिंधु जल संधि को पहलगाम मेंआतंकवादी हमले के बाद नई दिल्ली ने स्थगित कर दिया है।संयुक्त राष्ट्र में
पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने भारत का सीधे तौर
पर उल्लेख किए बिना हिंद महासागर रिम एसोसिएशन से अपने बहिष्कार पर
भी अफसोस जताया और भारत की नौसैनिक श्रेष्ठता को आक्रामक नौसैनिक
विस्तार बताया।सिंधु जल संधि, जिसे कभी सीमा पार सहयोग का एक मॉडल
माना जाता था, अब पतन के कगार पर है। अगर भारत संधि रद्द कर देता है और
पश्चिमी नदियों के प्रवाह को रोक देता है, तो पाकिस्तान सूखे, अकाल और
आर्थिक विनाश की धीमी गति वाली आपदा का सामना करता है। फिर भी,
भारत की विशाल मात्रा में पानी संग्रहीत करने की अक्षमता बाढ़ की द्वितीयक
आपदा को खोल सकती है जो पाकिस्तान की दुर्दशा को और बढ़ा देगी। दोनों
परिदृश्य – भुखमरी या डूबना – पहले से ही कगार पर खड़े राष्ट्र के लिए एक
भयावह तस्वीर पेश करते हैं।अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, विश्व बैंक के नेतृत्व में,
मध्यस्थता और वृद्धि को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। भारत
के लिए, पानी को भू-राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का प्रलोभन
मानवीय और राजनयिक लागतों के खिलाफ तौला जाना चाहिए। 1960 में हुए
सिंधु जल समझौते के तहत सिंधु, चिनाब और झेलम नदी का पानी पाकिस्तान
को और रावी, व्यास, सतलज का पानी भारत को मिलता था। हालांकि 22
अप्रैल को पुलवामा हमले के बाद भारत ने इस संधि को रद कर दिया। 12 मई
को सीजफायर के तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमला न करने पर सहमति
जताई है। हालांकि, इसमें सिंधु जल समझौते का कोई जिक्र नहीं है। यूनाइटेड
नेशन में पाकिस्तान ने कहा कि सिंधु जल समझौता रद्द कप भारत ने
अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया है। पाक प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र
सुरक्षा परिषद से भी अपील की कि वह इस मामले पर नजर रखे और समय
रहते कदम उठाए ताकि कोई बड़ा संकट न पैदा हो। मानवही दृष्टिकोण से
लाभदायक है जल विद्युत के लिए नदियों पर बने बांधों में जमा होने
वाली मिट्टी को हटाना एक महत्वपूर्ण काम है। इसे डी-सिल्टिंग भी
कहा जाता है और इसे अंजाम देने के लिए बांध से पानी छोड़ना होता है लेकिन
इसकी पूर्व जानकारी उस क्षेत्र को देनी होती है जो नदी के प्रवाह क्षेत्र (डाउन
स्ट्रीम) में है। इस संधि को भारत न माने तो वह बांधों से पानी छोड़ने और दूसरी
जानकारियां देना बन्द कर देगा जिससे पाकिस्तान को अचानक बाढ़ या कृषि की
तबाही का सामना करना पड़ सकता है।ठक्कर कहते हैं, “यह अल्पकालिक और
त्वरित कदम हैं लेकिन अगर भारत दीर्घकालिक रणनीति बना रहा है तो वह
पाकिस्तान को हिस्से वाली पश्चिमी नदियों के पानी पर अपने अधिकार से
अधिक संग्रह कर सकता है। इसके लिए उसे बड़ी स्टोरेज बनानी होगी और वह
पानी को डायवर्ट कर दूसरे हिस्सों में भी भेज सकता है। *लेखक विज्ञान व*
*तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*

Share8SendTweet5
Previous Post

ग्राम पंचायत कुराड़ में पांचवीं देवभूमि बालिका सम्मान निधि के चैक वितरित

Next Post

मुख्यमंत्री ने किया 75 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित

Related Posts

उत्तराखंड

दिव्यांग छात्रों के लिए रिसर्च सेंटर की कवायद राज्य सरकार से नहीं हो रहा समन्वय

August 18, 2026
2
उत्तराखंड

पर्वतीय गांधी स्व. इन्द्रमणि बडोनी की पुण्यतिथि

August 18, 2026
3
उत्तराखंड

दयारा बुग्याल में बटर फेस्टिवल दूध-मट्ठा और मक्खन से होली खेलने का रिवाज

August 18, 2026
5
उत्तराखंड

हर महिला को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता : रुचि भट्ट

August 18, 2026
22
उत्तराखंड

डोईवाला: खराब मौसम के कारण हवाई यातायात प्रभावित, 05 उड़ानें डायवर्ट

August 18, 2026
16
उत्तराखंड

तमक नाले में आई अतिवृष्टि में लापता हुए डीजीबीआर के हवलदार की खोज जारी

August 18, 2026
4

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67722 shares
    Share 27089 Tweet 16931
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45790 shares
    Share 18316 Tweet 11448
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38075 shares
    Share 15230 Tweet 9519
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37455 shares
    Share 14982 Tweet 9364
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37374 shares
    Share 14950 Tweet 9344

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

दिव्यांग छात्रों के लिए रिसर्च सेंटर की कवायद राज्य सरकार से नहीं हो रहा समन्वय

August 18, 2026

पर्वतीय गांधी स्व. इन्द्रमणि बडोनी की पुण्यतिथि

August 18, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.